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Defence: 'प्रलय' बैलिस्टिक मिसाइलों की दो और यूनिट के लिए ऑर्डर देगी सेना, 7500 करोड़ से अधिक की लागत

Sat, 15 Apr 2023 08:36 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 15 Apr 2023 08:36 PM IST
सार

सूत्रों ने बताया कि बलों को मजबूत क्षमता देने के लिए इन मिसाइलों की रेंज को कुछ सौ किलोमीटर और बढ़ाने पर भी काम चल रहा है। चीन और पाकिस्तान दोनों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो सामरिक भूमिकाओं के लिए हैं।

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India moving towards creating Rocket Force defence services to acquire around 250 more Pralay ballistic missil
'प्रलय': सतह से सतह पर मार करने वाली एक अर्ध बैलिस्टिक मिसाइल - फोटो : एएनआई

विस्तार

देश की उत्तरी सीमाओं पर खतरे से निपटने के लिए एक मजबूत रॉकेट बल बनाने की दिशा में भारत एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। रक्षा बल 7,500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों की दो और इकाइयों (यूनिट) के लिए ऑर्डर देने के लिए तैयार हैं। रक्षा मंत्रालय ने पिछले साल दिसंबर में भारतीय वायुसेना के लिए इन मिसाइलों की एक इकाई को मंजूरी दी थी। 

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रक्षा सूत्रों ने  बताया, रक्षा बलों के लिए प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों की दो और इकाइयां अधिग्रहित की जा रही हैं, जो तीनों बलों की संपत्ति सहित एक रॉकेट बल बनाने की दिशा में अपने रास्ते पर हैं। उन्होंने बताया कि जमीनी बलों के लिए इन मिसाइलों की खरीद का प्रस्ताव अतिम चरण में है और जल्द ही इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है। प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलें 150 से 500 किलोमीटर की दूरी पर लक्ष्य को भेद सकती हैं और इंटरसेप्टर मिसाइलों के जरिए दुश्मन के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल है। 
 

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सूत्रों ने बताया कि बलों को मजबूत क्षमता देने के लिए इन मिसाइलों की रेंज को कुछ सौ किलोमीटर और बढ़ाने पर भी काम चल रहा है। चीन और पाकिस्तान दोनों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो सामरिक भूमिकाओं के लिए हैं। सूत्रों ने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित मिसाइल को और विकसित किया जा रहा है।
 

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मिसाइल प्रणाली का विकास 2015 के आसपास शुरू हुआ और इस तरह की क्षमता के विकास को सेना प्रमुख के रूप में दिवंगत जनरल बिपिन रावत ने बढ़ावा दिया। मिसाइल का पिछले साल 21 दिसंबर और 22 दिसंबर 2021 को लगातार दो बार सफल परीक्षण किया गया था।
 

सतह से सतह पर मार करने वाली अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय' को इंटरसेप्टर मिसाइलों को हराने में सक्षम बनाने के लिए विकसित किया गया है। यह मिडएयर में एक निश्चित सीमा को कवर करने के बाद अपना रास्ता बदलने की क्षमता रखता है। इस मिसाइल को पहले भारतीय वायु सेना में शामिल किया जाएगा और उसके बाद भारतीय सेना द्वारा शामिल किया जाएगा।

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