फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   India's Forgotten Chinese Internment Camp

भारत-चीन विवाद पर क्या कह रहे हैं भारत में रहने वाले चीनी लोग

Sat, 15 Jul 2017 07:01 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Sat, 15 Jul 2017 07:01 PM IST
विज्ञापन
India's Forgotten Chinese Internment Camp
शिलॉन्ग में चीनी मूल के लोग

विज्ञापन
"हम पूरी तरह भारतीय नागरिक है और भारत ही हमारा घर है। इसलिए भारत में असुरक्षित होने का कोई सवाल ही नहीं उठता। मैं कई बार अपने रिश्तेदारों से मिलने चीन गया हूं लेकिन भारत में जितनी आज़ादी से हमारा परिवार रहता है वह बात चीन में नहीं है। चीन भी हमें वहां जाने पर एक भारतीय नागरिक के तौर पर ही देखता है"। ये कहना है 61 साल के पॉल लियॉन्ग का जो हैं चीनी मूल के लेकिन रहते हैं मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में।

पॉल के पूर्वज दक्षिण चीन के कोंगटूंग प्रांत से करीब डेढ़ सौ साल पहले कोलकाता होते हुए सिलहट (अविभाजित भारत का हिस्सा) के रास्ते मेघालय में व्यापार करने आए थे और फिर वे यहीं बस गए। लियॉन्ग चीन की हन जनजाति से हैं।
विज्ञापन


'गर्व है भारतीय होने में'
पॉल ऐसे अकेले व्यक्ति नहीं है. शिलॉन्ग में कई चीनी मूल के लोग हैं जिनके पूर्वज कई साल पहले आकर यहां बस गए हैं और अब पूरी तरह से भारत के रंग में रंग गए हैं. इन्हें भारतीय होने पर गर्व है। सिक्किम सीमा के पास भूटान के डोकलाम क्षेत्र को लेकर भारत और चीन के बीच पनपे ताज़ा विवाद पर इन लोगों का साफ़ कहना है कि ये एक और युद्ध नहीं चाहते और इस पूरे प्रकरण में इनकी भावनाएं भारत से जुड़ी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


चीन ने हाल ही में भारत में रह रहे अपने चीनी नागरिकों को भी अलर्ट किया हैं। पॉल के छोटे भाई जॉर्ज लियॉन्ग ने बीबीसी से कहा कि, "चीन ने हम लोगों के लिए आज तक कुछ नहीं किया है. बीजिंग से जो अलर्ट रहने की बातें कही जा रही है उससे हमें कोई मतलब नहीं हैं. हमें सिर्फ़ हिंदुस्तान से मतलब है"। 1962 में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध के दौरान यहां रह रहे चीनी परिवारों को गिरफ़्तार कर जेल में डाल दिया गया था। युद्ध के बाद उनमें से कई लोग रिहा होने के बाद यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में जाकर बस गए जबकि कई यहीं रुक गए।
Trending Videos

India's Forgotten Chinese Internment Camp
थॉमस वांग
पॉल के छोटे भाई जॉर्ज लियॉन्ग बताते हैं। "62 के युद्ध के वक़्त मैं सिर्फ़ एक साल का था। युद्ध के आख़िरी दिन कुछ पुलिस वाले आए और हमारे पूरे परिवार को पकड़ कर ले गए। पहले हमें शिलॉन्ग की जेल में रखा गया फिर गुवाहाटी से एक ट्रेन में बैठाकर दिल्ली ले गए"।

पॉल और जॉर्ज के पिता टॉन सियोंग ने अपने परिवार को ये पूरा वाक़या बताया। पॉल और जॉर्ज लियॉन्ग के मुताबिक़ उनके परिवार को 62 के युद्ध के दौरान भारत में ख़ासी परेशानियां झेलनी पड़ीं लेकिन अब उन्हें भारत में रहना और यहां का जीवन बहुत पसंद है। 29 साल की लियॉन्ग लिएन भी चीनी मूल की हैं। और शिलॉन्ग में रहती हैं। लिएन के मंगेतर चीन की एक कंपनी में नौकरी करते हैं।

वो कहती हैं "'मेरा मंगेतर भी चीनी मूल का भारतीय नागरिक है और मैं उससे मिलने अकसर चीन जाती हूं। लेकिन मैं चीन में ज़्यादा समय नहीं रह सकती। वहां की भाषा और संस्कृति हमसे बिलकुल अलग है। वहां लोगों से संवाद करने में काफी दिक़्कतें आती हैं। लेकिन भारत हमारा घर है। इसलिए मेरा मन भारत में ही लगता हैं। मेरे सारे दोस्त यहां हैं। मैं जन्म से भारतीय हूं और मुझे भारतीय होने पर गर्व है"।

भारत-चीन के बीच मौजूदा तनाव पर वो कहती हैं। कि यह दोनों मुल्कों के बीच एक राजनीतिक मसला है। लेकिन हम तो भारतीय हैं। और जो भारत सरकार ने हमारे लिए नियम क़ायदे बनाए हुए हैं। हमें उसी के अनुसार चलना है। लिएन की मां जेनी लियॉन्ग कहती हैं  "जन्म से मैं भारतीय हूं लेकिन आज भी अपने घर पर चीनी परंपरा को मानती हूं। चीनी परंपरा के अनुसार पूर्वजों की पूजा करने से लेकर हर साल चीनी नव वर्ष ड्रैगन डांस जैसे उत्सव भी मनाती हूं"।

जेनी आगे कहती हैं कि एक भारतीय होने के नाते आने वाले समय में वह हर परिस्थिति में भारत के साथ ही खड़ी रहेंगी।

India's Forgotten Chinese Internment Camp
जॉर्ज लियॉन्ग अपने परिवार के साथ
शिलॉन्ग के बड़ा बाज़ार में जूते की दुकान चलाने वाले 37 साल के थॉमस वांग का कहना है कि चीन के साथ युद्ध की कहानी उन्होंने अपने पिता से सुन रखी है। थॉमस के पिता और उनकी मां को जेल में रहना पड़ा था।

वो कहते हैं कि हम भारत के नागरिक है और हमें किसी बात का कोई डर नहीं हैं। ऐसी ही दास्तां 60 साल की वर्जीनिया वॉन्ग की है। वो 1962 के युद्ध में जेल जा चुकी है। मुश्किलों से भरे उन पुराने दिनों को वर्जीनिया अब याद नहीं करना चाहती।

वर्जीनिया की दो बेटियां जर्मनी में काम करती हैं और एकमात्र बेटा मणिपुर में वैज्ञानिक है। वो मज़बूती से कहती हैं कि हम पूरी तरह से भारतीय है और अब हमें कोई डर नहीं लगता। मेघालय में इस समय चीनी मूल के भारतीय नागरिकों के करीब 20 परिवार है। जो लोग शिलॉन्ग में रहते हैं उनमें से अधिकतर ने स्थानीय जनजाति की महिलाओं से शादी कर ईसाई धर्म अपना लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed