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India-China: कितने मजबूत हैं भारत-चीन के व्यापारिक रिश्ते, क्या व्यापार खत्म करने से ड्रैगन को सबक मिलेगा?
सार
क्या वाकई में व्यापारिक रिश्ते खत्म करने से चीन को सबक सिखाया जा सकता है? भारत-चीन के बीच व्यापारिक रिश्ता कैसा है? आइए समझते हैं...
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भारत-चीन व्यापार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत-चीन के बीच एक बार फिर से सीमा पर तनाव की स्थिति हो गई है। अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारत और चीनी सेना के बीच हिंसक झड़प भी हुई। अब देशभर में चीन के विरोध में स्वर तेज हो गए हैं। विपक्षी दल केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। कांग्रेस के बाद अब आम आदमी पार्टी ने भी कहा है कि भारत को चीन से सारे व्यापारिक रिश्ते खत्म कर देने चाहिए। इससे चीन को सबक सिखाया जा सकेगा।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई में व्यापारिक रिश्ते खत्म करने से चीन को सबक सिखाया जा सकता है? भारत-चीन के बीच व्यापारिक रिश्ता कैसा है? आइए समझते हैं...
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ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई में व्यापारिक रिश्ते खत्म करने से चीन को सबक सिखाया जा सकता है? भारत-चीन के बीच व्यापारिक रिश्ता कैसा है? आइए समझते हैं...
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पहले जानिए आप और कांग्रेस ने क्या-क्या कहा?
रविवार को आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक हुई। इसमें अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'चीन जिस तरह हमें आंखे दिखा रहा है, यह हमारे देश के लोगों को अच्छा नहीं लगता है। मगर केंद्र कहता है कि सब कुछ ठीक है। भारत चीन से कारोबार बढ़ा रहा है। जबकि चाहिए यह कि चीन से कारोबार बंद करें।'
इससे पहले इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति से 18 बार मिल चुके हैं। (पूर्व विदेश मंत्री) सुषमा स्वराज ने कहा था कि व्यापार और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते। लेकिन अप्रैल 2020 में चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव पैदा करने के बाद, चीन से हमारा आयात बढ़ गया है, हमारा व्यापार घाटा बढ़ गया है।'
रविवार को आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक हुई। इसमें अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'चीन जिस तरह हमें आंखे दिखा रहा है, यह हमारे देश के लोगों को अच्छा नहीं लगता है। मगर केंद्र कहता है कि सब कुछ ठीक है। भारत चीन से कारोबार बढ़ा रहा है। जबकि चाहिए यह कि चीन से कारोबार बंद करें।'
इससे पहले इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति से 18 बार मिल चुके हैं। (पूर्व विदेश मंत्री) सुषमा स्वराज ने कहा था कि व्यापार और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते। लेकिन अप्रैल 2020 में चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव पैदा करने के बाद, चीन से हमारा आयात बढ़ गया है, हमारा व्यापार घाटा बढ़ गया है।'
अब जानिए दोनों देशों के बीच आयात और निर्यात कितना होता है?
आंकड़ों के अनुसार इस साल की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च तक भारत और चीन के बीच व्यापार में 15.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। दोनों देशों के बीच मार्च तिमाही में द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 32 बिलियन डॉलर का हो गया है। चाइना जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम के अनुसार साल 2021 में भारत का चीन के साथ व्यापार 125.6 अरब डॉलर पहुंच गया। पहली बार ऐसा हुआ जब भारत के साथ चीन का व्यापार 100 अरब डॉलर से ऊपर पहुंचा है। इस आंकड़े में भारत ने महज 28.1 अरब डॉलर का निर्यात किया जबकि 94.57 अरब डॉलर का आयात किया।
आंकड़ों के अनुसार इस साल की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च तक भारत और चीन के बीच व्यापार में 15.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। दोनों देशों के बीच मार्च तिमाही में द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 32 बिलियन डॉलर का हो गया है। चाइना जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम के अनुसार साल 2021 में भारत का चीन के साथ व्यापार 125.6 अरब डॉलर पहुंच गया। पहली बार ऐसा हुआ जब भारत के साथ चीन का व्यापार 100 अरब डॉलर से ऊपर पहुंचा है। इस आंकड़े में भारत ने महज 28.1 अरब डॉलर का निर्यात किया जबकि 94.57 अरब डॉलर का आयात किया।
आठ साल में भारत और चीन के बीच कितने का व्यापार हुआ?
