{"_id":"63593328d9392713fb71214b","slug":"india-china-border-row-jaishankar-told-to-chinese-ambassador-peace-and-peace-on-border-is-necessary","type":"story","status":"publish","title_hn":"India China Border Row: चीनी राजदूत से जयशंकर की दो टूक, बोले- सीमा पर अमन और शांति जरूरी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
India China Border Row: चीनी राजदूत से जयशंकर की दो टूक, बोले- सीमा पर अमन और शांति जरूरी
Wed, 26 Oct 2022 06:46 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 26 Oct 2022 06:46 PM IST
सार
विडोंग का भारत में तीन साल से अधिक समय का कार्यकाल रहा। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा मुद्दों को लेकर 29 महीने से अधिक समय से गतिरोध चल रहा है। जून 2020 में गलवान घाटी में संघर्ष के बाद से दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हैं।
विज्ञापन
चीनी राजदूत सुन विडोंग और विदेश मंत्री एस. जयशंकर
- फोटो : ट्विटर/ डॉ. एस. जयशंकर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत में चीन के राजदूत सुन विडोंग ने बुधवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। यह एक विदाई भेंट थी। इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अमन और शांति जरूरी है। यह भारत तथा चीन के बीच सामान्य संबंधों के लिए अनिवार्य है। जयशंकर ने मुलाकात की तस्वीर के साथ ट्वीट में कहा कि चीन के राजदूत सुन विडोंग से विदाई भेंट हुई।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि इस बात पर जोर दिया कि भारत-चीन संबंधों का विकास तीन साझा बिंदुओं पर टिका है। सीमावर्ती क्षेत्रों में अमन और शांति जरूरी हैं। भारत-चीन के बीच संबंधों का सामान्य होना दोनों देशों, एशिया और दुनिया के लिए फायदेमंद है।
विज्ञापन
दरअसल, चीन के राजदूत सुन विडोंग का भारत में तीन साल से अधिक समय का कार्यकाल रहा। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा मुद्दों को लेकर 29 महीने से अधिक समय से गतिरोध चल रहा है। जून 2020 में गलवां घाटी में संघर्ष के बाद से दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हैं।
विज्ञापन
इससे पहले चीन के राजदूत सुन विडोंग ने मंगलवार को अपने विदाई समारोह में कहा था कि पड़ोसी होने के नाते चीन और भारत के बीच कुछ मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन विकास के लिए साझा आधार तलाशने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
इस दौरान उन्होंने भारतीयों के लिए चीन की वीजा पॉलिसी पर भी चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि चीन ने भारतीय नागरिकों के लिए चीन की यात्रा के लिए वीजा आवेदन प्रक्रिया को अनुकूलित कर दिया था।
इस दौरान भारत में चीनी राजदूत सुन वेइदॉन्ग ने रवींद्रनाथ टैगोर का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि प्रसिद्ध भारतीय कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा है कि हम पूर्वी न तो पश्चिम के दिमाग और न ही पश्चिम के स्वभाव को उधार ले सकते हैं। हमें जन्म लेने के अपने अधिकार की खोज करने की जरूरत है। मैं उनसे पूरी तरह सहमत हूं।