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भारत को उम्मीद: पैंगोंग त्सो से भी पीछे हटेगा चीन, बातचीत जारी

Fri, 17 Jul 2020 10:02 PM IST
Rajeev Rai शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Fri, 17 Jul 2020 10:02 PM IST
सार

  • अच्छी बात कि पड़ोसी पैंगोंग पर बात करने लगा है
  • फिंगर इलाके से भी पीछे हटेगी चीन की जनमुक्ति सेना
  • चीन चाहता है ढाई कदम आगे बढ़कर, दो कदम पीछे हटना

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India hopes: China will retreat from Pangong Tso, talks continue
भारतीय और चीनी सेना (फाइल फोटो) - फोटो : social media

विस्तार

चीन का इरादा बहुत पाक नहीं है। न वह फिंगर इलाके से पीछे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जाना चाहता है और न ही पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान करना चाहता है। बृहस्पतिवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव इस पर पूछे गए सवाल का खुलकर जवाब नहीं दे पा रहे थे। उन्होंने इसे जटिल मसला कहकर छोड़ दिया, लेकिन शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसमें थोड़ी साफगोई दिखाई है। फिर भी भारतीय रणनीतिकारों को उम्मीद है कि दबाव बनाने पर चीन की जनमुक्ति सेना पैंगोंग क्षेत्र और फिंगर इलाके से अप्रैल 2020 की स्थिति में लौट सकती है।

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भारतीय सैन्य सूत्रों का कहना है कि पहले लेफ्टिनेंट जनरल हरेन्द्र सिंह और चीन के सैन्य कमांडर लियु लिन की बैठक में चीन का पक्ष पैंगोंग क्षेत्र पर बातचीत के लिए तैयार ही नहीं होता था। वह केवल गलवां नदी घाटी क्षेत्र पर वार्ता कर रहे थे। बताते हैं कि इस सप्ताह पैंगॉग त्सो को लेकर भी चर्चा हुई। हालांकि चीन के सैन्य कमांडर पैंगोंग पर अपना ही दावा जता दे रहे हैं। वह फिंगर 4-8 तक भारतीय सुरक्षा बलों की गश्त को लेकर भी सहमत नहीं हैं।

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चीन की मंशा पैंगोंग हथियाने की
चीन की मंशा पैंगोंग त्सो क्षेत्र हथियाने की है। वह फिंगर इलाके में भी दादागिरी के बल पर भारतीय क्षेत्र में बने रहना चाहता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सैन्य कमांडरों के बीच में बनी सहमति से अभी तक चीन ही फायदे में है। चीन की सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से करीब 400 मीटर हटी है। जबकि भारतीय सुरक्षा बल 1.5 किमी से अधिक पीछे हट आए हैं। इस तरह से जिस क्षेत्र को बफर जोन बनाने पर सहमति हुई है, उसमें चीन के हिस्से का क्षेत्र केवल 400 मी. है, जबकि भारतीय हिस्से का 1.5 किमी की चौड़ाई में। 

चीन की जनमुक्ति सेना चाहती है कि अब इसी पर वास्तविक नियंत्रण रेखा का समझौता हो जाए। वह फिंगर क्षेत्र और पैंगोंग से पीछे हटने को तैयार नहीं है। न ही वहां से अपने टेंट, बंकर, स्थायी सैन्य संरचना को हटा रही है। यह वह क्षेत्र है जहां से पीओके से होकर चीन जाने वाला हाई-वे साफ तौर पर देखा जा सकता है। तिब्बत के पठार भी यहां से साफ झलकते हैं। रणनीतिक और सुरक्षा कारणों से यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है और यहां से दौलतबेग ओल्डी पर सीधी निगाह रखी जा सकती है।

क्या है रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संबोधन के मायने
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को सीडीएस जनरल विपिन रावत और सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे के साथ लेह-लद्दाख के अग्रिम मोर्चे पर गए हैं। उनका यह दौरा दो दिन का है। रक्षा मंत्री ने भी कहा कि चीन के साथ बातचीत की अब तक जो प्रगति हुई है, उससे मामला हल होना चाहिए। कहां तक होगा, इसकी गारंटी नहीं दे सकता। लेकिन इतना यकीन मैं जरूर दिलाना चाहता हूं कि भारत की इंच जमीन भी दुनिया की कोई ताकत नहीं छू सकती, उस पर कोई कब्जा नहीं कर सकता।

रक्षा मंत्री का यह बयान ट्वीट के जरिए भी आया है। कूटनीति के क्षेत्र में यह बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। एक राजनयिक का कहना है कि इसके बहुत मायने नहीं निकालने चाहिए। रक्षा मंत्री ने साफ किया है कि भारत अपनी एकता, अखंडता, संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और यदि आवश्यकता पड़ी तो हर विकल्प को अपनाएगा। माना जा रहा है कि भारत क्षेत्रीय टकराव जैसी स्थिति का संदेश देकर चीन से एलएसी का सम्मान करने का संदेश दे रहा है।

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संसद की विदेश मंत्रालय की समिति में भी नहीं हो सकी चर्चा
संसद की विदेश मंत्रालय की समिति बृहस्पतिवार के बाद आज शुक्रवार को भी टल गई। बताते हैं कि समिति का कोरम पूरा नहीं हो पाया। समिति की बैठक अप्रवासी भारतीयों के शादी के पंजीकरण को लेकर प्रस्तावित थी, लेकिन इसके सदस्य भारत-चीन के बीच में जारी विवाद पर चर्चा करने के इच्छुक थे। इस समिति में एनसीपी के प्रमुख शरद पवार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल, भाजपा के पीपी चौधरी, सांसद मीनाक्षी लेखी समेत अन्य हैं। समिति का कोरम आज भी पूरा नहीं हो पाया और भारत-चीन के मुद्दे पर चर्चा से मुद्दा रह गया।

संसद के सत्र का होगा सबसे ज्वलंत मुद्दा
अगले महीने 15 अगस्त के बाद संसद का सत्र आहूत हो सकता है। संसद का सत्र आहूत होने की संभावना पर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तालमेल बिठाकर चर्चा कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी समेत विपक्ष के तमाम राजनीतिक दलों को भी संसद के मानसून सत्र का इंतजार है। अगले महीने संसद का सत्र आहूत होने पर कोविड-19 से बचने के उपाय पर सरकार की गंभीरता और चीन की सेन के भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ चर्चा का सबसे ज्वलंत मुद्दा रहने की संभावना है।

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