IND vs PAK: पहले श्रेय लेने में जुटे फिर पीछे हटे, ऐसे नरम पड़े ट्रंप के सुर; भारत के सख्त रुख से बैकफुट पर आए
बीते कई दिनों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर का श्रेय लेने में जुटे थे। इसके बाद बीते दिन यानी 15 मई को उन्हें इससे पलटी मार दी। इसके बाद से ही भारत समेत दुनिया भर के कई देश उनकी विश्वसनीयता पर ही सवाल उठाने लगे हैं।
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार यह कहते आए कि उन्होंने ही भारत और पाकिस्तान को संघर्ष विराम के लिए मनाया। ऐसा उन्होंने एक बार नहीं, बल्कि बार-बार कहा। भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम जिम्मेदार लोगों ने प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों तरीकों से ट्रंप के हर दावे का खंडन किया। मामला तब शुरू हुआ, जब ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर का एलान करने वाला एक पोस्ट ट्रूथ सोशल पर किया। इसके बाद भारत के विदेश सचिव ने जब प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो उन्होंने साफ कहा कि समझौता भारत और पाकिस्तान की बातचीत से हुआ है, इसमें किसी तीसरे पक्ष का कोई हस्तक्षेप नहीं है।
सीजफायर के छह दिन बाद भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम का श्रेय लेने वाले ट्रंप के सुर थोड़े बदले नजर आए। पहले मध्यस्थता का दावा करने वाले ट्रंप ने दोहा में कहा कि वैसे तो मैं यह नहीं कहना चाहता कि मैंने ऐसा किया। पर मैंने पिछले हफ्ते भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव खत्म करने में निश्चित रूप से मदद की, जो लगातार बढ़ता जा रहा था। मुझे उम्मीद है कि अब समाधान हो चुका है। आखिर छह दिन बाद अचानक ट्रंप के सुर कैसे बदल गए? आइए जानते हैं...
कब हुई सीजफायर से जुड़ी ट्रंप की गलत बयानी की शुरुआत?
10 मई को भारत और पाकिस्तान के संघर्ष विराम का दावा सबसे पहले ट्रंप ने किया। उन्होंने शाम पांच बजकर 37 मिनट पर दोनों देशों के बीच सीजफायर का दावा किया। इसके बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री और भारत के विदेश सचिव ने इसे लेकर आधिकारिक एलान किया। इसके बाद से ही ट्रंप सभी की नजरों में आ गए। पाकिस्ताप ने जरूर ट्रंप का धन्यवाद दिया, लेकिन भारत ने अमेरिका राष्ट्रपति के दावों को सिरे से खारित कर दिया।
कश्मीर मुद्दे का जिक्र कर भारत के निशाने पर आए ट्रंप
11 मई को ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया। इसके बाद तो ट्रंप पर भारतीयों का गुस्सा बरस पड़ा। दरअसल, ट्रंप ने लिखा, 'मुझे भारत और पाकिस्तान के मजबूत और अडिग नेतृत्व पर बहुत गर्व है, क्योंकि उनके पास यह जानने और समझने की शक्ति, बुद्धि और धैर्य है कि वर्तमान संघर्ष को रोकने का समय आ गया है, जो कई लोगों की मौत और विनाश का कारण बन सकता था। लाखों अच्छे और निर्दोष लोग मारे जा सकते थे! आपकी विरासत आपके बहादुर काम से बहुत बढ़ गई है। मुझे गर्व है कि अमेरिका ने आपको इस ऐतिहासिक और वीरतापूर्ण निर्णय पर पहुंचाने में मदद की। अभी चर्चा नहीं हुई है, लेकिन मैं इन दोनों महान देशों के साथ व्यापार को काफी हद तक बढ़ाने जा रहा हूं। इसके अलावा मैं आप दोनों के साथ मिलकर यह देखने के लिए काम करूंगा कि क्या हजार साल के बाद कश्मीर के संबंध में कोई समाधान निकाला जा सकता है। भगवान भारत और पाकिस्तान के नेतृत्व को अच्छी तरह से किए गए काम के लिए आशीर्वाद दें!!!'
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भारत ने बार-बार किया खारिज तब जाकर ट्रंप को हुआ एहसास
ऐसा नहीं है कि ट्रंप को अपने आप ही एहसास हुआ कि उनके श्रेय लेने की होड़ का दुनिया में मजाक बन रहा है। इसका अंदाजा उन्हें भारत की ओर से बार-बार दिए जा रहे सख्त संदेशों से हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में साफ किया कि भारत किसी तीसरे पक्ष की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं करेगा। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया कि ट्रंप नहीं, भारत ने अपनी शर्तों पर पाकिस्तान के साथ सैन्य कार्रवाई को स्थगित करने का फैसला किया है।
दरअसल, भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को बार-बार खारिज किया है। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। भारत ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम में अमेरिका की भूमिका को भी कमतर बताते हुए कहा था कि दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच सहमति बनी है।
13 मई को विदेश मंत्रालय ने साफ कहा था कि कश्मीर पर हमें मध्यस्थता मंजूर नहीं है। पाकिस्तान को पीओके खाली करना होगा। उन्होंने ट्रंप के दावे को नकारते हुए कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से लेकर 10 मई को गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई बंद करने की सहमति तक, भारतीय और अमेरिकी नेताओं के बीच उभरते सैन्य हालात पर बातचीत हुई। इनमें से किसी भी चर्चा में व्यापार का मुद्दा नहीं उठा।
टैरिफ के दावों का भी भारत ने किया खंडन
ट्रंप के इस दावे पर कि भारत ने उन्हें शून्य टैरिफ का ऑफर दिया है, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि भारत-अमेरिका में व्यापार वार्ता अभी चल ही रही है। कोई भी डील दोनों देशों के लिए फायदेमंद होनी चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता कि व्यापार से एक देश को फायदा हो और दूसरे को नुकसान। ट्रंप ने कतर में कहा था कि भारत की तरफ से उन्हें व्यापार पर शून्य टैरिफ की पेशकश की गई है।
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