INS Vikrant: दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए तैयार हुआ INS विक्रांत, इस दिन पीएम दिखाएंगे हरी झंडी
आईएनएस ‘विक्रांत’ को तीन सितंबर को कोच्चि में एक कार्यक्रम में नौसेना में शामिल किया जाएगा और इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिरकत करेंगे।
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स्वदेश में निर्मित विमानवाहक पोत आईएनएस ‘विक्रांत’बनकर पूरी तरह से तैयार हो गया है। नौसेना के उपप्रमुख वाइस एडमिरल एसएन घोरमडे ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि आईएनएस ‘विक्रांत’ के सेवा में शामिल होने से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। आईएनएस ‘विक्रांत’ को दो सितंबर को कोच्चि में एक कार्यक्रम में नौसेना में शामिल किया जाएगा और इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिरकत करेंगे। उन्होंने कहा कि विमानवाहक पोत को सेवा में शामिल करना "अविस्मरणीय" दिन होगा क्योंकि यह पोत देश की समग्र समुद्री क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा। वाइस एडमिरल घोरमडे ने कहा कि आईएनएस ‘विक्रांत’ को नौसेना में शामिल किया जाना ऐतिहासिक मौका होगा और यह ‘राष्ट्रीय एकता’ का प्रतीक भी होगा, क्योंकि इसके कल-पुरज़े कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए हैं।
20 हजार करोड़ की लागत से बना है INS विक्रांत
करीब 20,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस विमानवाहक पोत ने पिछले महीने समुद्री परीक्षणों के चौथे और अंतिम चरण को सफलतापूर्वक पूरा किया था। 'विक्रांत' के निर्माण के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है जिनके पास विमानवाहक पोत को स्वदेशी रूप से डिजाइन करने और निर्माण करने की क्षमता है।
जानें INS विक्रांत की खासियत
भारत के अब तक के सबसे बड़े स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस विक्रांत में करीब 2,500 किलोमीटर का केबल लगाया गया है। INS विक्रांत की लंबाई 262 मीटर, चौड़ाई 62 मीटर और ऊंचाई 59 मीटर है। दो फुटबॉल मैदान के बराबर है विक्रांत का फ्लाइट डेक, जहां से विमान उड़ेंगे। इस युद्धपोत की स्पीड 28 नॉट की है और 7,500 समुद्री मील तक सफर की भी क्षमता है। विमानवाहक पोत में आठ पॉवर जनरेटर हैं जो पूरे कोच्चि शहर को रोशन करने की क्षमता रखते हैं। आठ किलोमीटर के बराबर बैठता है इस विमानवाहक पोत के गलियारों का एक चक्कर। इस इस युद्धपोत में 2,300 कंपार्टमेंट बनाए गए हैं, जिनमें 1,700 कर्मचारी बैठ सकते हैं।