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सड़कों पर नजर आएंगी इलेक्ट्रॉनिक कारें, बदल जाएगा सड़क का सूरते हाल
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
Updated Fri, 08 Sep 2017 01:48 PM IST
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2030 तक भारत में इलेक्ट्रॉनिक कारों का दौर होगा। बढ़ते प्रदूषण और लगातार बढ़ते वाहनों की तादाद के बाद अब केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक कारों को लेकर अपना नजरिया साफ कर दिया है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कार निर्माता कंपनियों को साफ-साफ कह दिया है कि पेट्रोल-डीजल की कारों को नहीं वे इलेक्ट्रॉनिक कारों को बढ़ावा दें। क्योंकि पेट्रोल-डीजल की कारों का दौर अब खत्म होने वाला है।
गडकरी ने कार निर्माता कंपनियों को आगाह कर दिया है कि अब देश को वैकल्पिक ईंधन से चलने वाली कारों के निर्माण का रुख कर देना चाहिए। गडकरी ने साफ शब्दों में कहा कि अगर आप नहीं सुधरेंगे तो अब मैं पूछूंगा नहीं बल्कि ऐसे लोगों को उखाड़ फेकूंगा। गडकरी ने आगे कहा कि अगर कार निर्माता कंपनियां सरकार की योजनाओं में सहयोग करेंगी तो सरकार से उन्हें फायदा होगा। इलेक्ट्रिक कारें आने से देश में पॉलूशन के साथ साथ कई चीजों में बदलाव देखने को मिलेगा। घरों की छतों पर बिजली निर्माण कार्य बढ़ेगा।
पढ़ें: पेट्रोल-डीजल की जगह बनाएं इलेक्ट्रिक कारें, वरना चलेगा बुल्डोजर: गडकरी
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गडकरी ने कार निर्माता कंपनियों को आगाह कर दिया है कि अब देश को वैकल्पिक ईंधन से चलने वाली कारों के निर्माण का रुख कर देना चाहिए। गडकरी ने साफ शब्दों में कहा कि अगर आप नहीं सुधरेंगे तो अब मैं पूछूंगा नहीं बल्कि ऐसे लोगों को उखाड़ फेकूंगा। गडकरी ने आगे कहा कि अगर कार निर्माता कंपनियां सरकार की योजनाओं में सहयोग करेंगी तो सरकार से उन्हें फायदा होगा। इलेक्ट्रिक कारें आने से देश में पॉलूशन के साथ साथ कई चीजों में बदलाव देखने को मिलेगा। घरों की छतों पर बिजली निर्माण कार्य बढ़ेगा।
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60,000 करोड़ रुपए की होगी सलाना बचत
नीतीन गडकरी ने पेश किया लेखा जोखा
- फोटो : PTI
डीजल और पेट्रोल कारों के लेकर फैलने वाला प्रदूषण देश को बीमार कर रहा है। दिल्ली से लेकर विभिन्न शहरों में दस सालों से अधिक पुरानी डीजल गाड़ियों पर कोर्ट ने रोक लगा रखी है। लेकिन पॉलुशन का स्तर दिन ब दिन बढ़ रहा है। WHO द्वारा पिछले दिनों आए सबसे प्रदूषित शहरों में 13 शहर अकेले भारत के हैं। भारतीय सड़कों पर कारों की संख्या दिन ब दिन बढ़ रही है।
अगर इलेक्ट्रॉनिक कारों को बढ़ावा मिलता है तो देश में कई तरह के बदलाव देखने को मिलेगा। पॉलुशन का स्तर तेजी से गिरेगा। ग्लोबल वार्मिंग और कार्बन डाइऑक्साईड से सेहत पर असर पड़ेगा। देश में 1.2 मिलियन लोगों की मृत्यू प्रदूषण के कारण होती है, इससे देश का स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सीधा असर पड़ेगा। इलेक्ट्रिक कार के आने से रोजगार के अवसर बढ़ेगें। नई इंडस्ट्री पैदा होगी, बैटरी रिसाइकिल का व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं लोगों की जेब पर इलेक्ट्रिक कार का सीधा असर पड़ेगा। लिथियम बैटरी कम से कम एक बार में तीन से पांच साल तक चलती है। एक दिन में 100 किलोमीटर के लिए 20 से 25 रुपए बैटरी को चार्ज करने में लगेगा। देश में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कार लाने के लिए सरकार को युद्ध स्तर पर पेट्रोल पंपों की तरह बैटरी चार्जिंग प्वाइंट भी बनाना होगा।
