लड़ाकू विमान की महिला पायलटों को चार साल तक मां नहीं बनने की सलाह
- भारतीय वायुसेना ने दी सलाह
- कानूनी रूप से बाध्य नहीं है महिलाएं
- 18 जून को फाइटर स्ट्रीम में तैनात हो जाएंगी महिलाएं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय वायु सेना ने देश की पहली तीन महिला लड़ाकू विमान पायलटों को अगले चार साल तक मां नहीं बनने की सलाह दी है। हालांकि वायु सेना ने स्पष्ट किया है कि यह सलाह कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। यह केवल इसलिए है ताकि महिला पायलटों के प्रशिक्षण पर विपरीत असर न पड़े।
भावना कंठ, मोहाना सिंह और अवनि चतुर्वेदी प्राथमिक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद इस साल 18 जून को फाइटर स्ट्रीम में तैनात हो जाएंगी। इसके बाद उन्हें एक साल की एडवांस ट्रेनिंग दी जाएगी। महिला पायलटों को जून 2017 तक लड़ाकू विमान के कॉकपिट में जाने का मौका मिलेगा।
ऐसे में वायु सेना ने इन महिला पायलटों से कहा है कि वे अगले चार सालों तक मां बनने के बारे में न सोचें।
1991 में पहली बार महिलाएं बनी थीं पायलट
महिला लड़ाकू पायलटों का पहला बैच 18 जून को भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाएगा। एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने मंगलवार को कहा था कि तीन महिला प्रशिक्षु अधिकारियों ने लड़ाकू भूमिका में शामिल किए जाने की इच्छा व्यक्त की है। राहा ने कहा कि हमने 1991 में महिलाओं को पायलटों के रूप में शामिल किया था, लेकिन यह केवल हेलीकॉप्टर और परिवहन (विमानों) के लिए किया गया था।
मैं महिलाओं को फाइटर पायलटों के रूप में शामिल करने के भारतीय वायुसेना के प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए रक्षा मंत्रालय का धन्यवाद करना चाहूंगा। रक्षा मंत्री परिकर ने भारतीय वायु सेना में फाइटर पायलटों के रूप में महिलाओं को शामिल करने के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने पर जोर देने के लिए राहा की तारीफ की है।