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अमेरिका के विरोध के बाद भारत ने साफ कहा- रूस से एस-400 की खरीद से पीछे नहीं हटेंगे
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Wed, 06 Jun 2018 03:39 AM IST
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भारत ने अमेरिका को साफ कर दिया है कि वह रूस के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग जारी रखेगा। वह रूस से एस-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली की खरीद से पीछे नहीं हटेगा। अमेरिका ने रूस से हथियारों की खरीद पर प्रतिबंध लगा रखा है।
सूत्रों के अनुसार, भारत इस सौदे को अमेरिकी कानून सीएएटीएसए से अलग रखने के पक्ष में है। वह इस मुद्दे पर बातचीत के लिए भी तैयार है। भारत-अमेरिका के बीच अगले महीने वाशिंगटन में 2+2 की बैठक होनी है, जिसमें इस मुद्दे को उठाया जा सकता है।
इससे पहले, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मीडिया से कहा, अमेरिका के साथ हर मुलाकात के दौरान हमने उन्हें बताया है कि भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से चला आ रहा है। यह अटूट संबंध है। अमेरिका का सीएएटीएसए भारत और रूस के बीच होने वाले रक्षा सहयोग पर कोई असर नहीं डाल सकता।
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उन्होंने कहा, कई नाजुक मौकों पर भारत और रूस ने एक दूसरे का साथ दिया है। लिहाजा किसी भी देश के साथ कूटनीतिक और सामरिक संबंध रूस की कीमत पर नहीं बनाया जा सकता। रूस के साथ एस-400 सौदे पर आगे बढ़ने के सवाल पर रक्षा मंत्री ने कहा कि इस दिशा में लंबे समय से बातचीत हो रही है। अब यह निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है।
जनवरी में अमेरिका ने काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सिरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) के तहत मास्को पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगा दिया था। यह कानून डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को रूसी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार देता है।
40,000 करोड़ का है सौदा
एस-400 ट्रायंफ सौदा करीब 40,000 करोड़ रुपये का है। भारत अपने मिसाइल कवच को धार देने के लिए रूस से यह प्रणाली खरीदना चाहता है। इसे चीन के साथ लगी 4000 किलोमीटर लंबी सीमा पर तैनात किया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रूस और भारत अक्तूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ होने वाली बैठक से पहले इस सौदे की घोषणा कर सकते हैं। बताया जाता है कि पिछले महीने रूस के सोची में मोदी और पुतिन के बीच हुई अनौपचारिक वार्ता में भी इस सौदे पर चर्चा हुई है।
इस सौदे को लेकर भारत में भी चिंताएं बढ़ रही है। कुछ जानकारों का मानना है कि भारत अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद इस सौदे पर आगे बढ़ता है तो अमेरिका दंडात्मक कार्रवाई के तौर पर करोड़ों डॉलर की सैन्य खरीद को प्रभावित कर सकता है। अमेरिकी सांसद और विशेषज्ञ भी भारत को इस बात के लिए चेता चुके हैं कि अगर उन्होंने प्रतिबंध के बावजूद रूस से खरीददारी की तो यह भारत और अमेरिकी रिश्तों के लिए घातक होगा।
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सूत्रों के अनुसार, भारत इस सौदे को अमेरिकी कानून सीएएटीएसए से अलग रखने के पक्ष में है। वह इस मुद्दे पर बातचीत के लिए भी तैयार है। भारत-अमेरिका के बीच अगले महीने वाशिंगटन में 2+2 की बैठक होनी है, जिसमें इस मुद्दे को उठाया जा सकता है।
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इससे पहले, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मीडिया से कहा, अमेरिका के साथ हर मुलाकात के दौरान हमने उन्हें बताया है कि भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से चला आ रहा है। यह अटूट संबंध है। अमेरिका का सीएएटीएसए भारत और रूस के बीच होने वाले रक्षा सहयोग पर कोई असर नहीं डाल सकता।
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उन्होंने कहा, कई नाजुक मौकों पर भारत और रूस ने एक दूसरे का साथ दिया है। लिहाजा किसी भी देश के साथ कूटनीतिक और सामरिक संबंध रूस की कीमत पर नहीं बनाया जा सकता। रूस के साथ एस-400 सौदे पर आगे बढ़ने के सवाल पर रक्षा मंत्री ने कहा कि इस दिशा में लंबे समय से बातचीत हो रही है। अब यह निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है।
जनवरी में अमेरिका ने काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सिरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) के तहत मास्को पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगा दिया था। यह कानून डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को रूसी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार देता है।
40,000 करोड़ का है सौदा
एस-400 ट्रायंफ सौदा करीब 40,000 करोड़ रुपये का है। भारत अपने मिसाइल कवच को धार देने के लिए रूस से यह प्रणाली खरीदना चाहता है। इसे चीन के साथ लगी 4000 किलोमीटर लंबी सीमा पर तैनात किया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रूस और भारत अक्तूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ होने वाली बैठक से पहले इस सौदे की घोषणा कर सकते हैं। बताया जाता है कि पिछले महीने रूस के सोची में मोदी और पुतिन के बीच हुई अनौपचारिक वार्ता में भी इस सौदे पर चर्चा हुई है।
इस सौदे को लेकर भारत में भी चिंताएं बढ़ रही है। कुछ जानकारों का मानना है कि भारत अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद इस सौदे पर आगे बढ़ता है तो अमेरिका दंडात्मक कार्रवाई के तौर पर करोड़ों डॉलर की सैन्य खरीद को प्रभावित कर सकता है। अमेरिकी सांसद और विशेषज्ञ भी भारत को इस बात के लिए चेता चुके हैं कि अगर उन्होंने प्रतिबंध के बावजूद रूस से खरीददारी की तो यह भारत और अमेरिकी रिश्तों के लिए घातक होगा।