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इस महीने रूस से एस-400 हवाई रक्षा प्रणाली खरीद सकता है भारत, पाक-चीन की बढ़ेंगी मुश्किलें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 01 Apr 2018 03:20 AM IST
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एस-400 मिसाइल
संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा है कि भारत ने एक नए अधिनियमित अमेरिकी कानून के साथ चर्चा की है। जिसमें भारत रूस से S-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली खरीदेगा। अमेरिकी राज्य विभाग ने सीधे तौर पर नहीं कहा था कि भारत रूस से यह हथियार खरीदेगा।
बता दें कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर होने वाले 7वें मास्को सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अगले सप्ताह रूस की यात्रा पर जाएंगी। इस यात्रा पर उनका ध्यान एस-400 मिसाइल सौदे पर होगा। चीन से जुड़ी करीब 4 हजार किमी लंबी सीमा पर अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए यह सौदा बहुत जरुरी माना जा रहा है। बता दें कि भारत से पहले चीन ने रूस से इस मिसाइस सौदे के लिए बात की थी। लेकिन किसी कारण यह डील नहीं हो पाई।
भारत की यह बातचीत करीब दो साल से चल रही है। एंटी एयरक्राफ्ट सिस्टम में एक साथ चार मिलाइलों का इस्तेमाल होता है। सीतारमण 3-5 अप्रैल के बीच रूस में ही रहेंगी। इस दौरन उनकी पूरी कोशिश होगी कि रूस से करीब 40 हजार करोड़ रुपए के एस-400 मिसाइल सौदे पर बात बन जाए। एस-400 एस-300 का अपडेट वर्जन है। यह एस-300 से काफी बेहतर है। इसे काफी लंबी रेंज की मिसाइल माना जाता है।
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इस मिसाइल की एक खास बात यह भी है कि ये पाकिस्तान की शॉर्ट रेंज न्यूक्लियर मिसाइल 'नासर' को भी पस्त करने की क्षमता रखती है। पाकिस्तान अक्सर इस न्यूक्लियर मिसाइल से हमले की धमकियां देता रहा है, लेकिन भारत के पास जल्द ही इसका जवाब देने का साधन होगा।
बता दें कि लंबी दूरी की रडार के साथ एक साथ 100 से 300 लक्ष्य को ट्रैक करने की क्षमता रखने वाला एस-400 कई तरह के सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों के हवाई खतरे को रोक सकता है। दरअसल, ये रूस के साथ हथियारों को लेकर होने वाली बड़े समझौते में से एक समझौता है।
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बता दें कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर होने वाले 7वें मास्को सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अगले सप्ताह रूस की यात्रा पर जाएंगी। इस यात्रा पर उनका ध्यान एस-400 मिसाइल सौदे पर होगा। चीन से जुड़ी करीब 4 हजार किमी लंबी सीमा पर अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए यह सौदा बहुत जरुरी माना जा रहा है। बता दें कि भारत से पहले चीन ने रूस से इस मिसाइस सौदे के लिए बात की थी। लेकिन किसी कारण यह डील नहीं हो पाई।
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भारत की यह बातचीत करीब दो साल से चल रही है। एंटी एयरक्राफ्ट सिस्टम में एक साथ चार मिलाइलों का इस्तेमाल होता है। सीतारमण 3-5 अप्रैल के बीच रूस में ही रहेंगी। इस दौरन उनकी पूरी कोशिश होगी कि रूस से करीब 40 हजार करोड़ रुपए के एस-400 मिसाइल सौदे पर बात बन जाए। एस-400 एस-300 का अपडेट वर्जन है। यह एस-300 से काफी बेहतर है। इसे काफी लंबी रेंज की मिसाइल माना जाता है।
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इस मिसाइल की एक खास बात यह भी है कि ये पाकिस्तान की शॉर्ट रेंज न्यूक्लियर मिसाइल 'नासर' को भी पस्त करने की क्षमता रखती है। पाकिस्तान अक्सर इस न्यूक्लियर मिसाइल से हमले की धमकियां देता रहा है, लेकिन भारत के पास जल्द ही इसका जवाब देने का साधन होगा।
बता दें कि लंबी दूरी की रडार के साथ एक साथ 100 से 300 लक्ष्य को ट्रैक करने की क्षमता रखने वाला एस-400 कई तरह के सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों के हवाई खतरे को रोक सकता है। दरअसल, ये रूस के साथ हथियारों को लेकर होने वाली बड़े समझौते में से एक समझौता है।