तीन साल बाद भी ताजा है जख्म: मणिपुर हिंसा पर राज्य सरकार ने जारी किया आंकड़ा; कुल 306 लोग की मौत, 49 लापता
मणिपुर में मई 2023 से जारी मैतेई-कुकी जातीय हिंसा में अब तक 306 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 49 लोग अभी भी लापता हैं। यह आंकड़े गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने विधानसभा में पेश किए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मणिपुर के गृह मंत्री गोविंद दास कोंथौजम ने गुरुवार को विधानसभा को बताया कि मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा में कम से कम 306 लोग मारे गए और 49 लोग अभी भी लापता हैं।
कब से शुरू हुई हिंसा?
मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा 3 मई, 2023 को शुरू हुई थी। यह हिंसा पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद शुरू हुई, जो मैतेई समुदाय की 'अनुसूचित जनजाति' का दर्जा पाने की मांग के विरोध में निकाला गया था।
गृह मंत्री कोंथौजम ने क्या कहा?
विधानसभा सत्र के दूसरे दिन भाजपा विधायक सपम रंजन सिंह के सवाल का जवाब देते हुए कोंथौजम ने कहा, '3 मई, 2023 को हिंसा शुरू होने के बाद से 306 लोगों की मौत हो चुकी है और 31 अगस्त, 2026 तक 49 लोग लापता हैं।'
मणिपुर में मैतेई समुदाय की कितनी हिस्सेदारी?
मणिपुर की आबादी में मैतेई समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 53 प्रतिशत है। वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी (जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं) 40 प्रतिशत हैं और मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में रहते हैं।
हिंसा को देखते हुए, राज्य में पिछले साल 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। इससे पहले, महीनों तक चली जातीय हिंसा के बाद 9 फरवरी को बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इस्तीफा दे दिया था। इस साल 4 फरवरी को राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया। इसके कुछ ही घंटों बाद भाजपा नेता वाई. खेमचंद सिंह के मुख्यमंत्री के तौर पर नई राज्य सरकार का गठन हुआ।