| साल | व्यापार (आंकड़े अरब डॉलर में) |
| 2021-22 | 94.57 अरब डॉलर |
| 2020-21 | 65.21 अरब डॉलर |
| 2019-20 | 65.26 अरब डॉलर |
| 2018-19 | 70.31 अरब डॉलर |
| 2017-18 | 76.38 अरब डॉलर |
| 2016-17 | 61.28 अरब डॉलर |
| 2015-16 | 61.7 अरब डॉलर |
| 2014-15 | 60.41 अरब डॉलर |
चीन से इन चीजों का सबसे ज्यादा आयात करता है भारत
मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, टीवी, कैमरा, ऑटो उपकरण, केमिकल, कॉपर, कॉटन यार्न, जूता-चप्पल, स्टील, सर्किट, सेमीकंडक्टर, फर्टिलाइजर जैसे सामानों को चीन से आयात किया जाता है। इसके अलावा भारत की फार्मा इंडस्ट्री में इस्तेमाल किए जाने वाले लगभग 60 से 70 प्रतिशत केमिकल का भी चीन से ही आयात किया जाता है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, साल 2021 में चीन से लैपटॉप, कंप्यूटर, ऑक्सीजन कॉन्सेन्ट्रेटर के अलावा एसिटिक एसिड का आयात रिकॉर्ड बढ़ा है।
मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, टीवी, कैमरा, ऑटो उपकरण, केमिकल, कॉपर, कॉटन यार्न, जूता-चप्पल, स्टील, सर्किट, सेमीकंडक्टर, फर्टिलाइजर जैसे सामानों को चीन से आयात किया जाता है। इसके अलावा भारत की फार्मा इंडस्ट्री में इस्तेमाल किए जाने वाले लगभग 60 से 70 प्रतिशत केमिकल का भी चीन से ही आयात किया जाता है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, साल 2021 में चीन से लैपटॉप, कंप्यूटर, ऑक्सीजन कॉन्सेन्ट्रेटर के अलावा एसिटिक एसिड का आयात रिकॉर्ड बढ़ा है।
भारत चीन को क्या-क्या बेचता है?
भारत से चीन कई तरह के रॉ मैटेरियल, कॉटन, तांबा, एल्यूमीनियम, नेचुरल हीरे और रत्नों की खरीददारी करता है। इसके अलावा चावल, सोयाबीन, सब्जियां, फल, मछलियां, लोहा, ग्रेनाइट स्टोन और पेट्रोलियम उत्पादों का भी निर्यात करता है। मसाले जैसे खाद्य वस्तुओं की सप्लाई भी भारत चीन से ही करता है।
tradingeconomics के आंकड़े बताते हैं कि भारत से सबसे ज्यादा खरीददारी अमेरिका करता है। अमेरिका ने 469.28 अरब रुपये की खरीददारी इस साल अक्तूबर तक की है। इसके बाद यूएई ने 179.69 अरब रुपये, नीदरलैंड ने 118.23 अरब रुपये और चीन ने 83.21 अरब रुपये की खरीददारी की है। मतलब भारत से एक्सपोर्ट के मामले में चीन चौथे नंबर पर है।
भारत से चीन कई तरह के रॉ मैटेरियल, कॉटन, तांबा, एल्यूमीनियम, नेचुरल हीरे और रत्नों की खरीददारी करता है। इसके अलावा चावल, सोयाबीन, सब्जियां, फल, मछलियां, लोहा, ग्रेनाइट स्टोन और पेट्रोलियम उत्पादों का भी निर्यात करता है। मसाले जैसे खाद्य वस्तुओं की सप्लाई भी भारत चीन से ही करता है।
tradingeconomics के आंकड़े बताते हैं कि भारत से सबसे ज्यादा खरीददारी अमेरिका करता है। अमेरिका ने 469.28 अरब रुपये की खरीददारी इस साल अक्तूबर तक की है। इसके बाद यूएई ने 179.69 अरब रुपये, नीदरलैंड ने 118.23 अरब रुपये और चीन ने 83.21 अरब रुपये की खरीददारी की है। मतलब भारत से एक्सपोर्ट के मामले में चीन चौथे नंबर पर है।
क्या व्यापारिक रिश्ते खत्म करने से चीन को सबक सिखा पाएगा भारत?
