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सर्वदलीय बैठक में बोलीं सोनिया- राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्षी दलों को मिलकर लड़ना होगा

Fri, 02 Feb 2018 01:26 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 02 Feb 2018 01:26 AM IST
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 INC convened party meeting included these veteran politicians after budget 2018
कांग्रेस मीटिंग

आम बजट पेश होने के बाद कांग्रेस ने दिल्ली के संसद भवन लाइब्रेरी में सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने की। इसके अलावा बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व कई अन्य दिग्गज नेता शामिल हुए। 

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इस दौरान सोनिया गांधी ने कहा कि राज्य के मुद्दों को अलग रखकर सभी मुख्य राष्ट्रीय मुद्दों पर एक सोच बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यों में हमारे मतभेद हो सकते हैं लेकिन राष्ट्र के मुद्दों पर कोई मतभेद नहीं होना चाहिए। उन राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्षी दलों को मिलकर संघर्ष करना चाहिए। देश में जो नफरत फैल रही है, विचाराधारा के नाम पर वह बहुत बड़ा खतरा है, उससे हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है। जो हिंसा हो रही है जो दंगे हो रहे हैं जाति और धर्म के नाम उनसे सतर्क रहना है।संवैधानिक संस्थाओं को undermine किया जा रहा है सरकार की दखलअंदाजी हो रही है, यह चिंता का विषय है।
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यूपीए ने ‘आधार’ को सरकारी लाभ को जनता के पास सीधे पहुंचाने के लिए शुरू किया था, लेकिन सरकार उस ‘आधार’ को लोगों की प्राइवेट लाइफ और प्राइवेसी में दख़ल देने के लिए इस्तेमाल करने में ज़्यादा रुचि दिखा रही है। 
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देश की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। बेरोजगारी भयंकर समस्या बन गई है और देश के लिए, नौजवानों के लिए चिंता का विषय है।सरकार ने चार साल पहले जो रोजगार देने का वादा किया था, उस पर सरकार ने अब बिलकुल चुप्पी साध ली है।सरकार अब 2 करोड़ प्रति वर्ष नौकरियां पैदा करने की बात भूल गई है। सरकार नए नए वायदे कर रही है लेकिन पुराने भूल रही है। 

आज इस्तेमाल की चीज़ें, खाने पीने की चीज़ें... खास तौर पर पेट्रोल-डीजल और गैस की क़ीमतें बहुत बढ़ गई है, सरकार इन्हें कम करने में बिलकुल अफल रही है जिसके चलते लोगों को बहुत तक़लीफ का सामना करना पड़ रहा है।इन सभी मुद्दों पर, चाहे वो दलितोंके मुद्दे  हों, किसान के मुद्दों पर, युवाओं के मुद्दों पर, पिछड़ों के मुद्दे हों, महिलाओं के मुद्दे हों, बेरोज़गारी के मुद्दे हो इन सभी राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर सदन के अन्दर और बाहर दोनों जगह आम सहमति बनानी होगी।

आज़ाद ने बताया कि एक ग्रुप बनाया गया है, वो पहले बनाया गया था जिसमें सात दल है। उसकी मीटिंग पहले हुई हैं। वो कमिटी इन मुद्दों पर और राष्ट्रीय मुद्दों पर coordination करेगी, अन्दर और बाहर कार्यक्रम होंगे, कमेटी मिला करेगी और सभी दलों से सम्पर्क करके कार्यक्रम बनाया करेगी। सभी विपक्षी दलों के नेताओं और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी अपने भाषणों में इन्हीं सभी मुद्दों पर चर्चा की। किसी नेता ने एक मुद्दे पर चर्चा की तो किसी ने दुसरे मुद्दों पर चर्चा की।

 राहुल गांधी ने कहा कि राज्यों में, ज़ाहिर है हर पोलिटिकल पार्टी राज्यों में है। कोई सरकार में है तो कोई विपक्ष में है, तो आपस का टकराव तो रहता ही है। लेकिन उन मुद्दों को आपसी सहमति से हम सुलझाएंगे, लेकिन राष्ट्रीय मुद्दों पर हमें आम सहमति बनाने की ज़रूरत है। उन्होंने इस विषय पर विशेष रूप से बल दिया।

