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अमेरिकी यात्रा पर एनएसजी के लिए सदस्यों पर प्रभाव बनाएंगे मोदी

Fri, 03 Jun 2016 02:38 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 03 Jun 2016 02:38 PM IST
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India applies for NSG membership silently
यूएस टूर पर यूएस से बात करेंगे पीएम - फोटो : Getty

भारत ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यानि एनएसजी की सदस्यता हासिल करने के लिए चुपचाप आवेदन कर दिया है। भारत ने ये कवायद प्रधानमंत्री की 4 जून से शुरू हो रही अमेरिका यात्रा ये पूर्व की है।

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भारत ने ये आवेदन 12 मई को किया है जोकि पाकिस्तान के अपना पक्ष रखने से ठी‌क एक हफ्ते पूर्व है। अब इस आवेदन पर फैसला 9-10 जून को विएना में होने वाली बैठक में लिया जाएगा। नाम न बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ राजनयिक ने ईटी को  बताया कि प्रधानमंत्री मोदी एनएसजी की सदस्यता हा‌सिल करने के लिए खुद व्यापक कदम उठा रहे हैं।
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वह सभी 48 सदस्य देशों के राजनेताओं से फोन के माध्यम से संपर्क कर भारत के पक्ष में फैसला लेने के लिए आग्रह कर रहे हैं। सरकार के इस आवेदन ने पिछले सात सालों से जारी एनएसजी की सदस्यता के लिए जंग को और तेज कर दिया है, जब एक सदस्य देश चीन, भारत के बजाय पाकिस्तान के‌ पक्ष में बात कर रहा हो। 

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परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए है सदस्यताः यूएस

India applies for NSG membership silently
अमेरिका-इंडिया

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की हाल ही में हुई चीन यात्रा को एनएसजी की सदस्यता के ‌लिए भारत के प्रति चीन के रुख को बदलाव लाने के तौर पर देखा जा रहा है हालांकि चीन ने अपना रुख तो साफ नहीं किया, लेकिन ये जरूर कहा कि दोनों देशों के अधिकारी वार्ता जारी रखेंगे।

चीन तब भी भारत के खिलाफ था जब एनएसजी ने भारत-अमेरिका के बीच परमाणु करार को मंजूरी दे दी थी। अब अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान पीएम मोदी खुद सबसे बड़ा राजनीतिक दांव खेलेंगे ताकि सभी सदस्य देशों को वाशिंगटन की ओर से संदेश पहुंचाया जा सके और इसका असर 9-10 जून को होने वाली बैठक पर दिखे। इस बैठक के बाद 24 जून को सियोल में होने वाली प्लेनरी में इस एजेंदे को रखा जाना है।

गौरतलब है कि अमेरिका ने 48 सदस्यीय एनएसजी में भारत को सदस्यता देने की सिफारिश की है। अमेरिकी सिफारिश के बावजूद भारतीय सदस्यता का पाक विरोध कर रहा है। इससे अमेरिका पाक से नाराज हो गया और जमकर फटकार लगाई।

पाकिस्तान ने एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध करते हुए कहा था कि इससे दक्षिण एशिया में परमाणु हथियारों की एक रेस शुरू हो जाएगी। हालांकि अमेरिका का कहना है कि भारत को सदस्यता ‘सदस्यता हथियारों की रेस में शामिल होने और परमाणु हथियारों के निर्माण के लिए नहीं है। यह परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के लिए है।

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