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COP26: भारत ने किया कृषि क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन को कम करने का वादा, लेकिन इस पर नीति बनाया जाना भी बाकी

Mon, 08 Nov 2021 08:36 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 08 Nov 2021 08:36 PM IST
सार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोपेनहेगन से लेकर पेरिस और अब ग्लासगो में हुई कॉप26 समिट के लिए भारत ने कृषि क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की नीति को ज्यादातर नजरअंदाज ही किया है।

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India pledges to cut farming emission to meet COP26 Goals but needs policy for management of Food Security and Farmers Livelihood
कृषि कानूनों के विरोध में अपनी फसल जोत रहे किसान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत उन 27 देशों में शामिल है, जिन्होंने कॉप26 जलवायु समिट में कृषि क्षेत्र से होने वाला उत्सर्जन कम करने का वादा किया है। पीएम मोदी ने अपने ग्लासगो दौरे पर भारत के संपूर्ण कार्बन उत्सर्जन कम करने के साथ यह एक और वादा किया था, जिसके लिए अलग से कृषि नीति की भी जरूरत होगी। हालांकि, भारत की तरफ से अभी तक कोई चर्चा भी शुरू नहीं हुई है। 
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोपेनहेगन से लेकर पेरिस और अब ग्लासगो में हुई कॉप26 समिट के लिए भारत ने कृषि क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की नीति को ज्यादातर नजरअंदाज ही किया है। हालांकि, कृषि नीतियों को देखने वाले एक उच्च अधिकारी ने कहा कि भारत इस ओर सही नीति बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। 
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उधर विश्लेषकों का कहना है कि यह करना काफी मुश्किल है, क्योंकि इससे किसानों के जीवनयापन के साथ खाद्य सुरक्षा पर भी असर पड़ता है। वैश्विक स्तर पर कृषि क्षेत्र इस वक्त कुल ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में एक-तिहाई हिस्से का जिम्मेदार है। भारत का कृषि क्षेत्र फिलहाल कुल ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में 14 फीसदी का हिस्सेदार है। उधर बिजली और उत्पादन क्षेत्र क्रमशः 44 फीसदी और 18 फीसदी उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं। 
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पर्यावरण मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, 2016 में चावल की खेती से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करीब 7.13 करोड़ टन रहा था। जानकारों का मानना है कि 2018-19 के बीच यह उत्सर्जन बढ़कर 7.23 करोड़ टन तक पहुंच गया होगा। 
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