पाक को 'ग्रे लिस्ट' में डालने के एफएटीएफ के फैसले का भारत और अमेरिका ने किया स्वागत
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आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान पर शिकंजा कसने के लिए फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) के उसे ग्रे लिस्ट में डालने के फैसले का भारत और अमेरिका ने स्वागत किया है। इस मामले में शनिवार को विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि पाकिस्तान ने काफी उच्च स्तर पर वैश्विक चिंताओं के समाधान और फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) के मानक का पालन करने की राजनीतिक प्रतिबद्धता जताई थी। मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकियों को वित्तीय सहायता पर लगाम लगाने की बात की गई थी, लेकिन हाफिज सईद जैसे आतंकियों और जमात-उद-दावा, लश्कर जैसे संगठनों को जिस तरह की छूट पाकिस्तान में मिली हुई है यह एफआईटीएफ के मानकों के खिलाफ है।
The freedom and impunity with which the designated terrorists like Hafiz Saeed and entities like Jamaat-Ud-Dawaa, Lashkar-e-Tayabba, Jaish-e-Mohammed continue to operate in Pakistan is not in keeping with such commitments: MEA 2/2
— ANI (@ANI) June 30, 2018विज्ञापन
वहीं, खास बात यह है कि पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता नदीम नुसरत ने भी पाक को ग्रे सूची में रखने के लिए फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने एफएटीएफ के फैसले को सही ठहराते हुए कहा, 'हमने कभी नहीं देखा कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया हो। नुसरत ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में आतंकी घटनाएं हुई हैं, जहां पर आतंकियों ने पाक के साथ अपने संबंध को कबूला है। बताते चलें कि पाकिस्तान पर आरोप है कि वह आतंकवादियों की आर्थिक मदद को रोक पाने में असफल रहा है। इस बड़े झटके के बाद अब पाकिस्तान को ये डर सता रहा है कि कहीं उसे ब्लैक लिस्ट में ना डाल दिया जाए। अधिकारियों द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक ब्लैक लिस्ट से बचने के लिए पाकिस्तान ने 15 महीनों के अंदर 26 सूत्रीय एक्शन प्लान भी तैयार किया था बावजूद इसके उसके खिलाफ ये कदम उठाया गया।
इस एक्शन प्लान में बताया गया है कि आतंकियों को दी जाने वाली आर्थिक मदद को किस प्रकार रोका जाएगा और इसके लिए कौन कौन से कदम उठाए जाएंगे। इसमें मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद को दी जा रही आर्थिक मदद पर भी रोक की बात कही गई है।
26 सूत्रीय एक्शन प्लान जमा करने के बाद आया था फैसला
पाकिस्तान द्वारा 26 सूत्रीय एक्शन प्लान जमा करने के बाद ये फैसला सामने आया। कहा जा रहा है कि ग्रे लिस्ट में आने से पाकिस्तान को आर्थिक नुकसान पहुंचेगा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी उसकी छवि को आघात होगा। इस स्थिति से बचने के लिए अख्तर ने एफएटीएफ से आग्रह भी किया था कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से हटा दिया जाए।
पाकिस्तान की 26 सूत्रीय एक्शन प्लान को एफएटीएफ ने मान लिया। पैरिस में हुई इस बैठक में अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस ने पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखने का समर्थन किया। बताया जा रहा है कि इस बैठक में अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के अलावा पाकिस्तान के खास सहयोगी चीन, तुर्की और सऊदी अरब भी मौजूद थे। इन सहयोगियों ने भी इस ग्रे लिस्ट के फैसले का पूर्ण समर्थन किया।
विदेशी ऑफिस के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान को ग्रे सूची में बरकरार रखना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। यह एक राजनीतिक फैसला है और आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के प्रदर्शन का इससे कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस लिस्ट में एक साल या उससे भी अधिक समय तक रह सकता है।
स्थानीय मीडिया के अनुसार यह फैसला एफएटीएफ की पैरिस में हुई बैठक में बुधवार रात किया गया। उस वक्त वहां पाकिस्तान के वित्त मंत्री शमशाद अख्तर पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। बता दें एफएटीएफ एक अंतर्राज्यीय निकाय है जो धन शोधन तथा आतंकवादी वित्तीयन का सामना करने के लिए मानक निर्धरित करता है। इसकी स्थापना 1989 में हुई थी।