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आत्मनिर्भरता की ओर कदम: भारत तैयार कर रहा एस-400 जैसी रक्षा प्रणाली, दुनिया के चुनिंदा देशों में होगा शामिल
Wed, 26 Jul 2023 03:48 PM IST
देव कश्यप
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 26 Jul 2023 03:48 PM IST
सार
रक्षा सूत्रों ने बताया कि तीन-स्तरीय लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय में एडवांस स्टेज में है और जल्द ही इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में भारत सीमा पार से होने वाले हवाई हमलों को रोकने के लिए सतह से हवा में वार करने वाली एस-400 की तरह मिसाइल (एलआर-सैम) रक्षा प्रणाली विकसित करेगा। यह तीन स्तर में काम करेगी और 400 किमी रेंज तक दुश्मन के हवाई हमलों व मिसाइलों को तबाह कर देगी।
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2.5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की है परियोजना
रक्षा सूत्रों ने बताया कि 250 करोड़ डॉलर (करीब 20,500 करोड़ रुपए) की यह परियोजना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। इस प्रणाली के विकास का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय के पास अग्रिम चरण में है। जल्द ही इस पर सहमति मिल जाएगी। इसमें तीन स्तरों की सुरक्षा का मतलब है कि यह तीन अलग-अलग दूरी पर मौजूद लक्ष्यों को मार गिरा सकती है। इस स्वदेशी तीन स्तरीय एलआर-सैम परियोजना का नेतृत्व वायुसेना कर सकती है, जो रक्षा क्षेत्र के भारतीयकरण के लिए विशेष प्रयास कर रही है।
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चीन के पास भी ऐसी प्रणाली, क्षमता कम
पड़ोसी दुश्मन देश चीन ने भी एस-400 प्रणाली हासिल की है और इसे भारत से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात किया है। साथ ही चीन ने घरेलू वायु रक्षा प्रणाली भी विकसित की है, लेकिन यह एस-400 से कहीं कम क्षमता रखती है।
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डीआरडीओ ने की विकसित
भारत में सतह से हवा (सैम) में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली का विकास पहले ही जारी है। इसके तहत इस्राइल के साथ मध्य दूरी की सतह से हवा में वार करने वाली मिसाइल (एमआर-सैम) प्रणाली का विकास हो रहा है। वहीं भारतीय रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) ने धरती और युद्धपोत दोनों पर तैनात हो सकने वाली वायु रक्षा हथियार प्रणाली विकसित करने में सफलता हासिल की है। डीआरडीओ द्वारा एलआर-सैम परियोजना लेने के बाद नौसेना ने घरेलू एलआर-सैम प्रणाली का नाम एमआर-सैम कर दिया था। थल सेना और वायुसेना ने भी इसे एमआर-सैम नाम दिया।
एस-400 की दो स्क्वाड्रन की आपूर्ति बाकी
सूत्रों के अनुसार इसी एमआर-सैम से आगे अब तीन स्तरीय एलआर-सैम का विकास होगा। इसकी क्षमता रूस की एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की श्रेणी की होगी। साथ ही छोटी दूरी के लक्ष्य भी यह भेद सकती है। उल्लेखनीय है कि भारत रूस से पांच एस-400 प्रणालियां खरीद रहा है, जिसके लिए अक्तूबर 2018 में 500 करोड़ डॉलर का समझौता हुआ था। इसके तीन स्क्वाॅड्रन भारत आ चुके हैं, जिन्हें चीन व पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर तैनात किया गया है। वहीं, दो अन्य स्क्वाॅड्रन की आपूर्ति कब होगी, यह फिलहाल साफ नहीं है।