{"_id":"627a876c7815fa6659357a72","slug":"india-says-in-conference-of-parties-15th-session-developed-nations-should-take-lead-in-reducing-carbon-emissions-drastically","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीओपी-15: भारत ने की अपील, कहा- ग्लोबल वार्मिंग में कमी लाने में अग्रणी भूमिका निभाएं विकसित देश","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सीओपी-15: भारत ने की अपील, कहा- ग्लोबल वार्मिंग में कमी लाने में अग्रणी भूमिका निभाएं विकसित देश
Tue, 10 May 2022 09:10 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 10 May 2022 09:10 PM IST
सार
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि विकसित देशों द्वारा ग्लोबल वार्मिंग के उत्सर्जन में भारी कमी लाने का नेतृत्व किए बिना लोगों और पृथ्वी दोनों की रक्षा करना संभव नहीं होगा, क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग के लिए उनकी जिम्मेदारी इतिहास और वर्तमान दोनों में सबसे अधिक है।
विज्ञापन
भाजपा नेता भूपेंद्र यादव
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि विकसित देशों को कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी लाने का बीड़ा उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित देशों ने ऐतिहासिक रूप से और यहां तक कि वर्तमान में भी ग्लोबल वार्मिंग में सबसे अधिक योगदान दिया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड कार्यक्रम के माध्यम से अपनी मिट्टी के स्वास्थ्य की निगरानी को बढ़ाया है।
विज्ञापन
इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि कोविड महामारी के कारण ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने की चुनौती को और भी ज्यादा बढ़ गई है। ये बातें उन्होंने आइवरी कोस्ट के आबिदजान में संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन टू कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन के 15वें सत्र में पार्टियों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहीं।
विज्ञापन
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि हमें पृथ्वी और प्रकृति की देखभाल करनी चाहिए जो ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ लड़ाई में हमारी मदद कर सकती है।उन्होंने यह भी कहा कि पृथ्वी और प्रकृति की गिरती स्थिति के बावजूद दुनिया उपभोक्तावाद से प्रेरित जीवन शैली के साथ आगे बढ़ रही है।
विज्ञापन
उन्होंने यह भी कहा कि यह जरूरी है कि हम सामूहिक रूप से उपभोग-उन्मुख दृष्टिकोण से दूर हो जाएं। 'यूज एंड थ्रो' की मानसिकता पृथ्वी के लिए हानिकारक है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों द्वारा ग्लोबल वार्मिंग के उत्सर्जन में भारी कमी लाने का नेतृत्व किए बिना लोगों और पृथ्वी दोनों की रक्षा करना संभव नहीं होगा, क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग के लिए उनकी जिम्मेदारी इतिहास और वर्तमान दोनों में सबसे अधिक है।
उन्होंने अपने सत्र में बोलते हुए कहा कि 2019 से सीओपी की भारत की अध्यक्षता और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के दौरान देश ने 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर बेकार भूमि को स्वच्छ और उपजाऊ करने की अपनी प्रतिबद्धता में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
उन्होंने कहा कि 2015 और 2019 के बीच किसानों को 229 मिलियन से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए हैं। इस कार्यक्रम ने रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में 8 से 10 प्रतिशत की कमी की है और उत्पादकता में 5 से 6 प्रतिशत की वृद्धि की है।
9 से 20 मई तक होने वाले संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन टू कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन के पार्टियों के सम्मेलन (COP15) के पंद्रहवें सत्र में सरकारों, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज और दुनिया भर के अन्य प्रमुख हितधारकों के नेताओं को भविष्य में भूमि के स्थायी प्रबंधन में प्रगति के लिए एक साथ लाया जाएगा।