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फिच ने भारत की रेटिंग गिराई, कहा- नोटबंदी के कारण पड़ा प्रतिकूल प्रभाव
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 12 Jan 2017 08:57 AM IST
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फिच रेटिंग
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फिच रेटिंग ने साल 2016-17 वित्त वर्ष में भारत की रेटिंग 7.4 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी कर दी है। उनका कहना है कि 8 नवंबर की गई नोटबंदी के बाद अनिश्चितता के कारण इसमें कटौती की गई है।
बताते चलें कि फिच ने मंगलवार को अपनी द्विमासिक रेटिंग जारी की है। अपने न्यूजलेटर में फिट ने कहा, '8 नवंबर के बाद भारत की अर्थव्यवस्था में कमी आई है। इसे देखते हुए विकास दर का पूर्वानुमान घटाना पड़ा है।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, फिच ने कहा है कि इस कदम से कुछ लाभ की संभावना है, जो कि ज्यादा नकारात्मक है। स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है कि सरकार के वित्तीय और मध्यम अवधि विकास दर में कोई बदलाव ला सके। फिच ने कहा है कि नोटबंदी का असर जितने दिन रहेगा, उतने दिन अर्थव्यवस्था पर असर होगा।
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बताते चलें कि फिच ने मंगलवार को अपनी द्विमासिक रेटिंग जारी की है। अपने न्यूजलेटर में फिट ने कहा, '8 नवंबर के बाद भारत की अर्थव्यवस्था में कमी आई है। इसे देखते हुए विकास दर का पूर्वानुमान घटाना पड़ा है।
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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, फिच ने कहा है कि इस कदम से कुछ लाभ की संभावना है, जो कि ज्यादा नकारात्मक है। स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है कि सरकार के वित्तीय और मध्यम अवधि विकास दर में कोई बदलाव ला सके। फिच ने कहा है कि नोटबंदी का असर जितने दिन रहेगा, उतने दिन अर्थव्यवस्था पर असर होगा।
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नोटबंदी का पड़ा असर
नए नोट
फिच ने कहा कि नोटबंदी की पहल सकारात्मक थी और सुधार के प्रयासों को ध्यान में रखकर की गई थी। लेकिन, इससे अल्पकालिक नुकसान हुआ है। उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र पर बुरा प्रभाव पड़ा है। नकदी की कमी के कारण उपभोक्ताओं ने अपने खर्च में काफी कटौती की।
वित्तीय सेवा कंपनी ने एक बयान में कहा, “इस तिमाही की शुरुआत ज्यादातर कारोबार के लिए सकारात्मक ढंग से हुई थी। लेकिन, 8 नवंबर को की गई नोटबंदी के कारण वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में सभी किस्म के कारोबार पर पानी फिर गया।”
वित्तीय सेवा कंपनी ने एक बयान में कहा, “इस तिमाही की शुरुआत ज्यादातर कारोबार के लिए सकारात्मक ढंग से हुई थी। लेकिन, 8 नवंबर को की गई नोटबंदी के कारण वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में सभी किस्म के कारोबार पर पानी फिर गया।”