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India-US Trade: भारत अमेरिका से एफ-35 फाइटर जेट नहीं खरीदेगा; ब्लूमबर्ग ने सरकार के सूत्रों के हवाले से दी खबर

Fri, 01 Aug 2025 02:27 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 01 Aug 2025 02:27 AM IST
सार

सूत्रों के मुताबिक,  भारत सरकार ने अमेरिका को बता दिया है कि वह एएफ-35 समेत निकट भविष्य में उससे कोई भी बड़ी रक्षा खरीद नहीं करने जा रही है। इन अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत रक्षा खरीद में हथियारों के संयुक्त विकास, तकनीक के हस्तांतरण, भारत में निर्माण और आत्मनिर्भरता जैसी शर्तों को प्राथमिकता देता रहेगा।

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India will not buy F-35 fighter jets from America; report claims
एफ-35 फाइटर जेट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर 25 फीसदी टैरिफ की घोषणा के बाद भारत सरकार ने अमेरिकी स्टिल्थ फाइटर जेट एफ-35 खरीदने की किसी भी योजना से इन्कार कर दिया है। ब्लूमबर्ग ने भारत सरकार के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।

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गोपनीयता की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार ने अमेरिका को बता दिया है कि वह एएफ-35 समेत निकट भविष्य में उससे कोई भी बड़ी रक्षा खरीद नहीं करने जा रही है। इन अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत रक्षा खरीद में हथियारों के संयुक्त विकास, तकनीक के हस्तांतरण, भारत में निर्माण और आत्मनिर्भरता जैसी शर्तों को प्राथमिकता देता रहेगा।
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लंबे समय से अमेरिकी रक्षा अधिकारी यह संकेत देते रहे हैं कि इस वर्ष फरवरी में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच वार्ता में इन विमानों को खरीदे जाने की बात हुई थी। ट्रंप ने मीडिया के सामने भी भारत को एफ-35 बेचने के प्रस्ताव की बात कही थी। लेकिन भारत ने कभी इसके लिए हामी नहीं भरी। उस समय दोनों देशों के बीच अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय कारोबार 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने और इसके लिए अमेरिका से बड़ी मात्रा में रक्षा खरीद की बात कही गई थी। इसी के तहत ट्रंप ने एफ-35 विमान भारत को बेचने का प्रस्ताव दिया था। भारत ने हाल के समय में अमेरिका से रक्षा खरीद बढ़ाई है और इनमें एमएच 60आर सीहॉक हेलिकॉप्टर और पी-8आई समुद्री निगरानी विमान शामिल हैं। इसके बावजूद भारत ने अमेरिका से उच्च तकनीक वाली खरीद करने में तब तक अनिच्छा जताई जबतक भारत में निर्माण की शर्त न पूरी हो। 
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एफ-35 फाइटर जेट की खासियत क्या-क्या हैं?

