फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   India and China border tension: Both countries hope to increase peace and harmony from the 14th round of senior military commander level talks

भारत-चीन सीमा तनाव: दोनों देशों को 14वें दौर की वरिष्ठ सैन्य कमांडर स्तरीय वार्ता से शांति और सौहार्द बढ़ने की उम्मीदें

Fri, 19 Nov 2021 12:49 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Fri, 19 Nov 2021 12:49 PM IST
सार

लद्दाख क्षेत्र में भारत ने पिछले साल से ही 50 हजार से अधिक सैनिकों की तैनाती कर रखी है। यह सेना किसी भी युद्ध या युद्ध जैसे हालात से निपटने में सक्षम है। इसमें अग्रिम मोर्चे के सैन्य बेड़े से लेकर इंफैंट्री, आर्टिलरी, मॉडर्न वारफेयर प्रणाली समेत सबकुछ की मुकम्मल तैनाती है। इसके सामनांतर चीन ने भी अपने सैनिकों का भारी जमावड़ा कर रखा है...

विज्ञापन
India and China border tension: Both countries hope to increase peace and harmony from the 14th round of senior military commander level talks
भारत और चीन की सेना - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

भारत चाहता है कि लद्दाख क्षेत्र में चीन की सेना पुराने स्थान पर चली जाए। सैन्य तैनाती घटाई जाए, लेकिन इस सवाल पर चीन के राजनयिकों के गले से आश्वासन देने की आवाज अटक जाती है। हालांकि दोनों देशों के राजनयिकों ने एक बार फिर 14वें दौर की वरिष्ठ सैन्य कमांडर स्तरीय वार्ता पर सहमति जताई है। दोनों देशों के राजनयिकों, भारत के एडिशनल सेक्रेटरी (पूर्वी एशिया) नवीन श्रीवास्तव और उनके चीन के समकक्ष हांग लियांग, के बीच सीमा मामलों के परामर्श और सहयोग कार्यसमूह की बैठक में यह सहमति बनी है। समझा जा रहा है कि जल्द ही दोनों देशों के राजनयिक 14वें दौर की वार्ता की तारीख की भी घोषणा करेंगे।

विज्ञापन

दुशांबे में तीन बिंदुओं पर बनी थी सहमति

इस बैठक में दोनों देशों के सीमा विवाद से जुड़े सैन्य, रक्षा और विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल होते हैं। चीन के दूतावास द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार राजनयिकों की वार्ता में दुशांबे में विदेश मंत्रियों (एस जयशंकर और उनके समकक्ष वांग यी) के बीच में बनी सहमति के आधार पर सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। हालांकि अभी इस वार्ता को लेकर भारत की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ताजिकिस्तान के दुशांबे शहर में भारत और चीन के विदेश मंत्री मिले थे। इस भेंट के दौरान दोनों विदेश मंत्रियों में भारत-चीन के द्विपक्षीय मुद्दे, सीमा विवाद समेत तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इसमें दोनों के बीच में तीन बिंदुओं पर सहमति बनी।

विज्ञापन
  • पहली, दोनों देशों को मौजूदा सीमा विवाद का हल खोजना चाहिए।
  • दूसरी, दोनों पक्ष तय प्रोटोकाल का पालन करेंगे और कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाएंगे कि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़े।
  • तीसरी, लद्दाख में उत्पन्न हुई मौजूदा स्थिति को लंबा खींचना किसी के हित में नहीं है। इसका असर दोनों देशों के रिश्ते और हित को प्रभावित कर रहा है।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन

बॉर्डर पर सैन्य तैनाती में कमी करे चीन

बैठक के दौरान दोनों देशों के राजनयिकों ने दुशांबे में बनी सहमति को जारी रखने और उसका पालन करने पर सहमति जताई। इस दौरान सैन्य बलों के पीछे हटने और सैन्य तैनाती में कमी आने के बाद के प्रभावों पर भी चर्चा हुई। दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि वह सीमा पर शांति बनाए रखेंगे और एक दूसरे को भड़काने वाली कार्रवाई से बचने का प्रयास करेंगे और ऐसा नहीं होने देंगे। अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण बात भारत के हित की है। भारत चाहता है कि चीन अपनी सैन्य तैनाती में न केवल बड़े पैमाने पर कमी करे, बल्कि विवाद वाले क्षेत्रों से अपने सैनिकों को अप्रैल 2020 से पहले वाले तैनाती स्थल पर ले जाए।


इस महत्वपूर्ण सवाल और इससे जुड़े तमाम संवेदनशील मुद्दों का जवाब अगले दौर की वरिष्ठ सैन्य कमांडर स्तरीय वार्ता में तय होगा। इस तरह से दोनों देशों के राजनयिकों ने 14वें दौर की वार्ता जल्द बुलाने पर सहमति जताई है। अब तक इस मामले में 23वें दौर की राजनयिक स्तरीय वार्ता और 13वें दौर की वरिष्ठ सैन्य कमांडर स्तरीय वार्ता हो चुकी है।

भयानक ठंड में भी तैनात हैं दोनों देशों की सेनाएं

लद्दाख क्षेत्र में भारत ने पिछले साल से ही 50 हजार से अधिक सैनिकों की तैनाती कर रखी है। यह सेना किसी भी युद्ध या युद्ध जैसे हालात से निपटने में सक्षम है। इसमें अग्रिम मोर्चे के सैन्य बेड़े से लेकर इंफैंट्री, आर्टिलरी, मॉडर्न वारफेयर प्रणाली समेत सबकुछ की मुकम्मल तैनाती है। इसके सामनांतर चीन ने भी अपने सैनिकों का भारी जमावड़ा कर रखा है। पिछले साल दोनों देशों की सेनाओं ने हाड़ में घुसने वाली भयानक ठंड का दौर सहा। इस बार भी बर्फीली हवाओं, भयानक ठंड को झेल रही हैं। सैन्य मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि लद्दाख क्षेत्र का तापमान -40 डिग्री के भी नीचे चला जाता है और हम इस कठिन हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

कब तक रहेगी तैनाती, पता नहीं

दोनों देशों की आमने-सामने की यह सैन्य तैनाती कब तक रहेगी? बड़ा ही गूढ़ सवाल है। विदेश और रक्षा मंत्रालय के पास इसका कोई जवाब नहीं है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कार्यालय के सूत्र भी अब कोई टाइमलाइन की संभावना नहीं जता पा रहे हैं, क्योंकि यह चीन के रुख पर निर्भर करेगा। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी का कहना है कि संभवतया अब लद्दाख से लेकर अरुणाचल के तवांग और क्या पता आने वाले समय में उत्तराखंड के बाराहोती तक सैन्य तैनाती के लिए तैयार रहना पड़े। क्योंकि चीन की चुपचाप होने वाली हरकतें और उसके मंसूबे इसी तरह का संकेत दे रहे हैं। लद्दाख क्षेत्र में इस तरह की सैन्य तैनाती स्थायी रूप में भी करनी पड़ सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed