{"_id":"65628b12c903a3f6d00faf55","slug":"increase-in-the-number-of-vegetarians-across-the-world-including-us-2023-11-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Vegetarian: US समेत दुनिया भर में शाकाहारियों की संख्या में इजाफा, मांसाहरी भोजन से पर्यावरण-स्वास्थ्य को हानि","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Vegetarian: US समेत दुनिया भर में शाकाहारियों की संख्या में इजाफा, मांसाहरी भोजन से पर्यावरण-स्वास्थ्य को हानि
Sun, 26 Nov 2023 05:32 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Sun, 26 Nov 2023 05:32 AM IST
सार
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, इसमें पाई जाने वाली संतृप्त वसा की मात्रा अधिक होती है। यह वसा मानव स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है। प्रमुख शोधकर्ता रोज ने कहा कि हम सभी शोधकर्ता इस बात से आश्चर्यचकित थे कि मवेशियों के मांस की इतनी अधिक खपत के लिए कुछ प्रतिशत लोग ही जिम्मेदार हैं।
विज्ञापन
veg Foood
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एक तरफ जहां केवल 12 फीसदी अमेरिकी (50 से 65 आयु के) ही देश में हर दिन खाए जाने वाले कुल बीफ का आधा हिस्सा खा जाते हैं, वहीं अमेरिका सहित दुनियाभर के देशों के युवाओं का रुझान शाकाहार की ओर बढ़ रहा है। यह बात एक अध्ययन में सामने आई है। ये अच्छे संकेत हैं, क्योंकि बीफ और मांसाहार पर्यावरण के साथ सेहत के लिए भी नुकसानदेह है।
जर्नल न्यूट्रिएंट्स में प्रकाशित अध्ययन में सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के राष्ट्रीय स्वास्थ्य और पोषण परीक्षा सर्वेक्षण के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसके अंतर्गत 24 घंटे के दौरान 10 हजार से अधिक वयस्कों के आहार पर नजर रखी गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि नवीनतम आहार दिशानिर्देशों के अनुसार हर दिन यह मात्रा चार औंस होनी चाहिए। हर दिन 2,200 कैलोरी का सेवन करने का मतलब, मांस, मुर्गी और अंडे का एक साथ सेवन करना है। 29 वर्ष से कम और 66 वर्ष से अधिक आयु वालों के बड़ी मात्रा में बीफ खाने की संभावना कम थी। इससे पता चलता है कि युवा पीढ़ी और बुजुर्ग जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में अधिक रुचि ले रहे हैं।
पर्यावरण को भी खतरा
अध्ययन के मुतािबक, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के लिए बीफ उद्योग सबसे अधिक जिम्मेदार है। यह चिकन की तुलना में आठ से 10 गुना अधिक उत्सर्जन करता है और बीन्स की तुलना में 50 गुना अधिक उत्सर्जन करता है। दुनियाभर की खाद्य प्रणाली हर साल 17 अरब टन ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करती है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं मांसाहार
अध्ययनकर्ताओं ने पर्यावरण पर इसके असर को देखते हुए मवेशियों के मांस पर गौर किया। इसमें पाई जाने वाली संतृप्त वसा की मात्रा अधिक होती है। यह वसा मानव स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है। प्रमुख शोधकर्ता रोज ने कहा कि हम सभी शोधकर्ता इस बात से आश्चर्यचकित थे कि मवेशियों के मांस की इतनी अधिक खपत के लिए कुछ प्रतिशत लोग ही जिम्मेदार हैं।
चीन चिंता का विषय पर वहां भी बदलाव
शोधकर्ताओं के अनुसार, नाना प्रकार के जानवरों का मांस खाने के लिए चीन कुख्यात रहा है, लेकिन गोमांस, सूअर का मांस, भेड़-बकरी और मुर्गी पालन के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार लगातार मांस के प्रति सतर्क हो रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने के कारण चीनी युवा शाकाहारी भोजन अपना रहे हैं। इस वजह से दुनिया की दूसरी सबसे अधिक आबादी वाले देश में शाकाहारी रेस्तरां तेजी से बढ़ रहे हैं। सिर्फ शंघाई में जहां 2012 में 49 शाकाहारी रेस्टोरेंट थे वे 2021 में बढ़कर 150 से अधिक हो गए।
विज्ञापन
जर्नल न्यूट्रिएंट्स में प्रकाशित अध्ययन में सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के राष्ट्रीय स्वास्थ्य और पोषण परीक्षा सर्वेक्षण के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसके अंतर्गत 24 घंटे के दौरान 10 हजार से अधिक वयस्कों के आहार पर नजर रखी गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि नवीनतम आहार दिशानिर्देशों के अनुसार हर दिन यह मात्रा चार औंस होनी चाहिए। हर दिन 2,200 कैलोरी का सेवन करने का मतलब, मांस, मुर्गी और अंडे का एक साथ सेवन करना है। 29 वर्ष से कम और 66 वर्ष से अधिक आयु वालों के बड़ी मात्रा में बीफ खाने की संभावना कम थी। इससे पता चलता है कि युवा पीढ़ी और बुजुर्ग जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में अधिक रुचि ले रहे हैं।
विज्ञापन
पर्यावरण को भी खतरा
अध्ययन के मुतािबक, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के लिए बीफ उद्योग सबसे अधिक जिम्मेदार है। यह चिकन की तुलना में आठ से 10 गुना अधिक उत्सर्जन करता है और बीन्स की तुलना में 50 गुना अधिक उत्सर्जन करता है। दुनियाभर की खाद्य प्रणाली हर साल 17 अरब टन ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करती है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं मांसाहार
अध्ययनकर्ताओं ने पर्यावरण पर इसके असर को देखते हुए मवेशियों के मांस पर गौर किया। इसमें पाई जाने वाली संतृप्त वसा की मात्रा अधिक होती है। यह वसा मानव स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है। प्रमुख शोधकर्ता रोज ने कहा कि हम सभी शोधकर्ता इस बात से आश्चर्यचकित थे कि मवेशियों के मांस की इतनी अधिक खपत के लिए कुछ प्रतिशत लोग ही जिम्मेदार हैं।
चीन चिंता का विषय पर वहां भी बदलाव
शोधकर्ताओं के अनुसार, नाना प्रकार के जानवरों का मांस खाने के लिए चीन कुख्यात रहा है, लेकिन गोमांस, सूअर का मांस, भेड़-बकरी और मुर्गी पालन के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार लगातार मांस के प्रति सतर्क हो रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने के कारण चीनी युवा शाकाहारी भोजन अपना रहे हैं। इस वजह से दुनिया की दूसरी सबसे अधिक आबादी वाले देश में शाकाहारी रेस्तरां तेजी से बढ़ रहे हैं। सिर्फ शंघाई में जहां 2012 में 49 शाकाहारी रेस्टोरेंट थे वे 2021 में बढ़कर 150 से अधिक हो गए।