फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Indian Army Drones Danger Microwave Weapons to be used Security Forces Pakistan China Border News and updates

Indian Army: ड्रोन के बढ़ते खतरों को देखते हुए सेना ने कसी कमर, पलक झपकते ही मार गिराएंगे माइक्रोवेव हथियार!

Wed, 21 Aug 2024 03:34 PM IST
Harendra Chaudhary हरेंद्र चौधरी
Updated Wed, 21 Aug 2024 03:34 PM IST
विज्ञापन
सार
सैन्य सूत्रों के मुताबिक ड्रोन के बढ़ते खतरे को देखते हुए सेना एक ग्राउंड-बेस्ड सिस्टम चाहती है, जिसमें लेटेस्ट 3डी रडार हो जो ड्रोन का खुद ही पता लगा सके। 
loader
Indian Army Drones Danger Microwave Weapons to be used Security Forces Pakistan China Border News and updates
भारतीय सेना की तैयारी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर ड्रोन का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान से सटे पंजाब के बॉर्डर इलाकों में तकरीबन रोजाना ही ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी को अंजाम देने की कोशिश की जाती है, लेकिन सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के चलते उन्हें वक्त रहते ही मार गिराया जाता है। बीएसएफ ने 1 जनवरी से अब तक 137 ड्रोन जब्त किए हैं, साथ ही 28 हथियार और 160.28 किलोग्राम हेरोइन भी बरामद की है। वहीं, अब पाकिस्तान ऐसे ड्रोन भेज रहा है, जो न केवल छोटे हैं, बल्कि आवाज भी नहीं करते। ऐसे ड्रोन भारतीय सेना में चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। भारतीय सेना ड्रोन के बढ़ते खतरे को देखते हुए लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के साथ ऐसे सिस्टम को खोज रही है, जो इन्हें पलक झपकते ही मार गिराए। 


युद्ध में ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम का इस्तेमाल
सैन्य सूत्रों के मुताबिक ड्रोन के बढ़ते खतरे को देखते हुए सेना एक ग्राउंड-बेस्ड सिस्टम चाहती है, जिसमें लेटेस्ट 3डी रडार हो जो ड्रोन का खुद ही पता लगा सके। साथ ही, सिस्टम इस तरह का हो, जो 6 इंच से लेकर 2 मीटर तक के साइज वाले ड्रोन को खोजने क्षमता रखता हो। सैन्य सूत्रों का कहना है कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे युद्धों में यह देखने में आया है कि ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम (यूएएस) का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसे देखते हुए भारतीय सेना को भी काउंटर-यूएएस सिस्टम की जरूरत है। 


सेना को चाहिए 90 उच्च शक्ति वाले माइक्रोवेव (मार्क II) सिस्टम
सैन्य सूत्रों के मुताबिक, भारत-पाकिस्तान सीमा पर छोटे ड्रोनों से हथियार और ड्रग्स गिराना एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। वहीं, भारत-चीन सीमा पर ड्रोन का इस्तेमाल जासूसी के लिए किया जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि चीन इसके लिए कई तरह के ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। वहीं, रूस-यूक्रेन और आर्मेनिया-अजरबैजान युद्ध में टैंकों और सैन्य काफिलों पर हमलों के लिए ड्रोन का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने सेना की जरूरतों को देखते हुए रिक्वेस्ट फॉर इनफॉरमेशन यानी सूचना के लिए अनुरोध (RFI) जारी किया है, जो अधिग्रहण प्रक्रिया का पहला चरण है। सैन्य सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना यूएएस या ड्रोन के बढ़ते खतरों का मुकाबला करने के लिए 90 उच्च शक्ति वाले माइक्रोवेव (मार्क II) सिस्टम चाहिए। रक्षा मंत्रालय ने इसे 'एंटी यूएएस हाई पावर माइक्रोवेव सिस्टम' नाम दिया है। 

बिजली की रफ्तार से हमला करते हैं माइक्रोवेव हथियार
माइक्रोवेव हथियार असल में डायरेक्ट एनर्जी विपेंस (डीईडब्ल्यू) के परिवार से संबंध रखते हैं, जहां लेजर, माइक्रोवेव या पार्टीकल बीम से घातक एनर्जी बनाई जाती है, जो बेहद तेज रफ्तार से टारगेट को निशाना बनाती है। वहीं, डीईडब्ल्यू पारंपरिक हथियारों की तुलना में बेहद सटीकता के साथ निशाना लगा सकती है। प्रति शॉट इसकी लागत भी कम आती है। इसका आसानी से पता नहीं लगाया जा सकता है और बिजली की रफ्तार से टारगेट को ध्वस्त करती है। 

ड्रोन को जाम करने के लिए लगा हो जैमर
सेना का कहना है कि नए सिस्टम में निगरानी, ड्रोन का पता लगाने के लिए ट्रैकिंग क्षमता, टारगेट को कितनी दूरी से मार गिराना है, उसकी कैल्कुलेशन के लिए माइक्रोप्रोसेसर होना चाहिए, जो दुश्मन के ड्रोन को नष्ट कर सके या 3 किमी की दूरी से उसे निष्क्रिय कर सके। सिस्टम में लगा रडार ऑटोमैटिकली ही टारगेट का पता लगाए और उसे ट्रैक करे। साथ ही, खुद ही यह फैसला करे कि खतरे से निपटने के लिए किस तरह के हथियार का इस्तेमाल करना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि सेना ऐसा सिस्टम चाहती है जो यह भी पता लगा सके कि ड्रोन कहीं स्वार्म यानी 'झुंड' में तो नहीं आ रहे हैं। साथ ही, रात और दिन दोनों वक्त काम करने में सक्षम होना चहिए। वहीं, इसका हाई पावर माइक्रोवेव सिस्टम जैमर दुश्मन के ड्रोन की फ्रिक्वेंसी को जाम करने की भी क्षमता रखता हो। 

हाई एल्टीट्यूड इलाकों में कर सके काम
सेना का कहना है कि यह सिस्टम ऐसा होना चाहिए, जो व्हीकल पर लगाया जा सके और मौजूदा एय़र डिफेंस सिस्टम के साथ आसानी से जोड़ा जा सके। साथ ही, यह सिस्टम 4,500 मीटर की ऊंचाई वाले हाई एल्टीट्यूड और पहाड़ी इलाकों, मैदानी इलाकों, रेगिस्तानों और भारत के तटीय क्षेत्रों और माइनस 20 डिग्री से प्लस 55 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान रेंज और 95 फीसदी तक की आर्द्रता स्तर में आसानी से काम कर सके। सेना के मुताबिक वह इस सिस्टम को उन जगहों पर लगाना चाहती है कि जहां चीन और पाकिस्तान सबसे ज्यादा ड्रोन भेज रहे हैं। वह इस सिस्टम को मैदानी, रेगिस्तानी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात करना चाहती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed