भारत-पाक: असाइनमेंट वीजा के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच हुआ समझौता, राजनयिक संबंधों को बनाए रखने में मिलेगी मदद
2019 में जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटने के बाद भारत और पाकिस्तान ने एक दूसरे के लिए असाइनमेंट वीजा जारी करना लगभग बंद कर दिया था। दो सालों से तनाव की एक अहम वजह रहे असाइनमेंट वीजा के मुद्दे को जल्द सुलझाने के लिए दोनों देशों ने एक समझौता किया है।
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भारत और पाकिस्तान के बीच हालात हमेशा से नाजुक रहे हैं। स्थितियां तब ज्यादा बिगड़ गईं, जब भारत सरकार ने अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटा दिया। इसके बाद दोनों देशों ने उच्चायोग में अपने कर्मचारियों की संख्या आधी कर दी। असल में पाकिस्तान द्वारा अपने उच्चायुक्त को वापस बुलाने के बाद भारत ने भी अपने राजदूत को वापस बुला लिया। दोनों देशों के बीच 2 सालों से तनाव की एक अहम वजह रहे असाइनमेंट वीजा के मुद्दे को जल्द सुलझाने के लिए भारत और पाकिस्तान ने एक समझौता किया है। समझौते के मुताबिक 16 जून को दोनों देशों की तरफ से राजनयिकों और अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों के लिए लंबित असाइनमेंट वीजा को मंजूरी दे दी जाएगी।
दोनों देशों के अधिकारियों को हो रही थी दिक्कत
आपको बता दें कि पाकिस्तान पिछले कुछ समय से भारत के अधिकारियों और कर्मचारियों को वीजा देने में आनाकानी करता आ रहा है। अपवादों को छोड़कर पाकिस्तान ने पिछले 2 सालों से भारतीय अधिकारियों के लिए कोई वीजा जारी नहीं किया है। इसके जबाब में भारत ने भी 25 मई को इस्लामाबाद स्थित अपने उच्चायोग में तैनात कुछ कर्मचारियों को वापस बुला लिया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के साथ ही पाकिस्तान के भी कई राजनयिकों और कर्मचारियों को असाइनमेंट वीजा का इंतजार है। आधिकारिक वीजा की मंजूरी से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
क्या होता है असाइनमेंट वीजा?
राजनयिकों और विदेशी सरकारी अधिकारियों के लिए जो विशेष वीजा जारी किया जाता है, उसे असाइनमेंट वीजा कहा जाता है। अधिकारी और कर्मचारी समय पर एक देश से दूसरे देश आ जा सकें, इसके लिए असाइनमेंट वीजा की मंजूरी जरूरी है। भारत के प्रयासों के बाद भी पाकिस्तान की तरफ से इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया, जबकि असाइनमेंट वीजा को जारी करने में थोड़ा सा ही समय लगता है।