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हिमाचल चुनावः अर्की के लिए यूं ही नहीं छोड़ दी 'राजा' वीरभद्र ने अपनी सीट

Sun, 05 Nov 2017 03:42 AM IST
amarujala.com- Written by: हरेन्द्र सिंह मोरल
amarujala.com- Written by: हरेन्द्र सिंह मोरल Updated Sun, 05 Nov 2017 03:42 AM IST
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In Himachal election Virbhadra Singh left his seat for arki

हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों के दौरे के दूसरे दिन हम निकले सोलन जिले की अर्की विधानसभा सीट का जायजा लेने। शिमला-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ने वाली अर्की सीट अचानक सुर्खियों में आ गई है और इसकी वजह है खुद सूबे के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का यहां से चुनाव लड़ना।

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अभी तक शिमला ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ते रहे वीरभद्र ने पुरानी सीट बेटे विक्रमादित्य के लिए छोड़ दी थी, जिसके बाद उन्होंने रुख किया अर्की की ओर। यहां से मौजूदा विधायक हैं भाजपा के गोबिंद राम शर्मा, जो दो बार से लगातार जीतते आ रहे हैं।
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यूं तो 50 साल की राजनीति में मुख्यमंत्री वीरभद्र कोई चुनाव नहीं हारे हैं, राज्‍य की जनता में उनकी पहचान आज भी एक लोकप्रिय चेहरे के रूप में है ऐसे चेहरे के, जो 83 की उम्र में भी इस पहाड़ी राज्य में अकेले दम कांग्रेस को अपने कंधे से खींच रहा है। ऐसे में वो जिस सीट से भी चाहते चुनाव लड़ सकते थे और उन्हें हराना भी आसान न होता। 

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लेकिन वीरभद्र ने जानबूझकर शिमला से 41 किलोमीटर दूर ‌स्थित अर्की सीट को चुना। जानकार मान रहे हैं उसकी बड़ी वजह ये भी है कि शिमला में तो उनका प्रभाव है ही भाजपा के प्रभाव वाले सोलन में भी कांग्रेस को मजबूत किया जा सके।

बहरहाल, अर्की के दौरे के दौरान एक बात उभरकर सामने आई कि वीरभद्र ने अचानक इस सीट को अपने लिए नहीं चुना। वह दो साल से इसकी तैयारी कर रहे थे।

अर्की की जनता को तोहफे में मिला 100 बेड का सरकारी अस्पताल

In Himachal election Virbhadra Singh left his seat for arki

स्‍थानीय निवासी राजेश शर्मा बताते हैं कि "राजा साहब ने पिछले दो सालों में यहां बहुत काम कराया है। यहां सड़कों का जाल बिछाया, बिजली पानी की समस्या को काफी हद तक दूर किया।" इस छोटे से कस्बे में सरकारी बस स्टैंड, तहसील, कचहरी सहित कई स्कूल कालेज भी हैं।

अर्की के लोगों को सबसे बड़ी सौगात मिली 100 बेड के सरकारी अस्पताल के रूप में। पहली नजर में यह सरकारी अस्पताल किसी बड़े प्राइवेट अस्पताल से भी भव्य नजर आता है। चार मंजिला इस सामुदायिक अस्पताल में ओपीडी, अत्याधुनिक इमरजेंसी, लिफ्ट से लेकर वो तमाम सुविधाएं हैं जो किसी नामी अस्पताल में होती हैं।

खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मई महीने में इसका उद्घाटन किया था। स्‍थानीय लोगों की मानें तो अर्की के विकास कार्यों में मुख्यमंत्री खुद निजी स्तर पर रुचि लेते रहे हैं। दिहाड़ी मजदूरी करने वाले संजय और सुनील से जब चुनाव के माहौल को लेकर बातचीत की गई तो वो भी इसकी तस्दीक करते नजर आए। बोले- यहां जो काम हो रहा है वो वीरभद्र सिंह की वजह से ही है, स्‍थानीय भाजपा विधायक ने यहां कोई काम नहीं किया। 

