{"_id":"688760801038cc34f6098cb7","slug":"in-plane-crash-a-mother-first-saved-her-son-from-the-fire-then-gave-her-skin-to-the-burnt-son-2025-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां तुझे सलाम: विमान हादसे में आठ महीने के अपने बेटे को पहले आग से बचाया, फिर झुलसे लाडले को दी अपनी त्वचा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
मां तुझे सलाम: विमान हादसे में आठ महीने के अपने बेटे को पहले आग से बचाया, फिर झुलसे लाडले को दी अपनी त्वचा
Mon, 28 Jul 2025 05:05 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: बशु जैन
Updated Mon, 28 Jul 2025 05:05 PM IST
सार
12 जून को एअर इंडिया का विमान मेडिकल कॉलेज की छत पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। मेडिकल कॉलेज की इमारत में मनीषा कछाड़िया और उनका बेटा ध्यानांश अपने क्वार्टर में थे। विमान गिरने के बाद लगी आग में ध्यानांश 36 प्रतिशत तक जल गया था। जबकि उसकी मां 25 प्रतिशत तक जल गई थी। बच्चे के इलाज के लिए उसकी मां ने अपनी त्वचा का प्रत्यारोपण कराया।
विज्ञापन
एअर इंडिया विमान हादसा
- फोटो : ANI
विस्तार
मां अपने बच्चों की ढाल बनकर हर मुसीबत का मुकाबला कर सकती है। कुछ ऐसा ही अहमदाबाद विमान हादसे के बाद हुआ। 12 जून को हुए विमान हादसे में झुलसे अपने आठ महीने के मासूम को एक मां ने अपनी त्वचा दे दी। हादसे का शिकार हुए सबसे कम उम्र आठ महीने के बच्चे ध्यानांश को उसकी मां ने विमान में लगी आग से भी बचाया।
12 जून को एअर इंडिया का विमान मेडिकल कॉलेज की छत पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। मेडिकल कॉलेज की इमारत में मनीषा कछाड़िया और उनका बेटा ध्यानांश अपने क्वार्टर में थे। विमान गिरने के बाद लगी आग में ध्यानांश 36 प्रतिशत तक जल गया था। जबकि उसकी मां 25 प्रतिशत तक जल गई थी। बच्चे के इलाज के लिए उसकी मां ने अपनी त्वचा का प्रत्यारोपण कराया। बेटे को उन्होंने अपनी त्वचा दी और इससे उसके घावों को भरने में मदद मिली।
डॉक्टरों ने बताया कि पांच सप्ताह के गहन उपचार और आग के कारण झुलसी त्वचा की प्लास्टिक सर्जरी के बाद शिशु और उसकी मां को निजी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। केडी अस्पताल के कंसल्टेंट प्लास्टिक सर्जन डॉ. रुत्विज पारिख ने बताया कि बच्चे की त्वचा के साथ-साथ उसकी मां की त्वचा का उपयोग उसके थर्ड डिग्री बर्न घावों के उपचार के लिए किया गया।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: संसद में उठा भारत-पाकिस्तान मैच का मुद्दा; शिवसेना सांसद बोले- हमें उनके साथ नहीं खेलना चाहिए
बेटे को लेकर इमारत से भागी थी मां
आठ माह के मासूम ध्यानांश के पिता कपिल कछाड़िया बीजे मेडिकल कॉलेज में यूरोलॉजी में सुपर-स्पेशलिटी एमसीएच डिग्री कोर्स कर रहे हैं। दुर्घटना के समय वह अस्पताल में थे जबकि उनकी पत्नी और बेटा अपने क्वार्टर में थे। कपिल कछाड़िया ने बताया कि दुर्घटना और उसके बाद लगी आग इतनी भयावह थी कि फ्लैट के अंदर होने के बावजूद गर्मी के कारण मनीषा और ध्यानांश झुलस गए। हादसे के बाद मनीषा को चोटें आईं, लेकिन वह बेटे को उठाकर इमारत से बाहर भागी और वे दोनों बच गए।
36 फीसदी जल गया था बच्चा
डॉ. पार्थ देसाई ने बताया कि सिविल अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को केडी अस्पताल ले जाया गया। मनीषा के हाथ चेहरे और पैरों पर 25 जगह जलन हुई, जबकि शिशु का चेहरा और शरीर के अन्य अंग 36 प्रतिशत तक जल गए। मां और बेटे दोनों के घाव गहरे थे। हमें उन घावों को ठीक करने के लिए त्वचा प्रत्यारोपण प्रक्रिया करनी पड़ी।
ऐसे किया गया प्रत्यारोपण
प्लास्टिक सर्जन डॉ. रुत्विज पारिख ने कहा कि त्वचा प्रत्यारोपण प्रक्रिया में हम त्वचा की एक पतली परत लेते हैं और उसे घाव पर लगाकर उसे ढक देते हैं। जिस जगह से त्वचा ली जाती है वह समय के साथ ठीक हो जाती है और नई त्वचा उसे ढक लेती है। सबसे पहले मनीषा के घावों को ठीक करने के लिए उसकी त्वचा को प्रत्यारोपित किया गया। इसके बाद ध्यानांश की त्वचा भी उसके जलने के घावों को ढकने के लिए ली गई।
