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महबूबा मुफ्ती पर केंद्र और भाजपा ने खत्म की मेहरबानी, छोड़ा पीडीपी का साथ
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 19 Jun 2018 06:18 PM IST
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जम्मू-कश्मीर मामले को लेकर लगातार सक्रिय पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा अभी श्रीनगर पहुंचे ही थे कि भाजपा ने पीडीपी के साथ अपने गठबंधन को खत्म करने की घोषणा कर दी। अमर उजाला से खास बातचीत में यशवंत सिन्हा ने कहा कि यह तो होना ही था। यह बेमेल गठबंधन था।
जितने दिन जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीजीपी सरकार थी, अलग-अलग नीतियां चल रही थी। प्रशासनिक स्तर पर तालमेल का अभाव था। सिन्हा के मुताबिक अब जम्मू-कश्मीर को लेकर जो भी चुनौतियां हैं, उसका सामना केंद्र सरकार खुद करना चाहती है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती वैसे भी भाजपा की मेहरबानी पर थी और भाजपा ने इस मेहरबानी को खत्म कर दिया है।
फिलहाल यशवंत सिन्हा जम्मू-कश्मीर में शांति प्रयासों के लिए देश के नागरिक की हैसियत से लोगों से मिल रहे हैं। प्रयास कर रहे हैं। उनके साथ कुछ और प्रबुद्ध लोग भी इस अभियान में जुड़े हैं। सिन्हा ने कुछ समय पहले भी केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया था।
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सबकुछ लुटा के होश में आए तो
भाजपा-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद सबसे कड़ी प्रतिक्रिया कांग्रेस पार्टी ने दी है। पार्टी के प्रवक्ता ने दो लाइनों के सहारे अपनी पूरी बात कह दी। सुरजेवाला ने अपने ट्वीट में लिखा, 'सबकुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया......खुद ही लगा के आग तमाशाई बन गए।' सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा की सत्ता की भूख ने जम्मू-कश्मीर को आतंक की आग में झोंक दिया। चार वर्षों में 373 जवान शहीद हुए और 239 लोग मारे गए। आखिर देश को हासिल क्या हुआ?
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में पैदा हुए हालात के लिए भाजपा को दोहरा कसूरवार ठहराया। आजाद ने भाजपा-टीडीपी सरकार पर जमकर निशाना साधा। गुलाम नबी ने कहा कि चार साल में ही भाजपा ने जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद को चरम पर पहुंचा दिया।
इस दौरान वहां सबसे अधिक सेना के जवान शहीद हुए। संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ, बच्चों की पैलट गन से आंखें चली गई, वे जख्मी हुए। इतना ही नहीं जम्मू-कश्मीर का व्यापार, पर्यटन सब तबाह हो गया।
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जितने दिन जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीजीपी सरकार थी, अलग-अलग नीतियां चल रही थी। प्रशासनिक स्तर पर तालमेल का अभाव था। सिन्हा के मुताबिक अब जम्मू-कश्मीर को लेकर जो भी चुनौतियां हैं, उसका सामना केंद्र सरकार खुद करना चाहती है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती वैसे भी भाजपा की मेहरबानी पर थी और भाजपा ने इस मेहरबानी को खत्म कर दिया है।
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फिलहाल यशवंत सिन्हा जम्मू-कश्मीर में शांति प्रयासों के लिए देश के नागरिक की हैसियत से लोगों से मिल रहे हैं। प्रयास कर रहे हैं। उनके साथ कुछ और प्रबुद्ध लोग भी इस अभियान में जुड़े हैं। सिन्हा ने कुछ समय पहले भी केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया था।
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भाजपा-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद सबसे कड़ी प्रतिक्रिया कांग्रेस पार्टी ने दी है। पार्टी के प्रवक्ता ने दो लाइनों के सहारे अपनी पूरी बात कह दी। सुरजेवाला ने अपने ट्वीट में लिखा, 'सबकुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया......खुद ही लगा के आग तमाशाई बन गए।' सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा की सत्ता की भूख ने जम्मू-कश्मीर को आतंक की आग में झोंक दिया। चार वर्षों में 373 जवान शहीद हुए और 239 लोग मारे गए। आखिर देश को हासिल क्या हुआ?
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में पैदा हुए हालात के लिए भाजपा को दोहरा कसूरवार ठहराया। आजाद ने भाजपा-टीडीपी सरकार पर जमकर निशाना साधा। गुलाम नबी ने कहा कि चार साल में ही भाजपा ने जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद को चरम पर पहुंचा दिया।
इस दौरान वहां सबसे अधिक सेना के जवान शहीद हुए। संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ, बच्चों की पैलट गन से आंखें चली गई, वे जख्मी हुए। इतना ही नहीं जम्मू-कश्मीर का व्यापार, पर्यटन सब तबाह हो गया।