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कहीं भिगोकर तो कहीं तरसाकर अलविदा कह गया मानसून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Thu, 04 Oct 2018 03:54 AM IST
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आखिरकार उत्तर प्रदेश से दो अक्तूबर को दक्षिण पश्चिम मानसून की विदाई हो गई। इस बार प्रदेश में बारिश का वितरण काफी असामान्य रहा जिसने मौसम वैज्ञानिकों को भी हैरान कर डाला। इस सीजन में उत्तर प्रदेश में सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश हुई। उत्तराखंड में कई स्थानों पर भारी बारिश के चलते तबाही हुई लेकिन यहां बारिश सामान्य से तीन फीसदी कम रही। इस वक्त मानसून बिहार और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सक्रिय है, जहां लगभग 10 दिनों में इसकी विदाई के आसार हैं। इसके समानांतर देश के दक्षिणी हिस्सों में उत्तर पूर्व सक्रिय होने के आसार हैं जो तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे प्रदेशों में बारिश के लिए जिम्मेदार है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार दो अक्तूबर को मानसून की पूरे उत्तर प्रदेश से विदाई हो गई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से तो यह 29 सितंबर को ही विदा हो गया था। इस बार यह तकरीबन एक पखवाड़े ज्यादा सक्रिय रहा। शुरुआती दौर में मानसून की रफ्तार सुस्त रही लेकिन अगस्त के आखिरी हफ्ते में इसने रफ्तार पकड़ी। कई मौसम प्रखंडों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। कई प्रखंड मानसूनी सीजन खत्म होने के बाद भी तरसते रहे।
हैरानी वाली बारिश, मुरादाबाद में ज्यादा तो गाजियाबाद में आधा
इस बार बारिश के असामान्य वितरण से मौसम वैज्ञानिक भी हैरान हैं। नोएडा दिल्ली में सामान्य बारिश हुई तो पड़ोसी जिले गाजियाबाद में सूखा रहा। यहां सामान्य से लगभग आधी ही बारिश हुई। मुरादाबाद और बिजनौर में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई तो रामपुर और अमरोहा सूखा रहा। शुरुआती दौर में काफी दिनों बारिश नहीं हुई लेकिन अंतिम दौर में बादल जमकर बरसे।
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कम बारिश वाले प्रदेश
-उत्तर प्रदेश सामान्य से 10 फीसदी
-हरियाणा सामान्य से 10 फीसदी
-उत्तराखंड सामान्य से 3 फीसदी
-दिल्ली सामान्य से 1 फीसदी
(स्रोत : आईएमडी)
ज्यादा बारिश वाले प्रदेश
-चंडीगढ़ (केंद्र शासित) 18 फीसदी
-जम्मू-कश्मीर 12 फीसदी
-हिमाचल 11 फीसदी
-पंजाब 7 फीसदी
(स्रोत : आईएमडी)
बारिश का असामान्य वितरण हैरान करने वाला है। ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के चलते कहीं कम तो कहीं ज्यादा बारिश हुई है। केरल में अत्यधिक और समुद्र के बीच स्थित लक्षद्वीप में कम बारिश ने सभी को चौंकाया है। मौसम का बदलता मिजाज और उसकी तीव्रता शुभ लक्षण नहीं है।
डा एके श्रीवास्तव, अध्यक्ष, मौसम मानीटरिंग एवं एनालिसिस समूह
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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार दो अक्तूबर को मानसून की पूरे उत्तर प्रदेश से विदाई हो गई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से तो यह 29 सितंबर को ही विदा हो गया था। इस बार यह तकरीबन एक पखवाड़े ज्यादा सक्रिय रहा। शुरुआती दौर में मानसून की रफ्तार सुस्त रही लेकिन अगस्त के आखिरी हफ्ते में इसने रफ्तार पकड़ी। कई मौसम प्रखंडों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। कई प्रखंड मानसूनी सीजन खत्म होने के बाद भी तरसते रहे।
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हैरानी वाली बारिश, मुरादाबाद में ज्यादा तो गाजियाबाद में आधा
इस बार बारिश के असामान्य वितरण से मौसम वैज्ञानिक भी हैरान हैं। नोएडा दिल्ली में सामान्य बारिश हुई तो पड़ोसी जिले गाजियाबाद में सूखा रहा। यहां सामान्य से लगभग आधी ही बारिश हुई। मुरादाबाद और बिजनौर में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई तो रामपुर और अमरोहा सूखा रहा। शुरुआती दौर में काफी दिनों बारिश नहीं हुई लेकिन अंतिम दौर में बादल जमकर बरसे।
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कम बारिश वाले प्रदेश
-उत्तर प्रदेश सामान्य से 10 फीसदी
-हरियाणा सामान्य से 10 फीसदी
-उत्तराखंड सामान्य से 3 फीसदी
-दिल्ली सामान्य से 1 फीसदी
(स्रोत : आईएमडी)
ज्यादा बारिश वाले प्रदेश
-चंडीगढ़ (केंद्र शासित) 18 फीसदी
-जम्मू-कश्मीर 12 फीसदी
-हिमाचल 11 फीसदी
-पंजाब 7 फीसदी
(स्रोत : आईएमडी)
बारिश का असामान्य वितरण हैरान करने वाला है। ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के चलते कहीं कम तो कहीं ज्यादा बारिश हुई है। केरल में अत्यधिक और समुद्र के बीच स्थित लक्षद्वीप में कम बारिश ने सभी को चौंकाया है। मौसम का बदलता मिजाज और उसकी तीव्रता शुभ लक्षण नहीं है।
डा एके श्रीवास्तव, अध्यक्ष, मौसम मानीटरिंग एवं एनालिसिस समूह