India-China: 'सीमा पर गश्त समझौता का स्वागत', पूर्व विदेश सचिव श्रृंगला बोले- LAC पर तनाव कम होने की संभावना
भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर 2020 से पहले की तरह गश्त शुरू करने पर सहमत हो गए हैं। दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर चली कवायद के बाद एलएसी पर गश्त और सैन्य तनाव घटाने पर सहमति बनी है।
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भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में 52 महीनों से चल रहा सीमा तनाव सुलझ गया है। दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर चली कवायद के बाद एलएसी पर गश्त और सैन्य तनाव घटाने पर सहमति बनी है। दोनों देशों के बीच हुए समझौते को लेकर विशेषज्ञों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला का कहना है कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर गश्त व्यवस्था के समझौते से दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की संभावना है।
मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीनी सेना की कार्रवाई के कारण गतिरोध पैदा होने के समय विदेश सचिव रहे श्रृंगला ने बताया कि बातचीत में मजबूती से संतोषजनक निष्कर्ष निकला है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि समझौता हमें आगे बढ़ने का एक रास्ता देता है। यह याद किया जाएगा कि जब शत्रुता शुरू हुई थी, तब चीन ने सैनिकों को इकट्ठा किया था और वे सैनिक अभी भी वहां हैं। इसलिए मुझे लगता है कि विघटन के बाद, हमें तनाव कम करने पर विचार करना चाहिए।'
#WATCH | On India-China reaching agreement on border patrolling along LAC, Former Indian Ambassador to China, Gautam Bambawale says "...If this implies that the status quo ante has been restored as it existed before the Chinese undertook the military action in eastern Ladakh in… pic.twitter.com/Lq7dlqs5U0
— ANI (@ANI) October 21, 2024
पूर्व भारतीय राजदूत बंबवाले ने कहा है कि यह समझौता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आया है, जो कुछ दिनों में रूस के कजान में होगा। उनका मानना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि चीन भारत-चीन संबंधों को पहले जैसा बनाना चाहता है, खासकर व्यापार, वाणिज्य और निवेश जैसे क्षेत्रों में। हालांकि, दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करने में समय लगेगा, लेकिन यह शुरुआत अच्छी हो सकती है और शायद कजान में प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शीर्ष स्तर की बैठक हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारत-चीन सीमा विवाद में कमी आने की उम्मीद है, जिससे ब्रिक्स समूह को मजबूती मिलेगी।
#WATCH | On India-China reaching agreement on border patrolling along LAC, Former Indian Ambassador to China, Gautam Bambawale says "The agreement has come just before the BRICS summit takes place in the next few days in Kazan in Russia. I think what this implies is that the… pic.twitter.com/xIbGmDvwzJ
— ANI (@ANI) October 21, 2024
#WATCH | On India-China reaching agreement on border patrolling along LAC, Former Indian Ambassador to China, Gautam Bambawale says "On this question of the recent agreement on patrolling along the LAC, especially in eastern Ladakh, I do not think the Russians must have had a… pic.twitter.com/CO96cIthu7
— ANI (@ANI) October 21, 2024
पूर्व राजनयिक केपी फैबियन का मानना है कि यह समझौता बहुत महत्वपूर्ण है, जिसमें दोनों देशों ने एलएसी पर सामान्य गश्त और अलगाव पर सहमति व्यक्त की है। विदेश सचिव का कहना है कि हम अब उस समस्या के समाधान पर विचार कर रहे हैं जो 2020 में उत्पन्न हुई थी। फैबियन ने यह भी कहा कि कुछ साल पहले, प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा से पहले, दोनों देशों के बीच मुद्दों का समाधान हो गया था, लेकिन चीन ने उस समझौते को लागू नहीं किया। उस समझौते में दो चरण थे, जिसमें पहले चरण में भारत को पीछे हटना था, उसके बाद चीन को पीछे हटना था। पहला चरण पूरा हुआ, लेकिन चीन दूसरे चरण में पीछे नहीं हटा और इसके बजाय बहुत सारी चीजें बना दीं। इसलिए, यह कदम स्वागत योग्य है। फैबियन ने यह भी कहा कि हमें 'विश्वास करो, लेकिन सत्यापित करो' की नीति अपनानी चाहिए। उनका मानना है कि चीन पश्चिमी देशों से बढ़ते दबाव के कारण इस समझौते की ओर बढ़ा है। यह समझौता भारत-चीन संबंधों में एक नए दौर की शुरुआत कर सकता है, लेकिन इसके लिए दोनों देशों को एक दूसरे पर भरोसा करना होगा और समझौते को लागू करना होगा।
#WATCH | Delhi | On India-China reaching agreement on border patrolling along LAC, former Diplomat KP Fabian says, "It's a very important statement which says that India and China have come to an agreement about normal patrolling and that there will be disengagement. The Foreign… pic.twitter.com/wGQPGGebIG
— ANI (@ANI) October 21, 2024