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भारत ने चीन के खिलाफ कभी मुझे इस्तेमाल नहीं किया : दलाई लामा

Thu, 06 Apr 2017 07:18 AM IST
amarujala.com, Presented By :संदीप भ्ाट्ट
amarujala.com, Presented By :संदीप भ्ाट्ट Updated Thu, 06 Apr 2017 07:18 AM IST
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India never used me against China: Dalai Lama

एजेंसी / बोमडिला (अरुणाचल प्रदेश)। दलाई लामा की तवांग यात्रा को लेकर चीन की आपत्ति को खारिज करते हुए तिब्बती धर्म गुरु ने कहा है कि भारत ने कभी भी चीन के खिलाफ उनका इस्तेमाल नहीं किया। यहां मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह प्राचीन भारतीय सिद्धांतों के संदेशवाहक हैं और वह जहां कहीं भी जाते हैं वहां अहिंसा, शांति, सौहार्द और धर्म निरपेक्षता की बात करते हैं।

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दलाई लामा की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब चीन के सरकारी मीडिया ने बुधवार को कहा कि भारत चीन को चुनौती देने के लिए दलाई लामा को एक कूटनीतिक चाल के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। दलाई लामा ने कहा कि वह एक बौद्ध हैं।
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पूरा हिमालय क्षेत्र परंपरागत रूप से बौद्ध धर्म का अनुयायी रहा है। आधुनिक भौतिक विज्ञान बौद्ध दर्शन पर आधारित है। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के बारे में पूछे गए एक सवाल पर कहा कि इस राज्य से उनका विशेष संबंध है क्योंकि 1959 में जब उन्होंने भारत में प्रवेश किया था तब वह इसी रास्ते से आए थे। इस स्थान से उनका भावनात्मक रिश्ता है और यह उनके लिए खास है। बुधवार को दलाईलामा ने बोमडिला में एक धर्मसभा को संबोधित किया। 

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दलाई लामा के अरुणाचल दौरे पर भड़का चीन, दी धमकी 

India never used me against China: Dalai Lama

एजेंसी बीजिंग/ नई दिल्ली। तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश दौरे से पड़ोसी देश चीन भड़क गया है। उसने भारत पर आरोप लगाया है कि नई दिल्ली ने दलाई लामा के दौरे को अनुमति देकर द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। वहीं, भारत ने एक बार फिर कहा है कि यह दलाई लामा की धार्मिक यात्रा है।

दलाई लामा की यात्रा से चिढ़े चीन ने बीजिंग में भारतीय राजदूत विजय गोखले को समन पर विरोध दर्ज करवाया है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनिंग ने कहा कि भारत ने उसकी चिंताओं को दरकिनार कर भारत-चीन सीमा के पूर्वी हिस्से में दलाई लामा के दौरे की व्यवस्था की है।

इससे चीन के हितों और भारत-चीन रिश्तों को गहरा नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि चीन इस यात्रा का औपचारिक तौर पर विरोध करता है। हालांकि, दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा कि हमने स्पष्ट तौर पर कहा है कि दलाई लामा एक पूजनीय धर्म गुरु हैं और इससे पहले कई दफा वह अरुणाचल का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि दलाई लामा के भारतीय राज्य के दौरे और उनकी धार्मिक और अध्यात्मिक गतिविधियों को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए।

भारत के दावे के उलट चीनी प्रवक्ता ने सवाल किया कि क्या आप ईमानदारी से यह कहेंगे कि क्या दलाई लामा केवल एक धार्मिक गुरु हैं। मुझे लगता है कि इसका जवाब सभी को पता है। वह केवल एक धार्मिक नेता नहीं हैं। ऐसे में उनकी यात्रा विशुद्ध रूप से केवल धार्मिक नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि भारत को चीन के हितों को कमतर आंकने जैसे कदम उठाने से बचना चाहिए। संवेदनशील और विवादित क्षेत्र में दलाई लामा को जाने की अनुमति देकर भारत न केवल तिब्बत के मसले पर अपनी प्रतिबद्धता से पलटा है बल्कि इससे सीमाई इलाकों में विवाद भी बढ़ेगा।

चीनी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि इससे द्विपक्षीय रिश्तों में हुई शानदार प्रगति पर असर पड़ेगा और इससे भारत को कोई लाभ भी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि चीन अपनी सीमाई संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। हालांकि, ये कदम क्या होंगे, उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस बारे में ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है। तिब्बत से चीन का अहम हित जुड़ा हुआ है और भारत ने चीन की चिंता का ख्याल नहीं रखा।

चीन को सवाल उठाने का अधिकार नहीं : पेमा खांडू

India never used me against China: Dalai Lama

ब्यूरो /अमर उजाला, इटानगर। तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा के दौरे पर उठे विवाद के बीच अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बुधवार को कहा कि बीजिंग को भारत में दलाई लामा के दौरे पर सवाल उठाने या धमकी देने का कोई अधिकार नहीं है। इसकी वजह यह है कि भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा तिब्बत से सटी है, चीन से नहीं।

भाजपा की अगुवाई वाली राज्य सरकार के आमंत्रण पर दलाई लामा एक सप्ताह के दौरे पर यहां पहुंचे हैं। खांडू ने कहा कि मैकमोहन रेखा भारत और तिब्बत की सीमा का बंटवारा करती है। अरुणाचल में यह सीमा 1,080 किमी लंबी है।

मंगलवार को दलाईलामा गुवाहाटी से सड़क मार्ग से आठ घंटे का सफर तय कर बोमडिला पहुंचे थे। मुख्यमंत्री खांडू भी उनके काफिले में साथ थे। राज्य सरकार के अतिथि के तौर पर दलाई लामा वर्ष 1983 के बाद छठी बार अरुणाचल के दौरे पर आए हैं।

दिसंबर, 1996 को छोड़कर वे अपने हर दौरे में तवांग जाते रहे हैं। दलाई लामा इससे पहले वर्ष 2009 में यहां आए थे। उस दौरे की योजना तिब्बत की राजधानी ल्हासा से अरुणाचल होकर उनके पलायन के ठीक 50 साल बाद बनी थी। उस समय पेमा खांडू के पिता दोर्जी खांडू मुख्यमंत्री थे। खांडू परिवार भी तवांग का ही रहने वाला है।

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