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Indian Railways: रेलवे ने 2020-21 में तत्काल शुल्क से कमाए 500 करोड़, कोरोना काल में भी हुई जमकर कमाई

Sun, 02 Jan 2022 03:39 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 02 Jan 2022 03:39 PM IST
सार

रेलवे ने यह अतिरिक्त कमाई ऐसे समय की है, जबकि वर्ष के दौरान कोरोना महामारी के चलते अधिकांश वक्त ट्रेनों का संचालन बंद रहा था। एक आरटीआई अर्जी के जवाब में रेलवे ने यह जानकारी दी है। 

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In pandemic-hit 2020-21, Railways earned over Rs 500 cr from Tatkal, premium Tatkal tickets
भारतीय रेलवे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रेलवे ने कोरोना महामारी काल में भी अच्छी कमाई की। उसने कोरोना गस्त वर्ष 2020-21 में तत्काल व प्रीमियम तत्काल टिकटों के शुल्क से ही 500 करोड़ से ज्यादा की कमाई की। इस वर्ष में रेलवे ने तत्काल टिकट शुल्क के रूप में 403 करोड़ रुपये और प्रीमियम तत्काल टिकट से 119 करोड़ रुपये अर्जित किए। इसी दौरान उसने डायनामिक फेयर के रूप में 511 करोड़ रुपये जुटाए।

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रेलवे ने यह अतिरिक्त कमाई ऐसे समय की है जबकि वर्ष के दौरान कोरोना महामारी के चलते अधिकांश वक्त ट्रेनों का संचालन बंद रहा था। एक आरटीआई अर्जी के जवाब में रेलवे ने यह जानकारी दी है। तत्काल व प्रीमियम तत्काल श्रेणियों के यात्री वो होते हैं, जो कि आपात यात्रा के लिए प्रीमियम शुल्क अदा कर ट्रेनों में सफर करते हैं। मध्यप्रदेश के आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौर की आरटीआई अर्जी के जवाब में रेलवे ने बताया कि उसे चालू वित्त वर्ष यानी 2021-2022 में सितंबर तक डायनामिक किराए से 240 करोड़, तत्काल टिकट से 353 करोड़ और प्रीमियम तत्काल टिकट शुल्कों से 89 करोड़ रुपये की आया हो चुकी थी। 
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वित्त वर्ष 2019-20 में, जबकि ट्रेनों के संचालन पर कोई पाबंदी नहीं थी, राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने डायनामिक फेयर के रूप में 1313 करोड़ कमाए थे। वहीं तत्काल टिकटों से 1669 करोड़ और प्रीमियम तत्काल टिकटों से 603 करोड़ रुपये बटोरे थे। 
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संसदीय समिति ने तत्काल शुल्कों को अनुचित बताया था
ये आंकड़े ऐसे वक्त में आए हैं, जबकि संसद की रेलवे संबंधी स्थाई समिति ने तत्काल शुल्कों को कुछ हद तक अनुचित बताया था। समिति ने कहा था कि यह वित्तीय रूप से कमजोर उन लोगों पर बोझ की तरह है, जिन्हें अपने नजदीकी लोगों से मिलने के लिए आपात यात्रा करना पड़ती है, भले ही वह यात्रा बहुत कम दूरी की ही क्यों न हो। प्रीमियम टिकट की व्यवस्था 2014 में चुनिंदा ट्रेनों में शुरू की गई थी। इसमें 50 फीसदी टिकट डायनामिक फेयर के तहत तत्काल कोटा टिकट के रूप में बेचे जाते हैं। 


आम लोगों के लिए मांग के अनुरूप ट्रेनें नहीं
बिहार के रेल यात्री सुजीत राय, जो कि अपने परिजनों से मिलने हर साल जाते हैं, ने बताया कि मुश्किल यह है कि हमारे पास आम लोगों की मांग के अनुरूप पर्याप्त ट्रेनें नहीं हैं। इसलिए जो पैसा खर्च कर सकते हैं, वे प्रीमियम किराया चुका कर टिकट खरीद लेते हैं। कुछ ट्रेनें तो कुछ लोगों की पहुंच से बाहर हैं, क्योंकि ये लोग इतना किराया नहीं चुका सकते। यहां तक की हम यदि एडवांस टिकट बुक कराएं तो भी अधिकांश ट्रेनों में हमारी टिकट वेट लिस्ट में ही आती है। 
 

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