इसे समझने के लिए हमने अर्थशास्त्री प्रो. प्रहलाद से बात की। उन्होंने कहा, 'आंकड़ों को देखें तो चीन सबसे ज्यादा अमेरिका को सामान बेचता है। दोनों देशों के बीच कुल 586.9 अरब डॉलर का व्यापार है। इसमें अमेरिका 451.7 अरब डॉलर का उत्पाद आयात करता है, जबकि 135.2 अरब डॉलर का निर्यात। चीन से व्यापार के मामले में भारत 14वें नंबर पर है। चीन का सबसे ज्यादा व्यापार यूरोपियन यूनियन, अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, हॉन्गकॉन्ग, ताइवान, वियतनाम, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, ब्राजील, रूस, थाईलैंड, सिंगापुर से होता है। इसके बाद भारत का नंबर आता है। मतलब साफ है कि चीन से व्यापारिक रिश्तों को खत्म करने मौजूदा स्थिति में नुकसान भारत को ही उठाना पड़ सकता है।'
उन्होंने कहा, चीन से अगर पूरी तरह से आयात खत्म कर दिया जाएगा तो फार्मा सेक्टर को बहुत नुकसान पहुंचेगा। इसके अलावा कई चीजें महंगी हो जाएंगी। जिसका सीधा असर आम लोगों की जेबों पर पड़ेगा। इसलिए तत्काल प्रभाव से चीन से सारे रिश्ते तोड़ना संभव नहीं है। हां, आत्मनिर्भर भारत के लिए सरकार को अपनी कोशिशों में और अधिक तेजी लानी चाहिए। खासतौर पर उन चीजों के उत्पादन पर फोकस करना चाहिए, जिन्हें अभी सबसे ज्यादा चीन से आयात करना पड़ता है।
इसे समझने के लिए हमने अर्थशास्त्री प्रो. प्रहलाद से बात की। उन्होंने कहा, 'आंकड़ों को देखें तो चीन सबसे ज्यादा अमेरिका को सामान बेचता है। दोनों देशों के बीच कुल 586.9 अरब डॉलर का व्यापार है। इसमें अमेरिका 451.7 अरब डॉलर का उत्पाद आयात करता है, जबकि 135.2 अरब डॉलर का निर्यात। चीन से व्यापार के मामले में भारत 14वें नंबर पर है। चीन का सबसे ज्यादा व्यापार यूरोपियन यूनियन, अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, हॉन्गकॉन्ग, ताइवान, वियतनाम, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, ब्राजील, रूस, थाईलैंड, सिंगापुर से होता है। इसके बाद भारत का नंबर आता है। मतलब साफ है कि चीन से व्यापारिक रिश्तों को खत्म करने मौजूदा स्थिति में नुकसान भारत को ही उठाना पड़ सकता है।'
उन्होंने कहा, चीन से अगर पूरी तरह से आयात खत्म कर दिया जाएगा तो फार्मा सेक्टर को बहुत नुकसान पहुंचेगा। इसके अलावा कई चीजें महंगी हो जाएंगी। जिसका सीधा असर आम लोगों की जेबों पर पड़ेगा। इसलिए तत्काल प्रभाव से चीन से सारे रिश्ते तोड़ना संभव नहीं है। हां, आत्मनिर्भर भारत के लिए सरकार को अपनी कोशिशों में और अधिक तेजी लानी चाहिए। खासतौर पर उन चीजों के उत्पादन पर फोकस करना चाहिए, जिन्हें अभी सबसे ज्यादा चीन से आयात करना पड़ता है।
ये भी जानें
- चीन पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार देश का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मजबूत बनाने में जुटी है। सरकार ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीमों की भी शुरुआत की है।
- केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, भारत में विदेशी कंपनियों के तौर पर 174 चीनी कंपनियां रजिस्टर्ड हैं और 3560 कंपनियों में निदेशक यानी डायरेक्टर चीनी हैं।