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ICMR: टीबी के खिलाफ लड़ाई में भारत की अहम उपलब्धि, हाथ से चलने वाली एक्स-रे जांच मशीन बनाई
Thu, 17 Oct 2024 02:41 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 17 Oct 2024 02:41 PM IST
सार
भारत में हाथ में पकड़ी जाने वाली एक्स-रे मशीन विकसित की गई है, जिससे मरीजों में टीबी की बीमारी का जल्द पता लग सकेगा और फिर उसका समय से इलाज करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर करने में मदद मिलेगी।
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आईसीएमआर के महानिदेशक
- फोटो : एएनआई
विस्तार
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने बताया कि टीबी संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में एक नई उपलब्धि हासिल हुई है। दरअसल भारत में हाथ में पकड़ी जाने वाली एक्स-रे मशीन विकसित की गई है, जिससे मरीजों में टीबी की बीमारी का जल्द पता लग सकेगा और फिर उसका समय से इलाज करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर करने में मदद मिलेगी।
विदेशी मशीन की तुलना में आधी होगी कीमत
19वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटीज इंडिया 2024 के दौरान आईसीएमआर के महानिदेशक ने कहा कि हाथ से पकड़ी जाने वाली एक्स-रे मशीन बहुत महंगी है। अब आईआईटी कानपुर के साथ साझेदारी में आईसीएमआर ने हाथ से पकड़ी जाने वाली एक स्वदेशी एक्स-रे मशीन बनाई है, जिसकी कीमत विदेशी मशीन की तुलना में आधी है। इससे घर पर भी मरीजों की टीबी जांच की जा सकेगी। डॉ. बहल ने बताया कि भारत ने एमपॉक्स की जांच के लिए भी एक टेस्टिंग किट विकसित की है। तीन कंपनियां इन किट का उत्पादन कर रही हैं।
सिकल सेल एनीमिया की जांच के लिए बनाई टेस्टिंग किट
डॉ. बहल ने बताया कि देश में 10 लाख से ज्यादा लोग सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित हैं। यह दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। बीते साल प्रधानमंत्री मोदी ने सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ अभियान की शुरुआत की थी और साल 2047 तक भारत को सिकल सेल एनीमिया से मुक्त करने का लक्ष्य रखा था। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर देश के डॉक्टर्स और वैज्ञानिकों से चर्चा कर 18 टेस्ट किट विकसित की गई हैं, जिनसे कम कीमत पर सिकल सेल एनीमिया का पता लगाया जा सकेगा। इसकी लागत 30 रुपये तक हो सकती है, जो पहले 400 रुपये थी।
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भारत जल्द ही डेंगू की वैक्सीन भी लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। देश में हर साल बड़ी संख्या में लोगों की डेंगू से मौत हो जाती है। डॉ. बहल ने बताया कि अभी डेंगू वैक्सीना का तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है और अगले एक साल में इसके नतीजे मिल जाएंगे, उसके बाद डेंगू वैक्सीन बनाई जाएगी।
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विदेशी मशीन की तुलना में आधी होगी कीमत
19वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटीज इंडिया 2024 के दौरान आईसीएमआर के महानिदेशक ने कहा कि हाथ से पकड़ी जाने वाली एक्स-रे मशीन बहुत महंगी है। अब आईआईटी कानपुर के साथ साझेदारी में आईसीएमआर ने हाथ से पकड़ी जाने वाली एक स्वदेशी एक्स-रे मशीन बनाई है, जिसकी कीमत विदेशी मशीन की तुलना में आधी है। इससे घर पर भी मरीजों की टीबी जांच की जा सकेगी। डॉ. बहल ने बताया कि भारत ने एमपॉक्स की जांच के लिए भी एक टेस्टिंग किट विकसित की है। तीन कंपनियां इन किट का उत्पादन कर रही हैं।
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सिकल सेल एनीमिया की जांच के लिए बनाई टेस्टिंग किट
डॉ. बहल ने बताया कि देश में 10 लाख से ज्यादा लोग सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित हैं। यह दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। बीते साल प्रधानमंत्री मोदी ने सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ अभियान की शुरुआत की थी और साल 2047 तक भारत को सिकल सेल एनीमिया से मुक्त करने का लक्ष्य रखा था। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर देश के डॉक्टर्स और वैज्ञानिकों से चर्चा कर 18 टेस्ट किट विकसित की गई हैं, जिनसे कम कीमत पर सिकल सेल एनीमिया का पता लगाया जा सकेगा। इसकी लागत 30 रुपये तक हो सकती है, जो पहले 400 रुपये थी।
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भारत जल्द ही डेंगू की वैक्सीन भी लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। देश में हर साल बड़ी संख्या में लोगों की डेंगू से मौत हो जाती है। डॉ. बहल ने बताया कि अभी डेंगू वैक्सीना का तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है और अगले एक साल में इसके नतीजे मिल जाएंगे, उसके बाद डेंगू वैक्सीन बनाई जाएगी।