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NCERT: 'भारत के पास थी अपनी मध्यरेखा, जो उज्जैन से होकर गुजरती थी', एनसीईआरटी की नई किताब में दावा

Sun, 21 Jul 2024 10:33 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Sun, 21 Jul 2024 10:33 PM IST
सार

एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तक में किए बदलाव में जाति-आधारित भेदभाव के उल्लेखों को हटा दिया गया है। वहीं ये भी दावा किया गया है कि भारत के पास थी अपनी मध्यरेखा, जो मध्य प्रदेश के उज्जैन से होकर गुजरती थी। बता दें कि कक्षा 6 के लिए नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की तरफ से प्रकाशित इतिहास, भूगोल और नागरिक शास्त्र की तीन अलग-अलग पुस्तकों का एक बहुत छोटा-सा मिश्रण है। 

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India had its own prime meridian passing through Ujjain: New NCERT textbook
एनसीईआरटी की नई किताब में दावा- भारत के पास थी अपनी मध्यरेखा - फोटो : ANI / Freepik

विस्तार

एनसीईआरटी कक्षा-6 की नई पाठयपुस्तक सामाजिक विज्ञान के भूगोल सेक्शन में एक जानकारी को शामिल किया गया है। जिसमें लिखा गया है कि ग्रीनविच मध्य रेखा से काफी पहले भारत की अपनी प्रधान मध्य रेखा थी। जो मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से गुजरती थी।  वहीं इस पाठयपुस्तक में नए पाठ्यक्रम में जाति-आधारित भेदभाव के उल्लेखों को हटाने के लिए जाति शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक बार किया गया है। इसमें बीआर आंबेडकर से जुड़े हिस्से को भी हटा दिया गया है। इसके अलावा इसमें हड़प्पा सभ्यता की जगह सिंधु-सरस्वती सभ्यता या इंडस-सरस्वती सभ्यता शब्द का इस्तेमाल किया गया है। जो कि नए पाठ्यक्रम के अनुसार विकसित पाठयपुस्तक में किए गए परिवर्तनों में से है।
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कई शताब्दियों पहले भारत के पास थी मध्य रेखा
एनसीईआरटी की पाठयपुस्तक के अनुसार, ग्रीनविच मेरिडियन पहली प्रधान मध्यरेखा नहीं है। यूरोप से कई शताब्दियों पहले भारत के पास अपनी एक प्रधान मध्य रेखा थी। इसे मध्य रेखा कहा जाता था। यह उज्जयिनी (उज्जैन) शहर से होकर गुजरती थी। जानकारी के अनुसार उज्जैन कई शताब्दियों तक खगोल विज्ञान का एक प्रतिष्ठित केंद्र था। 

इसमें ये भी जिक्र किया गया है कि प्रसिद्ध खगोलशास्त्री वराहमिहिर लगभग 1,500 साल पहले उज्जैन में ही रहते थे। भारतीय खगोलशास्त्रियों को अक्षांश, देशांतर, शून्य और प्रधान मध्य रेखा की जानकारियां थी। उज्जयिनी मध्य रेखा सभी भारतीय खगोल ग्रंथों में गणनाओं के लिए एक संदर्भ बन गई।
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किताब में सरस्वती नदी का कई बार उल्लेख
पाठ्यपुस्तक के एक अध्याय में सरस्वती नदी का कई बार उल्लेख किया गया है। इसे भारतीय सभ्यता का प्रारंभ नाम के अध्याय में प्रमुख स्थान दिया गया है। इसमें हड़प्पा सभ्यता को सिंधु-सरस्वती के रूप में संदर्भित किया गया है। इसमें कहा गया है कि सरस्वती नदी की घाटी में सभ्यता के प्रमुख शहर राखीगढ़ी, गणवेरीवाला और छोटे शहर और कस्बे मौजूद थे।

अब एक मौसमी नदी बन चुकी है 'घग्गर' नदी
पाठ्यपुस्तक में यह भी बताया गया है कि भारत में 'घग्गर' के नाम से प्रसिद्ध नदी को पाकिस्तान में 'हाकरा' के नाम से जाना जाता है। यह अब एक मौसमी नदी के रूप में तब्दील हो चुकी है। एक्सप्लोरिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड शीर्षक वाली पाठ्यपुस्तक में जाति व्यवस्था का उल्लेख किए बिना ही वेदों का विवरण दिया गया है। इसमें कहा गया है कि महिलाओं और शूद्रों को इन ग्रंथों का अध्ययन करने की अनुमति नहीं थी।
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पुरानी और नई पाठ्यपुस्तक में कई अंतर
नए पाठ्यपुस्तक के अनुसार, वैदिक ग्रंथों में कई व्यवसायों का उल्लेख है, जैसे कृषक, बुनकर, कुम्हार, निर्माता, बढ़ई, चिकित्सक, नर्तक, नाई, पुजारी अन्य। जबकि पिछली पाठ्यपुस्तक में कहा गया था, कुछ पुजारियों ने लोगों को वर्ण नामक चार समूहों में विभाजित किया, शूद्र कोई भी अनुष्ठान नहीं कर सकते थे। अक्सर महिलाओं को शूद्रों के साथ समूहीकृत किया जाता था। महिलाओं और शूद्रों दोनों को वेदों का अध्ययन करने की अनुमति नहीं थी। पुरानी किताब में कहा गया है कि पुजारियों ने यह भी कहा कि ये समूह जन्म के आधार पर तय किए गए थे। उदाहरण के लिए, यदि किसी के पिता और माता ब्राह्मण हैं, तो वह स्वतः ही ब्राह्मण बन जाएगा और इसी तरह अन्य भी होंगे।

नई पाठ्यपुस्तक में प्राचीन भारत के राज्यों की विस्तृत खोज को बहुत हद तक हटा दिया गया है, जैसे कि पुरानी पुस्तक के चार अध्यायों में शामिल हैं जिन्हें नई पुस्तक से हटा दिया गया है। इसमें अशोक और चंद्रगुप्त मौर्य के राज्यों के विवरण शामिल हैं, जिसमें चाणक्य और उनके अर्थशास्त्र की भूमिका के साथ-साथ गुप्त, पल्लव और चालुक्य राजवंश और कालिदास का कार्य शामिल है। जबकि पूरी पुस्तक में राजा अशोक का एकमात्र उल्लेख चौथे अध्याय की समयरेखा में एक शब्द है।

एनसीईआरटी के निदेशक ने परिचय अध्याय में क्या लिखा
एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश सकलानी ने नई पाठ्यपुस्तक के परिचयात्मक अध्याय में लिखा है, हमने 'बड़े विचारों' पर ध्यान केंद्रित करके पाठ को न्यूनतम रखने की कोशिश की है। इससे हम कई विषयों - चाहे इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान या अर्थशास्त्र - से एक ही विषय में इनपुट को संयोजित करने में सक्षम हुए हैं।
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