एलएसी विवाद: भारत ने कहा- उम्मीद है चीन पूर्वी लद्दाख में शेष मुद्दों को जल्द हल करने की दिशा में काम करेगा
भारत ने पूर्वी लद्दाख गतिरोध के मुद्दे पर उम्मीद जताई कि चीन द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करते हुए इस क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शेष मुद्दों को जल्दी हल करने की दिशा में काम करेगा, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति का मार्ग सुगम होगा।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा कि चीन को पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर 17 महीने से जारी संघर्ष को खत्म करने और शेष बचे मुद्दों का हल शीर्घ निकाले में सहयोग करना चाहिए।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, 13वें दौर की सैन्य वार्ता में भारत ने जो सुझाव दिए हैं उनका पालन कर इस विवाद का समाधान हो सकता है और सीमा पर शांति बहाल हो सकती है। चीन से उम्मीद है कि वह इसमें सहयोग करे और बैठक में बनी सहमति के आधार पर तेजी से काम करे।
दोनाें देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच रविवार को करीब साढ़े आठ घंटे चली बातचीत के ठीक एक दिन बाद भारतीय सेना ने बताया था कि हमने जो रचनात्मक सुझाव दिए थे चीन ने न तो उनसे सहमति दिखाई और न ही इस पर आगे का कोई प्रस्ताव ही दिया। बैठक बाकी बचे मुद्दों का समाधान निकालने में बेनतीजा रही। बागची ने कहा, दोनों देश हालांकि एलएसी पर शांति बहाल करने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। यह एक सकारात्मक पहलू है।
उन्होंने कहा कि 'यह हाल ही में दुशांबे में एक बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर की अपने चीनी समकक्ष से चर्चा के आधार पर बने मार्गदर्शन के अनुरूप होगा, जहां वे इस बात पर सहमत हुए थे कि दोनों पक्षों को शेष मुद्दों को जल्द से जल्द हल करने चाहिए। हम उम्मीद करते हैं कि चीन द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करते हुए इस क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शेष मुद्दों को जल्दी हल करने की दिशा में काम करेगा। इससे सीमा पर अमन एवं शांति बहाली और द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति का मार्ग सुगम होगा।'
गौरतलब है कि पिछले साल पांच मई को पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच हिंसक झडप के बाद सीमा गतिरोध शुरू हो गया था। इसके बाद दोनों ओर से सीमा पर सैनिकों एवं भारी हथियारों की तैनाती की गई थी। गतिरोध को दूर करने को लेकर दोनों देशों के बीच राजनयिक एवं सैन्य स्तर पर कई बार बातचीत भी हो चुकी हैं। दोनों पक्षों की ओर से अभी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं।
वहीं, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू की हाल की अरुणाचल प्रदेश यात्रा पर चीन की आपत्ति के बारे में एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दोहराया कि 'हम ऐसे बयानों को खारिज करते हैं, अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट और अविभाज्य हिस्सा है।’
बागची ने कहा, ‘भारतीय नेता नियमित रूप से अरुणाचल प्रदेश की यात्रा करते हैं जिस प्रकार वे भारत के अन्य राज्यों में जाते हैं।’ उन्होंने कहा कि भारत के एक राज्य की भारतीय नेताओं द्वारा यात्रा पर आपत्ति करने का कोई कारण भारतीयों को समझ नहीं आ रहा। नायडू ने नौ अक्तूबर को अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया था और राज्य विधानसभा के एक विशेष सत्र को संबोधित किया था।
सीमा विवाद वार्ता से हल करेंगे भूटान-चीन
चीन और भूटान ने सीमा से जुड़े मामलों को बातचीत के जरिये निपटाने के लिए त्रिस्तरीय तरीका अपनाने के समझौते पर दस्तखत किए हैं। दोनों पड़ोसी देशों के बीच यह समझौता चीन के भारत के साथ चल रहे सीमा विवाद के बीच हुआ है। इस समझौते के तहत दोनों सीमा विवाद के हल के लिए संवाद प्रक्रिया की शुरुआत करेंगे।
भारत की इसलिए भी इस समझौते पर नजर है क्योंकि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भूटान के दोकलम इलाके पर 2017 में चीन ने कब्जे की कोशिश की थी। यह इलाका उत्तर-पूर्वी राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाले चिकेन नेक गलियारे से सटा हुआ है।
भूटान के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि विदेश मंत्री लिओन्पो टांडी दोरजी ने चीन के सहायक विदेश मंत्री वू जियांगहाओ के साथ सीमा से जुड़ी असहमतियों को दूर करने के लिए तीन स्तरों वाली वार्ता प्रक्रिया पर दस्तखत किए हैं। ये हस्ताक्षर गुरुवार को आयोजित दोनों देशों की ज्वाइंट वर्चुअल सेरेमनी में किए गए। सीमा मसले पर दोनों देशों के बीच बातचीत 1984 में शुरू हुई थी, जो 24 चक्र चली थी लेकिन उसमें कई मसले सुलझ नहीं पाए थे।