ये भी पढ़ें: 'देश को ऑपरेशन तंदूर चाहिए था, सिंदूर नहीं'; लोकसभा में सपा सांसद राजभर का बयान
डॉक्टर ने कहा कि ध्यानांश के घावों को ढकने के लिए हमें ज्यादा त्वचा की जरूरत थी क्योंकि बच्चों के शरीर पर ज्यादा त्वचा नहीं होती। इसलिए हमने उसके घावों को ढकने के लिए मनीषा और उसकी त्वचा दोनों का इस्तेमाल किया। आमतौर पर ऐसे मामलों में मां की त्वचा को प्राथमिकता दी जाती है। दोनों ठीक हो गए और पांच सप्ताह के गहन उपचार के बाद एक सप्ताह पहले उन्हें छुट्टी दे दी गई।
विज्ञापन
12 जून को एअर इंडिया का विमान मेडिकल कॉलेज की छत पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। मेडिकल कॉलेज की इमारत में मनीषा कछाड़िया और उनका बेटा ध्यानांश अपने क्वार्टर में थे। विमान गिरने के बाद लगी आग में ध्यानांश 36 प्रतिशत तक जल गया था। जबकि उसकी मां 25 प्रतिशत तक जल गई थी। बच्चे के इलाज के लिए उसकी मां ने अपनी त्वचा का प्रत्यारोपण कराया। बेटे को उन्होंने अपनी त्वचा दी और इससे उसके घावों को भरने में मदद मिली।
विज्ञापन
डॉक्टरों ने बताया कि पांच सप्ताह के गहन उपचार और आग के कारण झुलसी त्वचा की प्लास्टिक सर्जरी के बाद शिशु और उसकी मां को निजी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। केडी अस्पताल के कंसल्टेंट प्लास्टिक सर्जन डॉ. रुत्विज पारिख ने बताया कि बच्चे की त्वचा के साथ-साथ उसकी मां की त्वचा का उपयोग उसके थर्ड डिग्री बर्न घावों के उपचार के लिए किया गया।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: संसद में उठा भारत-पाकिस्तान मैच का मुद्दा; शिवसेना सांसद बोले- हमें उनके साथ नहीं खेलना चाहिए
बेटे को लेकर इमारत से भागी थी मां
आठ माह के मासूम ध्यानांश के पिता कपिल कछाड़िया बीजे मेडिकल कॉलेज में यूरोलॉजी में सुपर-स्पेशलिटी एमसीएच डिग्री कोर्स कर रहे हैं। दुर्घटना के समय वह अस्पताल में थे जबकि उनकी पत्नी और बेटा अपने क्वार्टर में थे। कपिल कछाड़िया ने बताया कि दुर्घटना और उसके बाद लगी आग इतनी भयावह थी कि फ्लैट के अंदर होने के बावजूद गर्मी के कारण मनीषा और ध्यानांश झुलस गए। हादसे के बाद मनीषा को चोटें आईं, लेकिन वह बेटे को उठाकर इमारत से बाहर भागी और वे दोनों बच गए।
36 फीसदी जल गया था बच्चा
डॉ. पार्थ देसाई ने बताया कि सिविल अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को केडी अस्पताल ले जाया गया। मनीषा के हाथ चेहरे और पैरों पर 25 जगह जलन हुई, जबकि शिशु का चेहरा और शरीर के अन्य अंग 36 प्रतिशत तक जल गए। मां और बेटे दोनों के घाव गहरे थे। हमें उन घावों को ठीक करने के लिए त्वचा प्रत्यारोपण प्रक्रिया करनी पड़ी।
ऐसे किया गया प्रत्यारोपण
प्लास्टिक सर्जन डॉ. रुत्विज पारिख ने कहा कि त्वचा प्रत्यारोपण प्रक्रिया में हम त्वचा की एक पतली परत लेते हैं और उसे घाव पर लगाकर उसे ढक देते हैं। जिस जगह से त्वचा ली जाती है वह समय के साथ ठीक हो जाती है और नई त्वचा उसे ढक लेती है। सबसे पहले मनीषा के घावों को ठीक करने के लिए उसकी त्वचा को प्रत्यारोपित किया गया। इसके बाद ध्यानांश की त्वचा भी उसके जलने के घावों को ढकने के लिए ली गई।
ये भी पढ़ें: 'देश को ऑपरेशन तंदूर चाहिए था, सिंदूर नहीं'; लोकसभा में सपा सांसद राजभर का बयान
डॉक्टर ने कहा कि ध्यानांश के घावों को ढकने के लिए हमें ज्यादा त्वचा की जरूरत थी क्योंकि बच्चों के शरीर पर ज्यादा त्वचा नहीं होती। इसलिए हमने उसके घावों को ढकने के लिए मनीषा और उसकी त्वचा दोनों का इस्तेमाल किया। आमतौर पर ऐसे मामलों में मां की त्वचा को प्राथमिकता दी जाती है। दोनों ठीक हो गए और पांच सप्ताह के गहन उपचार के बाद एक सप्ताह पहले उन्हें छुट्टी दे दी गई।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन