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Indian Army: 'एलएसी पर सेना की मजबूत तैनाती, एक साल से किसी इलाके में नहीं हुआ संघर्ष', जनरल पांडे ने क्या कहा

Mon, 29 Jan 2024 03:54 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 29 Jan 2024 03:54 PM IST
सार

Indian Army: एलएसी की स्थिति को लेकर सेना प्रमुख ने बताया कि बीते एक साल से टकराव का कोई बिंदु नहीं देखा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शेष दो मुद्दों का भी समाधान होगा।  

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Indian Army Chief General Manoj Pande on Situation along the Line of Actual Control
सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे - फोटो : एएनआई

विस्तार

सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने सोमवार को कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति स्थिर और संवेदनशील बनी हुई है। बीते एक साल में एलएसी के आसपास और अधिक टकराव के बिंदु नहीं देखे गए हैं। उन्होंने कहा, 'दूसरे पक्ष के साथ हमारी सैन्य और राजनयिक स्तर की वार्ता जारी है। हमें उम्मीद है कि हम दो बचे हुए मुद्दों का समाधान ढूंढ लेंगे। हमने मजबूत और संतुलित तैनाती की हुई है।'

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जनरल पांडे ने कहा, 'पहला, हमारे अधिकारियों, जूनियर कमीशन अधिकारियों (जेसीओ) के पास रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का ज्ञान है, जो असल में इलाके में उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। दूसरा, हमारे पास अकादमिक विशेषज्ञ हैं, जो 'ए' श्रेणी के प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में काम करते हैं। तीसरा, हमारे पास नागरिक सुरक्षा कायर्बल है, जो हमारी कार्यशालाओं और हमारी विनिर्माण इकाइयों में काम करता है। इन तीनों रास्तों के जरिए हम नवाचार की क्षमता का लाभ उठाना चाहते हैं।' 

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उन्होंने आगे कहा, 'एक बार जब हम जरूरत की पहचान कर लेते हैं और इन मार्गों के जरिए प्रस्ताव सामने आते हैं, तो सेना का डिजाइन ब्यूरो जांच करता है।' जनरल पांडे ने कहा, हाल ही में 'विद्युत रक्षक' नाम से एक परियोजना शुरू की गई है। इसके तहत हमने विक्रेताओं में से एक को नवाचार (इनोवेशन) और तकनीकी (टेक्नोलॉजी) का हस्तांतरण किया है। 

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सेना प्रमुख ने आगे बताया कि अग्रिम मोर्चे पर 'मेड इन इंडिया' हथियारों की तैनाती की गई है। उन्होंने कहा, 'मॉबिलिटी व्हीकल्स या प्रोटेक्टेड व्हील्ड व्हीकल्स ऐसी स्थिति में हमें मदद देते हैं। हमारे पास विभिन्न प्रकार के ड्रोन और मानव रहित वाहन (यूएवी) हैं। हम क्वांटम कंप्यूटिंग के परीक्षणों के अंतिम चरण में हैं। यह पूरा होने पर हमारे पास क्वांटम कंप्यूटिंग एन्क्रिप्शन और तकनीकी के जरिए बेहतर सुरक्षित संचार होगा।'

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