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Taiwan Issue: चीन की निरंकुशता पर बोले ताइवानी राजदूत- भारत-ताइवान के साथ आने की जरूरत, रणनीतिक साझेदारी जरूरी
Sun, 02 Oct 2022 07:19 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 02 Oct 2022 07:19 PM IST
सार
ताइवानी राजदूत ने कहा कि भारत और ताइवान दोनों को निरंकुशता से खतरा है, इसलिए दोनों के बीच घनिष्ठ सहयोग जरूरी है। गेर ने कहा, "मुझे लगता है कि अब वक्त आ गया है कि हम रणनीतिक साझेदारी करें।'
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ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाके में चीन आक्रामकता की ओर इशारा करते हुए ताइवान के अनौपचारिक राजदूत बौशुआन गेर ने कहा कि 'निरंकुशता (ऑटोक्रेसी) के विस्तार को रोकने' के लिए भारत और ताइवान हाथ मिलाने की जरूरत है और इससे दोनों देशों को खतरा है।
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ताइवानी राजदूत ने एक इंटरव्यू में इलाके में तनाव बढ़ने के लिए पूर्वी व दक्षिणी चीन सागर, हांगकांग और गलवान घाटी में चीन के कदमों का हवाला देते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि दोनों देश एक-दूसरे का रणनीतिक सहयोग करें।
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बता दें कि अमेरिकी संसद की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने अगस्त में ताइवान की हाई-प्रोफाइल यात्रा की थी। इसके बाद चीन ने इस स्वशासित द्वीप के खिलाफ आक्रामक सैन्य कार्रवाई की थी। इससे वैश्विक चिंता पैदा हो गई है। दरअसल चीन, ताइवान पर अपना दावा करता है और इसे अलग देश नहीं मानता है। उनसे पेलोसी की ताइवान यात्रा पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।
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राजदूत गेर ने कहा कि ताइवान, पेलोसी की यात्रा के जवाब में चीन की सैन्य आक्रामकता के मद्देनजर ताइवान की खाड़ी (ताइवान स्ट्रेट) में न्याय, शांति और स्थिरता के पक्ष में खड़े रहने के लिए भारत की सराहना करता है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत और ताइवान दोनों को निरंकुशता से खतरा है, इसलिए दोनों के बीच घनिष्ठ सहयोग जरूरी है। गेर ने कहा, "मुझे लगता है कि अब वक्त आ गया है कि हम रणनीतिक साझेदारी करें। व्यापार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने के साथ ही इसकी शुरुआत की जा सकती है।"
उन्होंने कहा कि चीनी सेना ताइवान और जापान के समुद्री व वायु क्षेत्र के आसपास अपनी आक्रामकता बढ़ा रही है जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति व सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि हम इसकी सराहना करते हैं भारत, ताइवान स्ट्रेट में शांति, न्याय और स्थिरता के लिए खड़ा है। उन्होंने कहा कि हम बीते वर्षों के जमीनी स्तर के तथ्यों पर गौर करें तो गलवान घाटी, पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर व हांगकांग में आपने देखा होगा कि असल में कौन उकसा रहा है। ताइवान में जो कुछ भी हो रहा है, वह महज अपनी रक्षा कर रहा है।