लोग उनकी शक्ल चुनावों के समय पर ही देखते हैं। हालांकि स्‍थानीय लोगों की नाराजगी को देखते हुए भाजपा ने इस बार उनका टिकट काटकर रतन पाल सिंह को दे दिया है। रतन पाल स्‍थानीय लोगों के लिए नया नाम है, कुछ लोगों ने बताया कि उनका सोलन और चंडीगढ़ में आढ़त का बड़ा काम है। युवा हैं इसलिए पार्टी ने मौजूदा विधायक को किनारे कर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की दावेदारी के बावजूद भी अर्की में चुनाव को लेकर कोई खास उत्साह नजर नहीं आता। 

कस्बे के मुख्य बाजार में चुनाव के अंतिम दौर में भी पूरी तरह शांति छाई हुई है, दुकानों-मकानों से भाजपा और कांग्रेस के पोस्टर बैनर भी नदारद हैं। काफी कुरदेने के बाद ही लोग चुनाव पर बात करने को राजी होते हैं, इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि वह इस बार खामोशी से अपने वोट का इस्तेमाल करना चाहते हैं। 

कारगिल में शहीद कैप्टन विजयंत थापर से है अर्की की पहचान

In Himachal election Virbhadra Singh left his seat for arki

अर्की की एक पहचान कारगिल में शहीद हुए कैप्टन विजयंत थापर को लेकर भी है। वीर चक्र विजेता विजयंत थापर का जन्म अर्की के ही मुख्य बाजार स्थित मोहल्ले में हुआ था। पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में उनकी बहादुरी के किस्से खूब प्रसिद्ध हुए। अस्पताल के निकट ही उनका स्मारक भी बना हुआ है, जिसका उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने किया था।

लेकिन इस स्मारक को देखकर लगता है जैसे सालों से किसी ने इसकी सुध ही नहीं ली। यहां से हम वापस मुख्य बाजार की तरफ लौटे तो फिर स्‍थानीय लोगों से बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। मे‌डिकल स्टोर चलाने वाले बुजुर्ग भूपेन्द्र सिंह कंवर अपनी दुकान पर फुर्सत से बैठे हैं।

चुनावों के बारे में पूछा तो बताया कि अब तक यहां लोग भाजपा को समर्थन करते रहे हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं है, वीरभद्र को लेकर लोगों में उत्साह है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे मुद्दों पर उनकी राय जाननी चाही तो लगा जैसे दुखती रग पर हाथ रख दिया। 

अचानक तल्‍ख होते हुए बोले, "मत पूछो साहब दुकानदारी पूरी तरह चौपट है। नोटबंदी में सबसे ज्यादा मार तो हम छोटे दुकानदारों पर ही पड़ी, रही सही कसर अब जीएसटी ने पूरी कर दी।" उदाहरण देते हुए बोले, "दुकान में हजार तरह की दवाइयां हैं, अब कैसे उन्हें कंप्यूटर में फीड करूं। 62 साल की उम्र में मैं तो खुद कंप्यूटर सीखूंगा नहीं, किसी को पैसे देकर काम कराता हूं तो आधी कमाई उसमें चली जाएगी।" "सारी कमाई रोककर 50 हजार रुपये का कंप्यूटर खरीदना पड़ा लेकिन अब उसे चलाऊं कैसे।" 

बस स्टैंड स्थित एक संस्‍थान में कंप्यूटर का कोर्स कर रहे बीएससी के छात्र तरुण ठाकुर बताते हैं ‌‌कि उनकी वोट पहली बार बनी है। तो किसे डालेंगे- इस सवाल पर मुस्कुरा कर चुप हो गए। उनसे जब चुनावी माहौल को लेकर पूछा गया तो बोले, "भाजपा यहां शुरू से मजबूत रही है लेकिन इस बार हालात अलग हैं। सब राजा साहब (वीरभद्र) की बात कर रहे हैं।" 

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