फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Indian Army receives Igla-S air defense system from Russia, to be deployed on China-Pakistan border

Defence: भारतीय सेना को रूस से मिला Igla-S एयर डिफेंस सिस्टम, चीन-पाकिस्तान सीमा पर होगी तैनाती

Tue, 09 Apr 2024 03:11 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 09 Apr 2024 03:11 PM IST
सार

इग्ला-एस हाथ से चलने वाला डिफेंस सिस्टम है, जिसे किसी व्यक्ति या चालक दल भी ऑपरेट कर सकता है। इसे नीची उड़ान वाले विमानों को गिराने के लिए डिजाइन किया गया है और यह क्रूज मिसाइलों और ड्रोन जैसे हवाई लक्ष्यों की पहचान कर उन्हें निशाना बना सकता है।

विज्ञापन
Indian Army receives Igla-S air defense system from Russia, to be deployed on China-Pakistan border
Indian Army - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारतीय सेना को रूस से इग्ला-एस (Igla-S) मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (मैनपैड्स) के पहले बैच की आपूर्ति कर दी है। पहले बैच में 24 इग्ला-एस की आपूर्ति की गई है, जिनमें 100 मिसाइलें भी शामिल हैं। इस सौदे के तहत इग्ला-एस का भारत में घरेलू स्तर पर भी उत्पादन होगा। इग्ला-एस सिस्टम के आने से भारतीय सेना की बहुत कम दूरी की वायु रक्षा क्षमताओं (VSHORAD) में इजाफा होगा।  

विज्ञापन


इग्ला-एस की खूबियां
इग्ला-एस हाथ से चलने वाला डिफेंस सिस्टम है, जिसे किसी व्यक्ति या चालक दल भी ऑपरेट कर सकता है। इसे नीची उड़ान वाले विमानों को गिराने के लिए डिजाइन किया गया है और यह क्रूज मिसाइलों और ड्रोन जैसे हवाई लक्ष्यों की पहचान कर उन्हें निशाना बना सकता है। इग्ला-एस प्रणाली में 9M342 मिसाइल, 9P522 लॉन्चिंग मैकेनिज्म, 9V866-2 मोबाइल टेस्ट स्टेशन और 9F719-2 टेस्ट सेट शामिल हैं। एयर डिफेंस सिस्टम में ये सभी प्रणालियां एक साथ मिल कर काम करती हैं। यह मिसाइल सिस्चम 500 मीटर से छह किमी तक मार कर सकता है। वहीं यह पांच सेकंड में एक्टिवेट हो जाता है और 10 से 3500 मीटर के एल्टीट्यूड के ऊंचाई वाले इलाकों में काम कर सकता है।  
विज्ञापन


भारत ने पिछले साल रूस के साथ 120 लॉन्चर और 400 मिसाइलों के सौदे पर दस्तखत किए थे। जिसके तहत पहले बैच की आपूर्ति रूस से की गई है, जबकि बाकी के लॉन्चर और मिसाइलें ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत भारतीय कंपनी भारत में ही बनाई जाएंगी। इग्ला-एस सिस्टम को देश की उत्तरी सीमा एलएसी और उच्च पर्वतीय इलाकों में तैनात किया जाएगा। पहाड़ी इलाकों में इग्ला-एस मैनपैड्स बेहद कारगर है। रक्षा सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना की एक रेजिमेंट को पहले ही इग्ला-एस एयर डिफेंस सिस्टम मिल चुका है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यूपीए सरकार के दौरान जारी हुआ था आरएफपी
बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली के लिए प्रस्ताव का अनुरोध (रिक्वेस्ट ऑफ प्रपोजल) 2010 में यूपीए सरकार के दौरान जारी हुआ था। 2018 में, इग्ला-एस बनाने वाली रूस की रोसोबोरोनेक्सपोर्ट ने सबसे कम बोली लगाई। इस बोली में फ्रांस की एमबीडीए-निर्मित मिस्ट्रल और स्वीडन की एसएएबी-निर्मित आरबीएस 70 एनजी भी शामिल हुई थी। 

भारतीय सेना में अभी तक इस्तेमाल की जाती रहीं पुरानी इग्ला-1एम सिस्टम को इग्ला-एस से रिप्लेस किया जाएगा। 2012 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिख कर मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम को बदलने की बात कही थी। 


एक बार मौजूदा जरूरतें पूरी हो जाने के बाद, भारतीय सेना पुराने इग्ला सिस्टम को उन्नत लेजर-बीम राइडिंग और इंफ्रारेड VSHORADS से बदलने की योजना बना रही है। डीआरडीओ ने हाल ही में स्वदेशी VSHORADS मिसाइलों के दो उड़ान परीक्षण भी किए थे।    

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed