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Indus Water Treaty: 'किशनगंगा और रातले विवाद की कार्यवाही रोकी जाए', भारत की विश्व बैंक से अपील

Tue, 24 Jun 2025 02:06 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 24 Jun 2025 02:06 PM IST
सार

22 अप्रैल को पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार की सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक में 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से रोकने का फैसला लिया गया था। कश्मीर में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ इसे सबसे बड़ी कार्रवाई बताया गया था।

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India seeks pause in Kishanganga, Ratle dispute proceedings Amid Indus Water Treaty Suspension
सिंधु जल संधि - फोटो : संवाद

विस्तार

भारत ने किशनगंगा और रातले जलविद्युत परियोजनाओं पर विवाद से संबंधित कार्यवाही में औपचारिक रूप से विराम लगाने की अपील की है। दरअसल, भारत ने सिंधु जल संधि के तहत अपनी पश्चिमी नदी प्रणालियों पर नियंत्रण करने की तैयारी कर ली है। सरकार ने विश्व बैंक की ओर से नियुक्त तटस्थ विशेषज्ञ मिशेल लिनो को एक पत्र लिखा है और कार्यवाही पर विराम लगाने को कहा है। भारत ने अगस्त तक पाकिस्तान की ओर से लिखित आश्वासनों को वाले सहमत कार्य कार्यक्रम को निलंबित करने की मांग की है। इसके साथ ही भारत ने नवंबर के लिए निर्धारित संयुक्त चर्चाओं को भी रद्द करने की बात कही है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था।

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कब और किसके बीच हुई थी संधि
  • भारत और पाकिस्तान के बीच में सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर 1960 को कराची में हस्ताक्षर हुए थे। समझौता सिंधु नदी और इसकी सहायक नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर हुआ था। 
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  • विश्व बैंक की तरफ से पहल के बाद समझौते करने के लिए भारत-पाकिस्तान के बीच अलग-अलग स्तर पर 9 साल तक बात चली थी। भारत की तरफ से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान की तरफ से राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान ने संधि पर हस्ताक्षर किए थे।
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क्या है सिंधु जल समझौता 
सिंधु जल समझौता, 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक जल-बंटवारा समझौता था। इसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी। इस समझौते का उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच विवादों को रोकना था। इस संधि के तहत, हिमालय के सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों को दो भागों में बांटा गया था। पूर्वी नदियों ब्यास, रावी और सतलुज का पानी भारत को मिलता था, जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का कंट्रोल पाकिस्तान के पास आया था।


अब भारत सिंधु नदी पर बांध बनाकर पानी रोकने के लिए स्वतंत्र
भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित करने का जो फैसला किया था, उससे पाकिस्तान की आर्थिक कमर टूट गई है। दरअसल, समझौता स्थगित होने का यह अर्थ नहीं है कि पाकिस्तान को तत्काल सिंधु नदी का पानी नहीं मिल रहा है, बल्कि इसके तहत भारत पर से अब यह बाध्यता खत्म हो जाएगी कि वह पाकिस्तान को सिंधु के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे। भारत भविष्य में सिंधु नदी पर बांध बनाकर पानी रोकने के लिए स्वतंत्र होगा। ऐसा हुआ तो पाकिस्तान के लिए सही मायनों में संकट पैदा होगा।

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