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एस-400 सौदा: प्रतिबंधों में छूट पाने के लिए इस तरह अमेरिका को साधने में जुटा भारत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 07 Oct 2018 08:56 AM IST
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एस-400 मिसाइल
भारत ने रूस के साथ एस-400 मिसाइल सिस्टम सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं। लेकिन इस सौदे को पूरा करने के लिए उसे अमेरिका को साधना पड़ेगा क्योंकि रूस पर अमेरिका ने कई प्रतिबंध लगाए हुए हैं। केवल इतना ही नहीं मिसाइल निर्माता कंपनी भी इन प्रतिबंधों का सामना कर रही है। इसी वजह से भारत राजनयिक-सैन्य अभियान के जरिए अमेरिका से इस सौदे में उसे छूट दिए जाने की मांग करेगा। लंबे इंतजार के बाद भारत और रूस के बीच शुक्रवार को इस सौदे पर मुहर लगी है।
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एक उच्च सरकारी सूत्र ने बताया कि भारत ने ट्रंप प्रशासन को इस बात के लिए आश्वस्त किया है कि वह हथियार के सिस्टम की ऑपरेशनल गोपनीयता के साथ समझौता नहीं करेगा जो उसने खरीदे हैं या जो अमेरिका से खरीदेगा। एक सूत्र ने कहा, 'भारत ने अमेरिका से यह भी कहा है कि वह तकनीकी तौर पर मजबूती बनाए रखेगा और किसी भी देश की गोपनीय जानकारी किसी तीसरे देश के साथ साझा नहीं करेगा। हम दो देशों के बीच हुए समझौतों के बौद्धिक संपदा अधिकार का सम्मान करते हैं।'
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सुरक्षा पर बनी कैबिनेट समिति द्वारा 26 सितंबर को एस-400 सौदे को लेकर सहमति मिलने के बाद भारत के अधिकारियों द्वारा कई बार अमेरिका का दौरा किया गया और उसे इस सौदे के लिए मनाने की कोशिश भी की गई। भारतीय वायुसेना के तब डिप्टी चीफ रहे एयर मार्शल आर नांबियार के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय तकनीकी टीम ने 22-23 अगस्त को अमेरिका का दौरा किया था। नांबियर अब ईस्टर्न कमांड के प्रमुख हैं। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने सितंबर के मध्य में अमेरिका का दौरा किया था।
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सूत्रों का कहना है कि भारत अमेरिका तक अपनी बात को मजबूती से पहुंचाने में सफल रहा है। भारत ने अमेरिका को बताया है कि एस-400 सौदा उसकी सीमाओं की सुरक्षा के लिए कितना आवश्यक है। हालांकि उसने इस सौदे पर अमेरिकी प्रतिबंधों वाले कानून काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट (काट्सा) में छूट दिए जाने का अंतिम निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर छोड़ दिया है। इस कानून के तहत ट्रंप प्रशासन ने दुनिया के कई देशों पर रूसी हथियारों और ईरान से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं।