फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   India did not invest according to the promise for Chabahar port : Iran

ईरान का भारत पर निशाना, तेल आयात कम करने पर खत्म होगा विशेष लाभ

Wed, 11 Jul 2018 02:53 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 11 Jul 2018 02:53 PM IST
विज्ञापन
 India did not invest according to the promise for Chabahar port : Iran
chabahar-port

सामरिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह में वादे के मुताबिक निवेश नहीं करने पर भारत की आलोचना करते हुए इरान ने कहा कि यदि भारत ईरान से तेल का आयात कम करता है तो उसे मिलने वाले विशेष लाभ खत्म हो सकते हैं।

विज्ञापन


ईरान के उप राजदूत और चार्ज डि अफेयर्स मसूद रजवानियन रहागी ने कहा कि यदि भारत अन्य देशों की तरह ईरान से तेल आयात कम कर सऊदी अरब, रूस, इराक और अमेरिका से आयात करता है तो उसे मिलने वाले विशेष लाभ को ईरान खत्म कर देगा।
विज्ञापन


उन्होंने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चाबहार बंदरगाह और उससे जुड़ी परियोजनाओं के लिए किए गए निवेश के वादे अभी तक पूरे नहीं किए गए हैं। यदि चाबहार बंदरगाह में उसका सहयोग और भागीदारी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है तो भारत को इस संबंध में तुरंत जरूरी कदम उठाने चाहिए। अमेरिका ने भारत और अन्य देशों को ईरान से तेल आयात को 4 नवंबर तक "शून्य" करने या प्रतिबंधों का सामना करने के लिए कहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

दरअसल, भारत इस समय कच्चे तेल को लेकर बेहद ही मुश्किल परिस्थिति में फंसे हुए हैं। भारत इसपर निर्णय नहीं ले पा रहे हैं कि वह ट्रंप के फैसले को माने या फिर तेल के बढ़ते दामों की मार सहें। दरअसल अमेरिका ने ईरान को अपने तेल का निर्यात नहीं करने की चेतावनी दी है। मालूम हो कि अमेरिका ने पिछले हफ्ते ही भारत समेत अन्य देशों को ईरान से तेल आयात नहीं करने की चेतावनी दी थी।

वहीं चीन और भारत बीते तीन महीने से हर दिन करीब 14 लाख बैरल क्रूड ऑइल का आयात किया है। भारत चीन के बाद ईरान से कच्चा तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। ऐसे में चीन और भारत के सामने यह सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो गई है कि वह किस ओर कदम बढ़ाए। 

ईरान ने अप्रैल 2017 और जनवरी 2018 (2017-18 वित्त वर्ष के पहले 10 महीने) के दौरान 18.4 मिलियन टन कच्चा तेल निर्यात किया था। अमेरिका चीन और भारत समेत सभी देशों पर ईरान से तेल खरीद पूरी तरह से रोकने का दबाव बना रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका आगे भी इसी तरह ईरान पर यह प्रतिबंध जारी रखता है तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ओपेक देशों से तेल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए लगातार दबाव बना रहा है। खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि सऊदी अरब जल्द से जल्द तेल उत्पादन बढ़ाने की ओर कदम उठाए।


कच्चा तेल निर्धारित करेगा व्यापार युद्ध आगे बढ़ेगा या नहीं

इस साल अमेरिका ने औसतन 534000 बैरल प्रति दिन के हिसाब से चीन को कच्चे तेल निर्यात किया है। लेकिन जिस तरह से अमेरिका द्वारा वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाए जा रहे हैं और चीन भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है तो ऐसे में चीन के पास विकल्प है कि वह ईरान से तेल का निर्यात बढ़ा दे और अमेरिका को कुछ हदतक दरकिनार कर दे। अगर ऐसा होता है तो व्यापार युद्ध एक कदम और आगे बढ़ सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed