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पैंगोंग ही नहीं चिकन नेक पर भी सामरिक बढ़त हासिल करने की फिराक में है चीन

Tue, 01 Sep 2020 10:26 AM IST
देव कश्यप हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 01 Sep 2020 10:26 AM IST
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India china tension Not only Pangong china also seeking a strategic edge over chicken neck area
India china disputes - फोटो : ANI

चीन की निगाहें उत्तरी लद्दाख से जुड़े पैंगोंग पर ही नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर में चिकन नेक पर भी भारत पर सामरिक बढ़त हासिल करने की है। भारत को इस आशय का अंदेशा पहले से ही था। यही कारण है कि भारतीय सेना ने चीन की यथास्थिति में बदलाव लाने की कोशिश को नाकाम करने की पूरी तैयारी कर ली थी। अब भारत को अंदेशा है कि चीन एक बार फिर दोकलम तक सड़क बनाने की हिमाकत कर सकता है।

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दरअसल, चीन की योजना भारत से बातचीत जारी रखते हुए पैंगोंग झील में घुसपैठ करने की थी। रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम इस झील के दो-तिहाई हिस्से पर चीन का पहले से ही कब्जा है। रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए चीन की मंशा समूची झील पर कब्जा करने की है।
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यही कारण है कि भारतीय सेना ने झील के अपने हिस्से में मजबूत सामरिक तैयारी कर रखी थी। बीती 29-30 अगस्त की रात चीन की योजना को नाकाम किया जाना इसी तैयारी का नतीजा है।
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...तो सिलीगुड़ी के नजदीक होगी ड्रैगन की पहुंच
दरअसल, पैंगोंग झील और चिकन नेक क्षेत्र पर एकाधिकार से चीन को भारत पर बड़ी सामरिक बढ़त हासिल हो सकती है। पैंगोंग झील से लेह तक की दूरी महज 54 किलोमीटर है। यह झील चुसुल एप्रोच के रास्ते में है, जिसका इस्तेमाल चीन ने 1962 के युद्ध में किया था। 


चूंकि चीन ने झील के अपने हिस्से में पहले ही सड़कों का जाल बिछा रखा है। ऐसे में पूरे झील पर कब्जा करने के बाद उसे भारत पर मजबूत सामरिक बढ़त हासिल हो जाएगी। इसी तरह पूर्वोत्तर में चिकन नेक का बेहद संकरा गलियारा है, जो भारत को नेपाल, बांग्लादेश और भूटान से जोड़ने के अलावा चीन से दूर करता है। 

चीन की योजना दोकलम तक सड़कों का जाल बिछाकर खुद को इस गलियारे से जोड़ना है। चीन अगर अपने मंसूबे में कामयाब रहा तो वह सिलीगुड़ी के पास आ जाएगा । उससे पूर्वोत्तर में भी उसे सामरिक बढ़त हासिल हो जाएगी।

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