  • स्टेल्थ तकनीक: एफ-35 लड़ाकू विमान अपनी आवाज से तेज गति की वजह से दुश्मन के रडार में आसानी से पकड़ में नहीं आता। दरअसल, स्टेल्थ विमान होने की वजह से इसकी रफ्तार 1.6 मैक (करीब 1930 किमी/घंटे तक पहुंच जाती है। इस रफ्तार में कई आधुनिक रडार भी विमान का पता नहीं लगा पातीं।
  • आधुनिक सेंसर: एफ-35 बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने अपने इस लड़ाकू विमान में आधुनिक सेंसर इस्तेमाल किए हैं। इसके चलते यह फाइटर जेट अपने ऊपर किए जाने वाले हमलों को लगभग तुरंत पहचान कर पलटवार की क्षमता रखता है। 
  • नेटवर्क आधारित युद्धक: एफ-35 का नेटवर्क सिस्टम इसके नियंत्रण से जुड़ी हर जानकारी जमीन आधारित संपर्क केंद्र में पहुंचती है। इसके अलावा यह विमान अभियान के दौरान ही जरूरी जानकारियां करीब के लड़ाकू विमानों तक भी पहुंचा सकता है। 
  • हथियार प्रणाली: एफ-35 में अमेरिका की कुछ सबसे घातक एयर-टू-एयर मिसाइलें और एयर-टू-ग्राउंड बम लगाए गए हैं। इसके अलावा जेट में एक 25 मिमी की क्षमता वाली आर्टिलरी का भी इस्तेमाल किया गया है। एफ-35ए को परमाणु बम ले जाने की मंजूरी भी दी जा चुकी है। 
  • हेलमेट पर लगा डिस्प्ले सिस्टम: एफ-35 का सबसे खतरनाक पहलू है इसके पायलट को मिलने वाला हेलमेट सिस्टम, जो कि अपने आप में एक कंप्यूटर है। किसी भी अभियान के दौरान पायलट को लड़ाकू विमान के डैशबोर्ड में नहीं देखना पड़ता। बल्कि उन्हें मिलने वाले हेलमेट में ही आसपास का 360 डिग्री व्यू और नियंत्रण पैनल अपने आप मौजूद रहता है। इसके अलावा इस हेलमेट के जरिए पायलट नाइट विजन का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे रात में चलने वाले अभियान आसान हो जाते हैं। 


क्या है एफ-35 लड़ाकू विमान की कीमत?
एफ-35 लाइटनिंग स्ट्राइक-II के तीनों वर्जन बेहद महंगे हैं। जहां एफ-35ए को वायुसेना के लिए डिजाइन किया गया है, वहीं एफ-35बी थलसेना की मदद के लिए है। वहीं एफ-35सी नौसेना के लिए बनाया गया है।

  • एफ-35ए: पारंपरिक टेकऑफ और लैंडिंग (CTOL) संस्करण। मुख्य रूप से अमेरिकी वायुसेना और सहयोगी देशों के लिए।
  • एफ-35बी: शॉर्ट टेकऑफ/वर्टिकल लैंडिंग (STOVL) संस्करण, अमेरिकी मरीन कोर के लिए। जो छोटे एयरस्ट्रिप से उड़ान भरने में सक्षम।
  • एफ-35सी: एयरक्राफ्ट कैरियर आधारित (CATOBAR) संस्करण, जिसे अमेरिकी नौसेना के विमान वाहक पोतों से संचालन के लिए डिजाइन किया गया। 

लॉकहीड मार्टिन ने इन तीनों वर्जन की कीमतें भी अलग-अलग रखी हैं। जहां एफ-35ए सबसे कम 8 करोड़ डॉलर में खरीदा जा सकता है, तो वहीं एफ-35बी की कीमत करीब 10 करोड़ डॉलर रखी गई है। वहीं, एफ-35सी 9-10 करोड़ डॉलर में बेचा जाता है। 


रूस ने दिया है एसयू-57ई बेचने का प्रस्ताव
अमेरिकी एफ-35 की राह में सबसे बड़ा रोड़ा रूस का एसयू-57ई है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार जुलाई महीने में ही रूस ने भारत को अपना पांचवीं पीढ़ी का स्टिल्थ फाइटर जेट एसयू-57 ई बेचने का प्रस्ताव दिया है। खास बात यह है कि रूस ने इसके लिए तकनीक के हस्तांतरण समेत भारत में निर्माण का प्रस्ताव भी दिया है। इसे नासिक के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के प्लांट में बनाने का प्रस्ताव है।

भारत में बन सकते हैं 60 फीसदी पुर्जे
रूस के प्रस्ताव के अनुसार भारत में बनने वाले एसयू-57ई में 60 फीसदी पुर्जे भारतीय होंगे और इससे भारत इस विमान में स्वदेश निर्मित मिसाइलों को खुद तैनात कर पाएगा। इससे भारत इनकी मारक क्षमता को अपनी जरूरतों के अनुसार ढाल पाएगा।

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