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चीन को भारत ने दिया जवाब, 61 साल पुरानी एलएसी की परिभाषा को मानने से किया इनकार
Tue, 29 Sep 2020 05:26 PM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 29 Sep 2020 05:26 PM IST
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एलएसी पर अधिकारियों ने की बैठक (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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लद्दाख के पूर्वी क्षेत्र में भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर गतिरोध बरकरार है। चीन ने एक बार फिर एलएसी के मसले पर नया विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। लेकिन भारत ने पलटवार करते हुए चीन से सख्त अंदाज में कह दिया है कि बार-बार भटकाने की मंशा सफल नहीं होगी।
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चीन ने एक बार फिर एलएसी को तय करने में 1959 के एकतरफा समझौते का हवाला दे रहा है, लेकिन भारत ने इसे मानने से साफ इनकार कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को भारत-चीन सीमा विवाद के मुद्दे पर कहा कि 'हमने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की स्थिति पर चीनी विदेश मंत्रालय के बयान के हवाले से एक रिपोर्ट देखी है। भारत ने तथाकथित एकतरफा परिभाषित 1959 एलएसी को कभी स्वीकार नहीं किया। स्थिति सुसंगत रही है, यह अच्छी तरह से सबको पता है, चीन के लोगों को भी।'
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने इस मुद्दे पर मीडिया के एक सवाल के जवाब में कहा कि 'भारत ने कभी भी 1959 में एकतरफा रूप से परिभाषित तथाकथित वास्तविक नियंत्रण रेखा को स्वीकार नहीं किया है। यही स्थिति बरकरार रही है और चीनी पक्ष सहित सभी इस बारे में जानते हैं।’
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श्रीवास्तव की यह टिप्पणी तब आई जब चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि चीन सात नवंबर 1959 को अपने तत्कालीन प्रधानमंत्री चाऊ एनलाई द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को भेजे गए एक पत्र में प्रस्तावित की गई एलएसी को मानता है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों का हवाला दिया जिनमें 1993 में एलएसी पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने संबंधी समझौता, 1996 में विश्वास बहाली के कदमों से संबंधित समझौता और 2005 में सीमा मुद्दे के समाधान के लिए राजनीतिक मानकों तथा निर्धारक सिद्धांतों से संबंधित समझौता भी शामिल है। उन्होंने इन समझौतों का जिक्र यह बताने के लिए किया कि दोनों पक्षों ने एलएसी संरेखण पर पारस्परिक सहमति पर पहुंचने की प्रतिबद्धता जताई थी।
श्रीवास्तव ने कहा कि ‘इसलिए, अब चीनी पक्ष का यह कहना, कि केवल एक ही एलएसी है, इन समझौतों में चीन द्वारा की गईं सभी प्रतिबद्धताओं के पूरी तरह विपरीत है।’ उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष ने एलएसी का हमेशा सम्मान और पालन किया है। संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हालिया संबोधन का जिक्र करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि यह चीनी पक्ष है जिसने पश्चिमी सेक्टर के विभिन्न हिस्सों में एलएसी पर अतिक्रमण के अपने प्रयासों से यथास्थिति को एकतरफा ढंग से बदलने की कोशिश की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि चीन ने पिछले कुछ महीनों में बार-बार दोहराया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्तमान स्थिति का समाधान दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के अनुरूप किया जाना चाहिए।
श्रीवास्तव ने कहा कि ‘10 सितंबर को विदेश मंत्री और उनके चीनी समकक्ष के बीच हुए समझौते में भी चीनी पक्ष ने सभी मौजूदा समझौतों का पालन करने की अपनी कटिबद्धता दोहराई है।’ उन्होंने कहा कि ‘इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि चीनी पक्ष ईमानदारी से सभी समझौतों और सहमति का पूरी तरह पालन करेगा तथा एलएसी की एकतरफा अपुष्ट व्याख्या करने से बचेगा।’
श्रीवास्तव की टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब चीन ने केंद्रशासित प्रदेश के रूप में लद्दाख के दर्जे पर सवाल उठाकर भारत को नाराज करने का काम किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने बीजिंग में एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि ‘भारत द्वारा अवैध रूप से स्थापित लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश को चीन मान्यता नहीं देता है। हम विवादित सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य उद्देश्यों के लिए आधारभूत ढांचा विकास का विरोध करते हैं।’
वांग ने यह टिप्पणी तब की जब पश्चिम के एक पत्रकार ने कहा कि भारत लद्दाख क्षेत्र में चीन से लगती अपनी सीमा पर ऊंचाई वाले इलाकों में सभी मौसमों में काम करने वाली सड़कों के निर्माण को प्राथमिकता दे रहा है।
चीन ने जब पिछले साल लद्दाख को अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने पर सवाल उठाया था तो भारत ने कहा था कि वह कभी दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता और यही वह दूसरे देशों से भी यही उम्मीद करता है।
कई दौर की वार्ता के बाद दोनों देशों की सेनाएं एलएसी पर अब भी भारी अस्त्र-शस्त्रों के साथ एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ी हैं। भारत ने संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों में अपने सैनिकों को सर्दियों में भी लगातार तैनात रखने के लिए व्यापक तैयारी की है।