एफएएमई इंडिया में नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान के तहत भारत में तेजी से लोग हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कार को जगह दे रहे हैं। अगर 2017-18 में इलेक्ट्रिक कारों का बजट 175 करोड़ का है। जबिक हैवी इंडस्ट्री मिनिस्ट्री को इस कार्यक्रम के लिए 14000 करोड़ की आवश्यकता है। सरकार 2020 से सरकार की योजना 60 से 70 लाख हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों को बाजार में लांच करने की योजना है।
वहीं हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों के सड़क पर दौड़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधे तौर पर 60,000 करोड़ रुपए के ईंधन की बचत होगी। सरकार ने हाइब्रिड गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार एफएएमई मोटरबाइक पर 29000 रुपए और कार पर 1.38 लाख की छूट देने की बात भी कही है।
बताते चलें कि दुनिया में इलेक्ट्रॉनिक कारों का इतिहास सौ साल पुराना है। बैटरी की क्षमता भी कम हुआ करती थी लेकिन बदलती तकनीक के बाद बैटरी की क्षमता बढ़ी है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर एक भ्रम है कि इन कारों की स्पीड काफी कम होती है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहन अभी भी पेट्रोल-डीजल के वाहनों से महंगे हैं। उनकी रिसाइकिल वैल्यू भी नही है।
अगर इलेक्ट्रॉनिक कारों को बढ़ावा मिलता है तो देश में कई तरह के बदलाव देखने को मिलेगा। पॉलुशन का स्तर तेजी से गिरेगा। ग्लोबल वार्मिंग और कार्बन डाइऑक्साईड से सेहत पर असर पड़ेगा। देश में 1.2 मिलियन लोगों की मृत्यू प्रदूषण के कारण होती है, इससे देश का स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सीधा असर पड़ेगा। इलेक्ट्रिक कार के आने से रोजगार के अवसर बढ़ेगें। नई इंडस्ट्री पैदा होगी, बैटरी रिसाइकिल का व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं लोगों की जेब पर इलेक्ट्रिक कार का सीधा असर पड़ेगा। लिथियम बैटरी कम से कम एक बार में तीन से पांच साल तक चलती है। एक दिन में 100 किलोमीटर के लिए 20 से 25 रुपए बैटरी को चार्ज करने में लगेगा। देश में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कार लाने के लिए सरकार को युद्ध स्तर पर पेट्रोल पंपों की तरह बैटरी चार्जिंग प्वाइंट भी बनाना होगा।
एफएएमई इंडिया में नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान के तहत भारत में तेजी से लोग हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कार को जगह दे रहे हैं। अगर 2017-18 में इलेक्ट्रिक कारों का बजट 175 करोड़ का है। जबिक हैवी इंडस्ट्री मिनिस्ट्री को इस कार्यक्रम के लिए 14000 करोड़ की आवश्यकता है। सरकार 2020 से सरकार की योजना 60 से 70 लाख हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों को बाजार में लांच करने की योजना है।
वहीं हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों के सड़क पर दौड़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधे तौर पर 60,000 करोड़ रुपए के ईंधन की बचत होगी। सरकार ने हाइब्रिड गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार एफएएमई मोटरबाइक पर 29000 रुपए और कार पर 1.38 लाख की छूट देने की बात भी कही है।
बताते चलें कि दुनिया में इलेक्ट्रॉनिक कारों का इतिहास सौ साल पुराना है। बैटरी की क्षमता भी कम हुआ करती थी लेकिन बदलती तकनीक के बाद बैटरी की क्षमता बढ़ी है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर एक भ्रम है कि इन कारों की स्पीड काफी कम होती है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहन अभी भी पेट्रोल-डीजल के वाहनों से महंगे हैं। उनकी रिसाइकिल वैल्यू भी नही है।