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पैंगोंग के दक्षिण में हुई अगस्त की सैन्य कार्रवाई साबित हुई गेम चेंजर
Sun, 14 Feb 2021 06:11 AM IST
Amit Mandal
गुंजन कुमार, नई दिल्ली।
गुंजन कुमार, नई दिल्ली।
Published by: Amit Mandal
Updated Sun, 14 Feb 2021 06:11 AM IST
सार
- सीडीएस स्तर पर चीन के साथ अबतक की सबसे लंबी तनातनी और पीछे हटने के समझौते की पूरी प्रक्रिया का किया जा रहा व्यावसायिक आकलन
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China Army
- फोटो : PTI
विस्तार
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) स्तर पर चीन की पिपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ नौ महीने की अबतक की सबसे लंबी तनातनी और पीछे हटने के समझौते की पूरी प्रक्रिया का व्यावसायिक आकलन किया जा रहा है। पूर्वी लद्दाख की दुर्गम उंचाई और भीषण ठंड में बिना तय सीमा रेखा के मानक के अपने इलाके से दुश्मन को दूर रखने की इस पूरी कवायद में नफा नुकसान के कई उदाहणों को रिकार्ड करने का काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। गौरतलब है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) दरअसल क ाल्पनिक लाइनें हैं जिनपर दोनों देशों का अलग अलग मत है।
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सेना के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि दुनिया की सबसे बड़ी और ताकतवार माने जाने वाली सेना पीएलए के सामने नौ महीने तक आंखों में आंखे डाले किसी भी हद तक जाने की मंशा जाहिर कर भारतीय सेना ने दुनिया ही नहीं चीन को भी कड़ा संदेश दिया है। सूत्रों के मुताबिक नौ महीने तक विभिन्न विपरीत परिस्थितियों में चीन की पैंतरेबाजियों को हर मोर्चे पर नाकाम करना पूरी सैन्य व सामरिक योजना का हिस्सा थी जो बखूबी असरकारक रही। भारत पिछले साथ अप्रैल में अपने युद्धाभ्यास के बहाने पूर्वी लद्दाख में बड़े जामावड़े के चीनी सेना की चाल को समझ गया था कि वह कई जगहों पर एलएसी को बदलने की जुगत में है जिसे पूरी तरह नाकाम किया गया। यह भारत की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
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सूत्रों ने बताया कि पीएलए ने पैंगोंग झील के उत्तरी भाग में चीन के फिंगर 8 से 4 तक आ कर भारतीय सेना को जबरदस्त दबाव में ले आया था। लेकिन उस विषम परिस्थिति में सेना ने झील के दक्षिणी इलाकेके अहम उंचाईयों पर कब्जा करने का असंभव लगने वाला काम ऐसी सुगमता से किया कि चीन हतप्रभ रह गया। उसकेठीक बाद फिंगर4 के पास की एक अहम चोटी को अपने कब्जे में लेकर रहा सहा कसर भी पूरा कर दिया। इसकेबाद दोनों सेनाएं बिल्कुल आमने सामने थीं। लेकिन चीन समझ गया था कि खेल पलट चुका है। इसके बाद से ही चीन बचाव की मुद्रा में रहने लगा। इस बीच परंपरा से इतर गोलियां भी चली जो चीन के लिए एक कड़ा सबक था।
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पैंगोंग पर इस बदले खेल का सीधा असर सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर चल रही बातचीत पर पड़ा। भारत का पलड़ा भारी रहा और चीन के तेवर ढीले पड़ते रहे। जमीन पर सेना और बातचीत में राजनयिक स्तर पर काफी परिपक्वता दिखाई गई जिससे चीन समझ गया है किअब ज्यादा मनमानी नहीं चलेगी।
सूत्रों ने बताया कि इस घटना का एक बड़ा हासिल है एलएससी पर भारतीय सेना के रूल ऑफ इंगेजमेंट के बदलाव का चीन को भान हो जाना। गलवां से सबक लेते हुए भारतीय सेना ने चीन को बता दिया है कि अब जब भी पीएलए की तरफ से जानलेवा कार्रवाई होगी तो भारतीय सेना गोली चलाएगी। मामले के जुड़े अधिकारी ने बताया कि इस तरह के कई सैन्य और सामरिक मामलों के तकनीकी पहलूओं को बड़े स्तर पर दस्तावेज का रुप दिया जा रहा है।