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अमेरिका की आपत्तियों के बावजूद रूस के साथ एक और मिसाइल सौदा, 1500 करोड़ रुपये का करार

Mon, 29 Jul 2019 08:05 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Mon, 29 Jul 2019 08:05 PM IST
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India signed a 1500 crore rupees deal with Russia for air to air R-27 missile for Su-30 fighter jets
आर-27 मिसाइल छोड़ता जर्मन वायुसेना का मिग-29 विमान (फाइल फोटो) - फोटो : विकीपीडिया

भारत के रूस के साथ एस-400 मिसाइल सौदे पर अमेरिका ने खूब आपत्ति जताई थी, लेकिन भारत ने अमेरिका की आपत्तियों पर कोई ध्यान न देते हुए रूस के साथ एक और मिसाइल सौदा किया है। भारत ने हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल आर-27 की खरीद के लिए 1500 करोड़ रुपये का करार किया है। इन मिसाइलों को सुखोई 30 लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल किया जाएगा। 

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सरकारी सूत्रों ने बताया, 'रूस के साथ हवा से हवा में मार करने वाली आर-27 मिसाइलों की खरीद का करार किया गया है, इन मिसाइलों को भारतीय वायुसेना के सुखोई 30 विमानों में इस्तेमाल किया जाएगा।' सूत्रों ने कहा कि लंबी मारक क्षमता की ये मिसाइल सुखोई विमानों को दुश्मन विमानों पर दूर से निशाना लगाने की क्षमता प्रदान करेगा। आर-27 मिसाइल मध्यम से लंबी मारक क्षमता की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। रूस इस मिसाइल को अपने मिग और सुखोई लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल करता है। 
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बता दें कि, हाल ही में कारगिल विजय दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हम राष्ट्र की सुरक्षा के मसले पर किसी तरह के अभाव, प्रभाव और दबाव की स्थिति में आने वाले नहीं हैं। यह करार सरकार ने 10-आई प्रोजेक्ट के तहत लिया है। इस प्रोजेक्ट में तय किया गया है कि एक विशिष्ट न्यूनतम अवधि के लिए तीनों सेनाओं के पास जरूरी हथियार व्यवस्था और अतिरिक्त साजोसामान उपलब्ध रहे।

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वायुसेना ने 50 दिन में किए 7600 करोड़ रुपये से ज्यादा के करार

रक्षा मंत्रालय द्वारा अनुमोदित आपातकालीन आवश्यकताओं के तहत को हासिल हथियार खरीदने के लिए वायुसेना मे पिछले 50 दिनों में 7600 करोड़ रुपये से ज्यादा के करार किए हैं। बता दें कि पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार ने आपातकालीन प्रावधानों के तहत तीनों सेना प्रमुखों को यह ताकत दी थी कि वे तीन महीने में आपूर्ति की शर्त के साथ 300 करोड़ रुपये तक का करार कर सकते हैं।

अमेरिका शुरू से ही कर रहा है रूस के साथ रक्षा सौदे का विरोध

रूस के साथ रक्षा उत्पादों के करार का अमेरिका शुरू से ही विरोध करता रहा है। रूस के साथ एस-400 मिसाइल सौदा करने पर अमेरिका ने भारत को चेतावनी भी दी थी कि ऐसा करने पर उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका यह भी कह चुका है कि वह भारत की सभी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है लेकिन, रूसी एस-400 मिसाइल सौदा इसमें बाधा बन रहा है। 

भारत और अमेरिका, दोनों एक दूसरे का रणनीतिक साझेदार होने का दावा करते हैं, लेकिन पिछले दो दशकों से दोनों देशों के विवाद कई गुना बढ़ गए हैं, जिसमें रूस से 40 हजार करोड़ रुपये का एस-400 मिसाइल प्रणाली खरीदने और ईरान से तेल खरीदने का मामला शामिल है। 

रूस की एंटी टैंक मिसाइल 'स्ट्रम अटाका' भी खरीद रहा भारत

अपने पड़ोसी मुल्कों पाकिस्तान और चीन से बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत रूस से एंटी टैंक मिसाइल ‘स्ट्रम अटाका’ का सौदा भी कर चुका है। इसके लिए दोनों देशों के बीच 200 करोड़ रुपये में करार हुआ है। इन मिसाइलों को एमआई-35 हेलीकॉप्टरों में लगाया जाएगा। इसके बाद ये हेलीकॉप्टर दुश्मनों के टैंकों और अन्य हथियारबंद वाहनों को पलक झपटते नष्ट कर सकेंगे। 

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