'पाक सेना भी अच्छे भारत-पाक रिश्ते चाहती है'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुधवार को दिल्ली में भारत-पाकिस्तान के विदेश सचिवों की मुलाकात एक अच्छी पहल है। इसके बाद भी अगर रुकी हुई समग्र द्विपक्षीय वार्ता बहाल नहीं होती तो, यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा। भारत-पाकिस्तान के पास बातचीत के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। दोनों देश इस स्थिति में नहीं हैं कि वो एक दूसरे के अस्तित्व को नकार सकें। जब भारत-पाकिस्तान बातचीत के संदर्भ में पाकिस्तानी सेना की बात होती है तो मैं ये स्पष्ट करना चाहता हूँ कि हमने अपने दौर में जितनी प्रगति की, वह सेना और आईएसआई की सहमति के बिना हो नहीं सकती थी।
मेरा मानना है कि राष्ट्रीय हित की जो परिभाषा है, उसमें केवल सैन्य क्षमता ही नहीं है। पाकिस्तान की सेना यह बात अच्छे से समझती है कि राष्ट्रीय हित के लिए मज़बूत अर्थव्यवस्था, आर्थिक विकास और राजनीतिक स्थिरता भी ज़रूरी है। अगर आपको लगता है कि पाकिस्तान की सेना भारत के साथ बातचीत को सामान्य नहीं होने देगी तो मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूं।
पाकिस्तान की सेना का इसको लेकर दृष्टिकोण यह है कि भारत के साथ बातचीत बराबरी के स्तर पर होनी चाहिए। पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नसीर ख़ान जंजुआ क्वेटा में पाकिस्तान की सेना के एक प्रमुख कोर कमांडर थे जो यकीनन सेनाध्यक्ष जनरल राहील शरीफ़ के क़रीब होंगे। दोनों मुल्कों में अभी ऐसे हालात नहीं हैं कि रिश्ते बेहतर न हो सकें। नवाज़ शरीफ़ और नरेंद्र मोदी यह बात समझते हैं कि दोनों मुल्कों को वार्ता की मेज पर आना ही पड़ेगा। यह एक अच्छी बात है। लेकिन दोनों मुल्कों में ऐसी ताक़तें भी हैं जो इसे रोकती हैं।
(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से हुई बातचीत पर आधारित)