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आजमगढ़: संचार माध्यमों पर प्रतिबंध ने दिलाई आपातकाल की याद
कौशल किशोर, ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Tue, 17 May 2016 05:22 AM IST
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- फोटो : कौशल किशोर, ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
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बवाल को रोकने में असफल प्रशासन फसादियों को भले गिरफ्तार न कर पाया हो, संचार माध्यमों पर प्रतिबंध लगाकर उसने अफवाहों को और बल दे दिया। शाम के बाद से जिले में लोगों में इस बात चर्चा रही कि क्या मामला हो गया, जो प्रशासन ने इंटरनेट सेवा बंद कर दी। प्रशासन की इस कार्रवाई ने लोगों को आपातकाल की याद दिला दी।
विगत तीन दिनों से जनपद के निजामाबाद थाना क्षेत्र के खुदादादपुर और उसके आसपास के इलाकों में हुई आगजनी और मारपीट की घटनाओं पर काबू पाने में असफल प्रशासन ने सोमवार को इंटरनेट माध्यमों को बंद करा दिया।
प्रशासन का तर्क है कि ऐसा उसने अफवाहों को रोकने के लिए किया है। पर जिले में रोक की सूचना का उलटा असर हुआ है। लोग चर्चा कर रहे हैं कि ऐसा क्या हुआ कि जिला प्रशासन ने तीन दिनों के लिए इंटरनेट सेवा पूरे जनपद में बंद कर दी। इंटरनेट बंद होने से एटीएम भी बंद हो गए, जिससे जरूरी काम से पैसा निकालने गए लोगों को खासी दिक्कत हुई।
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विगत तीन दिनों से जनपद के निजामाबाद थाना क्षेत्र के खुदादादपुर और उसके आसपास के इलाकों में हुई आगजनी और मारपीट की घटनाओं पर काबू पाने में असफल प्रशासन ने सोमवार को इंटरनेट माध्यमों को बंद करा दिया।
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प्रशासन का तर्क है कि ऐसा उसने अफवाहों को रोकने के लिए किया है। पर जिले में रोक की सूचना का उलटा असर हुआ है। लोग चर्चा कर रहे हैं कि ऐसा क्या हुआ कि जिला प्रशासन ने तीन दिनों के लिए इंटरनेट सेवा पूरे जनपद में बंद कर दी। इंटरनेट बंद होने से एटीएम भी बंद हो गए, जिससे जरूरी काम से पैसा निकालने गए लोगों को खासी दिक्कत हुई।
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प्रशासन के इस कदम से पत्रकार भी परेशान रहे। उन्हें मुख्यालय पर खबर भेजने के लिए पास-पड़ोस के जिलों में जाना पड़ा। स्थानीय लोगों की मानें तो पुलिस सक्रिय रही होती तो लगातार दो दिनों तक घटनाएं नहीं होतीं।
14 मई की रात मुसाफिर के घर पर तोड़फोड़ आगजनी और एक समुदाय के लोगों की मड़इयां जलाए जाने के बाद भी सख्ती की जाती तो फसाद न बढ़ पाता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
न केवल 14 बल्कि उसके बाद भी दो दिन तक हिंसा होती रही और प्रशासन पंगु बना रहा। क्षेत्र में जैमर की व्यवस्था करनी चाहिए थी ताकि लोग नेटवर्क से कट जाते लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने बताया कि शांति व्यवस्था कायम करने और अफवाहों पर अंकुश लगाने के लिए 18 मई तक इंटरनेट की सेवा पर प्रतिबंध लगाया गया है।
14 मई की रात मुसाफिर के घर पर तोड़फोड़ आगजनी और एक समुदाय के लोगों की मड़इयां जलाए जाने के बाद भी सख्ती की जाती तो फसाद न बढ़ पाता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
न केवल 14 बल्कि उसके बाद भी दो दिन तक हिंसा होती रही और प्रशासन पंगु बना रहा। क्षेत्र में जैमर की व्यवस्था करनी चाहिए थी ताकि लोग नेटवर्क से कट जाते लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने बताया कि शांति व्यवस्था कायम करने और अफवाहों पर अंकुश लगाने के लिए 18 मई तक इंटरनेट की सेवा पर प्रतिबंध लगाया गया है।
'कार्रवाई हुई होती तो नहीं होती घटना'
दाउदपुर में हिंसा के लिए एक समुदाय के लोगों ने पुलिस की भूमिका को जिम्मेदार बताया है। खुदादादपुर से कुछ ही दूरी पर सड़क पर स्थित दाउदपुर ग्राम पंचायत के प्रधान आदिब बदरुद्दीन ने कहा कि दो लोगों के विवाद के बाद पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की होती तो शायद यह घटना नहीं होती।
उन्होंने कहा कि हम क्षेत्र में अमन चैन चाहते हैं। 14 मई की रात की घटना के बाद पुलिस ने एक व्यक्ति को उसके घर से हिरासत में ले लिया। दोनों पक्षों के लोग मौके पर पहुंचे थे। इसी बीच अफवाह उड़ने के बाद बवाल हो गया। जगह-जगह पचास-पचास की संख्या में लोग देखे गए। प्रधान के पुत्र रफीउद्दीन उर्फ लाडे ने बताया कि जिस मुसाफिर को लेकर विवाद हुआ वह खुद आपराधिक प्रवृत्ति का है।
पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की। तीन मई को आटोरिक्शा के भाड़े को लेकर मुसाफिर और एक अन्य व्यक्ति के बीच हुए विवाद में ठोस कार्रवाई की गई होती तो बात नहीं बढ़ती। उन्होंने कहा कि वे अमन चैन चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि हम क्षेत्र में अमन चैन चाहते हैं। 14 मई की रात की घटना के बाद पुलिस ने एक व्यक्ति को उसके घर से हिरासत में ले लिया। दोनों पक्षों के लोग मौके पर पहुंचे थे। इसी बीच अफवाह उड़ने के बाद बवाल हो गया। जगह-जगह पचास-पचास की संख्या में लोग देखे गए। प्रधान के पुत्र रफीउद्दीन उर्फ लाडे ने बताया कि जिस मुसाफिर को लेकर विवाद हुआ वह खुद आपराधिक प्रवृत्ति का है।
पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की। तीन मई को आटोरिक्शा के भाड़े को लेकर मुसाफिर और एक अन्य व्यक्ति के बीच हुए विवाद में ठोस कार्रवाई की गई होती तो बात नहीं बढ़ती। उन्होंने कहा कि वे अमन चैन चाहते हैं।