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आर्ट गैलरी: ‘शिव, शक्ति और विश्वास’ पर केंद्रित अद्भुत मूर्तिशिल्प

Tue, 08 Mar 2022 07:16 PM IST
Atul sinha अतुल सिन्हा
Updated Tue, 08 Mar 2022 07:16 PM IST
सार

निवेदिता कहती हैं, ‘आज मैं जो कुछ भी हूं अपने पिता की बदौलत हूं। बरसों से चाहती थी कि उनको अपने कामों का ये ‘सोलो शो’ समर्पित करूं। अफसोस कि आज वो ये देखने के लिए नहीं हैं। ‘शिव, शक्ति और विश्वास’ इस प्रदर्शनी की थीम है। इस काम में बरसों की मेहनत लगी है। हर आकृति या शिल्प का कोई न कोई भाव है और हरेक के भीतर की अपनी कथा है...

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In the main hall of Triveni Art Gallery, you will find all the forms of Shiva in about eighty sculptures
निवेदिता मिश्रा आर्ट - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अपने पिता की विरासत और उनकी कला दृष्टि को एक ऊंचाई तक पहुंचाने की बरसों से कोशिश में लगी निवेदिता मिश्रा के लिए इस बार का महिला दिवस बेहद खास है। दिल्ली के त्रिवेणी आर्ट गैलरी में आप हर तरफ निवेदिता मिश्रा के बेहतरीन स्कल्पचर और मूर्तिकला को देख और महसूस कर सकते हैं। महिला दिवस यानी आठ मार्च से शुरू हुई निवेदिता की इस प्रदर्शनी का नाम है ‘नित्य’। नित्य यानी नियमित। ओडिसा के बोलंगीर से ताल्लुक रखने वाली निवेदिता के पिता नित्यानंद मिश्रा नौ साल तक 1980 से 89 तक कांग्रेस के सांसद रहे और पिछले साल जुलाई में 92 साल की उम्र में सबको अलविदा कह गए। अपनी बेटी को उन्होंने एक कलाकार बनाया, दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स से लेकर लंदन के स्लेड स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स तक भेजा।

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निवेदिता कहती हैं, ‘आज मैं जो कुछ भी हूं अपने पिता की बदौलत हूं। बरसों से चाहती थी कि उनको अपने कामों का ये ‘सोलो शो’ समर्पित करूं। अफसोस कि आज वो ये देखने के लिए नहीं हैं। ‘शिव, शक्ति और विश्वास’ इस प्रदर्शनी की थीम है। इस काम में बरसों की मेहनत लगी है। हर आकृति या शिल्प का कोई न कोई भाव है और हरेक के भीतर की अपनी कथा है।

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In the main hall of Triveni Art Gallery, you will find all the forms of Shiva in about eighty sculptures
निवेदिता मिश्रा आर्ट - फोटो : Amar Ujala

त्रिवेणी आर्ट गैलरी के मुख्य हॉल में लगी करीब अस्सी मूर्ति शिल्पों में आपको शिव के तमाम रूप मिलेंगे। निवेदिता बताती हैं कि उन्हें बचपन से शिव का रुद्र तांडव बहुत प्रभावित करता रहा है और खासकर सती की वो कथाएं जो हमारे पौराणिक धर्मग्रंथों और शिव के तांडव के मूल में हैं। दक्षपुत्री सती शिव की पत्नी थीं और अपने पिता द्वारा शिव के अपमान से नाराज़ होकर वह हवन कुंड में कूद पड़ी थीं। तब शिव ने गुस्से में सती का शरीर लेकर ऐसा तांडव किया कि पृथ्वी कांप उठी। शिव के गुस्से को रोकने के लिए विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के अंगों के 51 टुकड़े कर दिए जो पृथ्वी के अलग अलग हिस्सों में जा गिरे। वही 51 शक्तिपीठों की आज मान्यता है।

निवेदिता मिश्रा ने शिव की तमाम भंगिमाओं के साथ साथ उन तमाम अंगों की कल्पना को अपने शिल्प में जीवंत करने की कोशिश की है। वह कहती हैं कि हाथ, पैर, उंगलियां, नाक, कान, होंठ से लेकर सुदर्शन चक्र और त्रिशूल तक को उस दौर के संदर्भों और भावों के साथ उतारना बेशक एक काफी मुश्किल काम रहा है। लेकिन आज यह काम आपके सामने है।

In the main hall of Triveni Art Gallery, you will find all the forms of Shiva in about eighty sculptures
निवेदिता मिश्रा आर्ट - फोटो : Amar Ujala

निवेदिता इस काम में सहयोग के लिए अपने समकालीन मूर्ति शिल्पी और पेंटर अद्वैत गणनायक को श्रेय देना नहीं भूलतीं जो उनके पति भी हैं और नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के महानिदेशक भी। आम तौर पर किसी कलाकार की प्रदर्शनी में इतनी हस्तियां नहीं आती, जितनी निवेदिता के इस सोलो शो में दिखाई पड़ीं। दिल्ली का ज्यादातर छोटा बड़ा कलाकार इस प्रदर्शनी के उद्घाटन के वक्त मौजूद था और निवेदिता मिश्रा के इस यादगार काम को करीब से देखने समझने की कोशिश कर रहा था।

सती के अलावा प्रदर्शनी का एक हिस्सा कामाख्या देवी के तमाम रूपों और नारी शक्ति को भी समर्पित है। काले मार्बल और ग्रेनाइट पत्थरों से तराशे गए देवी के रूपों को भी आप यहां देख सकते हैं। गैलरी में प्रवेश करते ही उसके बाहरी कैंपस में आपको निवेदिता मिश्रा की बनाई नवग्रह के तमाम रूपों की विशाल संरचनाएं भी देखने को मिलेंगी। निवेदिता ने तमाम धातुओं और पत्थरों पर उकेरी गईं तमाम कलात्मक संरचनाओं को अपने अलग अलग थीम के साथ इससे पहले मुंबई, चंडीगढ़, भुवनेश्वर, दिल्ली के अलावा लंदन में भी प्रदर्शित कर चुकी हैं। लेकिन लंबे समय के बाद उनकी यह सोलो प्रदर्शनी कलाप्रेमी 23 मार्च तक दिल्ली में देख सकते हैं।

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