{"_id":"5f3c93c5bcec58781e746e4f","slug":"in-2025-india-may-see-increase-in-cancer-disease-y-12-percent-indian-council-medical-research-report","type":"story","status":"publish","title_hn":"अगले पांच साल में कैंसर मरीजों की संख्या में 12 फीसदी की बढ़ोतरी : आईसीएमआर","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अगले पांच साल में कैंसर मरीजों की संख्या में 12 फीसदी की बढ़ोतरी : आईसीएमआर
Wed, 19 Aug 2020 08:21 AM IST
Tanuja Yadav
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Wed, 19 Aug 2020 08:21 AM IST
विज्ञापन
कैंसर टेस्ट
देश में कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं, अगले पांच साल में कैंसर के मामलों में पांच फीसदी की बढ़ोतरी देखी जा सकती है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय रोग सूचना विज्ञान और अनुसंधान केंद्र की ओर से जारी रिपोर्ट में ये बात कही गई है।
विज्ञापन
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल भारत में कैंसर के मामले 13.9 लाख रहने का अनुमान है जो 2025 तक 15.7 लाख तक पहुंच सकते हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि साल 2020 में तंबाकू से होने वाले कैंसर रोग. कुल मामलों के 27.1 फीसदी हो सकते हैं। इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर-पूर्वीय क्षेत्रों के लोगों में ज्यादा मामले देखे जा सकते हैं।
विज्ञापन
ईसीएमआर ने कहा कि राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम रिपोर्ट, 2020 में दिया गया यह अनुमान 28 जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री से मिली सूचना पर आधारित है। इसने कहा कि इसके अलावा 58 अस्पताल आधारित कैंसर रजिस्ट्री ने भी आंकड़ा दिया।
विज्ञापन
बयान में कहा गया है कि महिलाओं में छाती के कैंसर के मामले दो लाख (यानी 14.8 फीसद) , गर्भाशय के कैंसर के 0.75 लाख (यानी 5.4 फीसद) , महिलाओं और पुरूषों में आंत के कैंसर के 2.7 लाख मामले (यानी 19.7 फीसद) रहने का अनुमान है। इसके अलावा पुरुष में फेफड़े, मुंह, पेट जैसे कैंसर रोग होने की संभावना है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि एक अनुमान के मुताबिक साल 2020 में पुरुषों में कैंसर के नए मामले 6,79,421 और साल 2025 में 7,63,575 हो सकते हैं, वहीं महिलाओं में साल 2020 में 7,12,758 नए मामले और 2025 में 8,06,218 नए मामलों का अनुमान है।
एम्स के रेडिएशन ऑनकोलॉजी के पूर्व अध्यक्ष डॉ पीके जुल्का का कहना है कि पिछले कई सालों में कैंसर के इलाज में सुधार देखा गया है। उन्होंने कहा कि अब कैंसर से लड़ने के लिए बाजार में थैरपी उपलब्ध हैं, जिससे इलाज में सुधार आया है। हालांकि कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है लेकिन कई मरीज कैंसर की पहली स्टेज पर अपना इलाज कराने आ जाते हैं, जिससे देखभाल दर भी सुधर रही है।