Electricity: जरूरत से ज्यादा ताप बिजली क्षमता बढ़ा रहा भारत, जीईएम और सीआरईए के विश्लेषण में आया सामने
देश में जितनी भी कोयला परियोजनाओं की योजना बन चुकी है, यदि वे चालू हो जाती हैं और अगर कुल कोयला आधारित क्षमता में से 2.1 गीगावॉट निर्माण क्षमता से बाहर भी कर दी जाएं, तो भी देश में ऑन-ग्रिड कोयला क्षमता 275 गीगावॉट होगी।
विस्तार
भारत जरूरत से ज्यादा कोयला आधारित ताप क्षमता विकसित कर रहा है। यह बात ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर (जीईएम) और सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की ओर से जारी नए विश्लेषण में सामने आई है। 2023 के शुरुआती पांच महीनों में करीब 11.5 गीगावॉट क्षमता की कोयला बिजली परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अनुमति दी गई है। इसी दौरान करीब 3.9 गीगावॉट क्षमता की कोयला परियोजनाओं के विस्तार को मंजूरी दी गई है। इसी तरह 7.6 गीगावॉट क्षमता के लिए संदर्भ की शर्तें जारी की गई हैं। अब ये परियोजनाएं मंजूरी हासिल करने के एक कदम और पास आ गई हैं।
10 वर्षों तक किसी बिजली परियोजना की जरूरत नहीं : राष्ट्रीय विद्युत योजना (एनईपी 2023) का विश्लेषण दर्शाता है कि भारत की निर्माणाधीन कोयला बिजली क्षमता 2027 और 2032 की अनुमानित आवश्यकताओं से कहीं ज्यादा है। निर्माणाधीन आठ व योजना के मुताबिक 34.9 गीगावाद से अधिक क्षमता के कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के निर्माण की आवश्यकता नहीं है। यदि राष्ट्रीय विद्युत योजना के मुताबिक, कोयला बिजली संयंत्रों को लेकर 10 वर्षों के लिए लगाए अनुमान को देखें तो देश में किसी भी नई कोयला आधारित बिजली परियोजना को शुरू करने की आवश्यकता नहीं है।
यह है स्थिति
आंकड़ों का विश्लेषण कर बताया गया है कि भारत मौजूदा समय में करीब 65.3 गीगावॉट कोयला आधारित बिजली क्षमता विकसित कर रहा है। इसमें से 30.4 गीगावॉट क्षमता निर्माणाधीन है। वहीं, 35 गीगावॉट क्षमता निर्माण से पहले के विभिन्न चरणों में है। इनमें से 14.4 गीगावॉट क्षमता के लिए अनुमति दी जा चुकी है। 11.8 गीगावॉट क्षमता को अनुमति दी जानी है, जबकि 8.8 गीगावॉट क्षमता की परियोजनाओं की अभी केवल घोषणा की गई है। हालांकि, इस चिंताजनक वृद्धि के बावजूद विकसित की जा रही परियोजनाओं में 85.6 फीसदी की उल्लेखनीय गिरावट आई है, जो 2014 में 250 गीगावॉट से घटकर 36 गीगावॉट रह गई हैं।
क्षमता से इतना अधिक
देश में जितनी भी कोयला परियोजनाओं की योजना बन चुकी है, यदि वे चालू हो जाती हैं और अगर कुल कोयला आधारित क्षमता में से 2.1 गीगावॉट निर्माण क्षमता से बाहर भी कर दी जाएं, तो भी देश में ऑन-ग्रिड कोयला क्षमता 275 गीगावॉट होगी। मतबल की यह एनईपी की ओर से 2032 के लिए अनुमानित 259.6 गीगावॉट क्षमता की आवश्यकता से कहीं ज्यादा है।