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IONS: थाईलैंड में आयोजित हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी की समाप्ति, अगले चक्र के लिए भारत बना सह-अध्यक्ष
Sat, 23 Dec 2023 04:10 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Sat, 23 Dec 2023 04:10 AM IST
सार
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन में 27 सदस्य और पर्यवेक्षक देशों की नौसेनाओं के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। भारत की ओर नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने तीन सदस्यीय नौसैनिक प्रतिनिधिमंडल के साथ कार्यक्रम में शिरकत की थी।
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Chief of Naval Staff Admiral R. Hari Kumar
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
थाईलैंड में हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (आईओएनएस) शिखर सम्मेलन समाप्त हो गया। सम्मेलन का आयोजन बैंकॉक में रॉयल थाई नौसेना ने किया था। इस दौरान भारत ने आगामी चक्र के लिए समुद्री सुरक्षा और एचएडीआर पर आईओएएनएस कार्य समूह के सह-अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला है। सम्मेलन 19 दिसंबर को शुरू हुआ था, जो 22 दिसंबर तक चला।
भारतीय नौसेना के ध्वज को आईओएनएस ध्वज के रूप में चुना
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन में 27 सदस्य और पर्यवेक्षक देशों की नौसेनाओं के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। भारत की ओर नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने तीन सदस्यीय नौसैनिक प्रतिनिधिमंडल के साथ कार्यक्रम में शिरकत की थी। इस वर्ष थाईलैंड ने आईओएनएस सम्मेलन की अध्यक्ष की। सम्मेलन में अगले दो वर्षों के लिए कार्य योजना को अंतिम रूप दिया गया। सम्मेलन में सबसे पहले भारत द्वारा डिजाइन किए गए ध्वज को आईओएनएस ध्वज के रूप में चुना गया। भारत ने आगामी चक्र के लिए सह-अध्यक्ष के रूप में भी पदभार संभाला। सम्मेलन में कोरिया गणराज्य की नौसेना का भी स्वागत किया गया।
समुद्री खतरे अभी भी बरकरार हैं लेकिन हमें उनकी सूक्ष्म समझ है
आईएफसी-आईओआर केंद्र के निदेशक ने शुक्रवार को कहा कि समुद्री डकैती, तस्करी, सशस्त्र डकैती और अवैध मछली पकड़ने जैसे अन्य समुद्री खतरे अब भी बरकरार है। हालांकि, आईएफसी-आईओआर की स्थापना से अधिकारियों को इन चुनौतियों से निपटने में मदद जरूर मिली है। बता दें, आईएफसी-आईओआर एक अनूठा केंद्र है, जहां विदेशों के अंतर्राष्ट्रीय संपर्क अधिकारी लंबी अवधि के लिए गुरुग्राम में पदस्थ रहते हैं। 22 दिसंबर 2018 को तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्र का उद्घाटन किया था।
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कैप्टन रोहित बाजपेयी ने बताया कि वास्तव में पिछले पांच वर्षों में यह एक दिलचस्प यात्रा रही है। हमारा जो कुछ भी हासिल करने का लक्ष्य था, वह पहले ही हासिल हो चुका है। हम हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढ़ाना चाहते हैं। सूत्रों की मानें तो विभिन्न एजेंसियों और मंत्रालयों के हितधारकों के साथ आईएमएसी को एक राष्ट्रीय समुद्री डोमेन जागरूकता केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
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भारतीय नौसेना के ध्वज को आईओएनएस ध्वज के रूप में चुना
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन में 27 सदस्य और पर्यवेक्षक देशों की नौसेनाओं के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। भारत की ओर नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने तीन सदस्यीय नौसैनिक प्रतिनिधिमंडल के साथ कार्यक्रम में शिरकत की थी। इस वर्ष थाईलैंड ने आईओएनएस सम्मेलन की अध्यक्ष की। सम्मेलन में अगले दो वर्षों के लिए कार्य योजना को अंतिम रूप दिया गया। सम्मेलन में सबसे पहले भारत द्वारा डिजाइन किए गए ध्वज को आईओएनएस ध्वज के रूप में चुना गया। भारत ने आगामी चक्र के लिए सह-अध्यक्ष के रूप में भी पदभार संभाला। सम्मेलन में कोरिया गणराज्य की नौसेना का भी स्वागत किया गया।
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समुद्री खतरे अभी भी बरकरार हैं लेकिन हमें उनकी सूक्ष्म समझ है
आईएफसी-आईओआर केंद्र के निदेशक ने शुक्रवार को कहा कि समुद्री डकैती, तस्करी, सशस्त्र डकैती और अवैध मछली पकड़ने जैसे अन्य समुद्री खतरे अब भी बरकरार है। हालांकि, आईएफसी-आईओआर की स्थापना से अधिकारियों को इन चुनौतियों से निपटने में मदद जरूर मिली है। बता दें, आईएफसी-आईओआर एक अनूठा केंद्र है, जहां विदेशों के अंतर्राष्ट्रीय संपर्क अधिकारी लंबी अवधि के लिए गुरुग्राम में पदस्थ रहते हैं। 22 दिसंबर 2018 को तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्र का उद्घाटन किया था।
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कैप्टन रोहित बाजपेयी ने बताया कि वास्तव में पिछले पांच वर्षों में यह एक दिलचस्प यात्रा रही है। हमारा जो कुछ भी हासिल करने का लक्ष्य था, वह पहले ही हासिल हो चुका है। हम हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढ़ाना चाहते हैं। सूत्रों की मानें तो विभिन्न एजेंसियों और मंत्रालयों के हितधारकों के साथ आईएमएसी को एक राष्ट्रीय समुद्री डोमेन जागरूकता केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।