राजस्थान में कांग्रेस को मिली जीत के लिए सभी दलों ने सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को बधाई दी और कहा कि अच्छी शुरुआत हुई है और इसके लॉजिकल कन्क्लूजन देखने के लिए सब इच्छुक हैं।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में की जैसे कमिटी का गठन हुआ है और वो आगे भी मिलती रहेगी, क्या हम माने की आप यूपीए 3 की तरफ बढ़ रहे हैं, के उत्तर में श्री आज़ाद ने कहा कि मैं ये तो नहीं कहूंगा कि यूपीए तीन। जैसे मैंने पहले कहा कि यूपीए तीन का एक कॉमन मिनिमम प्रोगाम होता है। यहांअलग-अलग पार्टी हैं, जैसा गांधी ने शुरू में ही कहा, राहुल जी ने भी उसी पर बल दिया बाक़ी नेताओं ने भी कहा कि ठिक है कि राज्यों में अलग-अलग....टकराव है एक नंबर वन की पार्टी है और दूसरी नम्बर दो की पार्टी है। 

एक सत्ता में है और दूसरी सत्ता की क्यु में खड़ी है।वह तो स्वाभाविक है कि टकराव होगा।कोई भी पार्टी अपनी पार्टी को बंद करके, नहीं कहेगा की जो सत्ता में है वही चलेगा। ऐसा तो लोकतंत्र में होता नहीं है। लेकिन राज्यों के मुद्दे जब आएंगे तब हम स्टेट टु स्टेट उनका समाधान करेंगे। 

लेकिन जहां तक विपक्ष एज अ होल है, जो आज की जो सरकार है, जो एनडीए में हैं वो तो NDA में है ही, लेकिन जो NDA में नहीं है, तो इसका मतलब कि वो एनडीए की विचारधारा को नहीं मानते हैं। उन जो NDA कि विचारधारा को नहीं मानते हैं तो ज़ाहिर है, वो चाहेंगे कि एनडीए की सरकार बाहर जाए को उसके लिए जो कुछ भी ज़रूरी करने की आवश्यकता होगी, उस चीज़ की वो हमें इकट्ठे मिल जुल कर करना चाहिए।

वहीं दूसरी ओर भाजपा ने भी संसदीय पार्टी मीटिंग बुलाई है। जिसमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह व अन्य नेता शामिल हो रहे हैं। 

राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति चुनाव के बाद यह पहला मौका है जब 17 विपक्षी दलों के नेता एक साथ जुटे हैं। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने सभी विपक्षी नेताओं को आमंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई है।

इस बैठक में एनसीपी, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, सपा, नेशनल कांफ्रेंस, माकपा, भाकपा, राजद, झामुमो, आरएसपी, आईयूएमएल, केरल कांग्रेस के नेता शामिल हुए हैं। जदयू के बागी नेता शरद यादव और अली अनवर अंसारी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, सपा के रामगोपाल यादव, तृणमूल के सुदीप बंदोपाध्याय सरीखे नेता भी शामिल हुए हैं। 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी नहीं हुईं शामिल

 INC convened party meeting included these veteran politicians after budget 2018
भाजपा मीटिंग
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी पहले ही बता चुकी हैं कि वह कई अन्य व्यस्तताओं के कारण बैठक में हिस्सा नहीं ले रही हैं। विपक्षी दल सरकार को घेरने के लिए राष्ट्रपति अभिभाषण और बजट पर चर्चा के दौरान एकजुटता का प्रदर्शन करेंगे।

सरकार की ओर से लगातार मिल रही लोकसभा चुनाव की आहट को देखते हुए विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं। भाजपा विरोधी शक्तियों को एक मंच पर लाकर अपनी जमीन तैयार करने और आपसी तालमेल बढ़ाने पर भी चर्चा हो रही है। 
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